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Sunday, August 23, 2026, 7:05 am

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Lifestyle

कविता : प्रतीक्षा…

कवि : एन डी निम्बावत सागर

प्रतीक्षा

बचपन में जब देते थे परीक्षा

तो, रिजल्ट आने की रोज रहती

प्रतीक्षा

नोकरी के लिए इंटरव्यू देने के बाद

सलेक्ट होने की रहती

प्रतीक्षा

जब हो गई सगाई

तो, शादी की करने लगते

प्रतीक्षा

ऑफिस से घर आते तो देखते

पत्नी कर रही है

प्रतीक्षा

जब हुआ था किसी से प्यार

न था वादा फिर भी मिलने की रहती

प्रतीक्षा

जीवन में सदा ही एक मीठा सा

एहसास देती रही है

प्रतीक्षा

हमारे जीवन की गति को

सदा बरकरार रखती

प्रतीक्षा

जब आता है बुढापा

रहने लगते है तब अस्वस्थ

खत्म हो जाती सभी इच्छाएं

और

करने लगते मौत की

प्रतीक्षा

बीत जाता हमारा सारा जीवन

करते-करते किसी न किसी की

प्रतीक्षा

एडवोकेट एन डी निम्बावत “सागर”
जोधपुर (राज.)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor