के बी व्यास. बहरिन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के विभागाध्यक्ष के प्रोफ़ेसर हिम्मत सिंह सिन्हा जी 94 के होकर ब्रह्मलीन हुए। उनका ज्ञान अथाह था, और व्यक्ति सजग ना रहे तो उसे ज्ञान का अहंकार भी हो जाता है, मगर प्रोफेसर सिन्हा साहब में अहंकार बिल्कुल भी नहीं था क्यों कि वो ज्ञान हलक से नीचे उतर चुका था, वो ज्ञान आत्मसात हो चुका था। ऐसे में बुद्ध की एक बात याद आती है- अप्प दीपो भव – याने अपना दीपक ख़ुद बनो। जब ज्ञान आत्मसात हो जाता है तो भीतर का दिया जल जाता है।
प्रोफेसर सिन्हा का तृतीय पड़ाव बहरीन में हुआ। इस कार्यक्रम में बहरीन भारतीय दूतावास के सैक्रेट्री गिरीश पुजारी भी पधारे थे( जो फोटोग्राफ्स में नारंगी रंग की जैकेट पहने है) इसके अलावा डा रामेंद्र सिंह भी भारत कुरुक्षेत्र से पधारे थे ( सफेद शर्ट में)
स्नेहा देव तथा कौसर भुट्टो, जो महिला काव्य मंच से थीं, वे भी दुबई से आई थी।
कार्यक्रम बहुत सफ़ल रहा। प्रोफ़ेसर सिन्हा साहब के दो वीडियो भी हमने देखे। जोधपुर की डा मनीषा डागा, कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय के रिटार्यड हिन्दी विभाग के पूर्व हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट डा लाल सिंह मंगल, और मस्कत के एण्टरप्रोन्योनोर श्री तुफैल अहमद के विचार भी प्रोफ़ेसर हिम्मत सिंह सिन्हा के बारे में जो उन्होंने अनुभव किया, वे भी वीडियो के द्वारा बताए गए। १२ देशों की अगली कड़ी में हम कतर जाएँगे.







