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Thursday, July 9, 2026, 1:13 am

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मुमुक्षु दिव्या भलगट बनी महासती दिव्यता श्री, मुमुक्षु दिव्या सिंघवी बनी महासती विरति श्री और मुमुक्षु मासूमी पटवा बनी महासती महत्ती श्री

(दीक्षा लेने से पूर्व तीनों मुमुक्षु)

आचार्य  हीराचंद्र महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुई तीन मुमुक्षुओं की जैन‌ भागवती दीक्षा

राखी पुरोहित. जोधपुर

सूर्यनगरी जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के दशहरा मैदान में आज सुप्रभात बेला में आचार्य भगवंत  हीराचंद्र महाराज,  आचार्य प्रवर  महेंद्र मुनि महाराज  आदि संत-सती वृन्द के पावन सानिध्य में तीन मुमुक्षु बहिनों की जैन भागवती दीक्षा सानन्द सम्पन्न हुई । तीन मुमुक्षु बहिनें अपने सांसारिक घर से अंतिम विदाई लेते हुए अभिनिष्क्रमण यात्रा के साथ दीक्षा स्थल तक पहुंची और दीक्षा के लिए आतुर होकर आचार्य भगवन्त को वन्दन करके अहोभाव से हाथ जोड़कर संयम ग्रहण करने हेतू खड़ी हो गई ।
आचार्य भगवंत के मुखारविंद से दीक्षा विधि प्रारंभ होने से पूर्व तीनों मुमुक्षु बहिनों ने अपने माता-पिता एवं परिजनों से आशीर्वाद लिया । तत्पश्चात पुज्य आचार्य भगवंत ने मुमुक्षुओं के माता-पिता एवं परिजनों से तथा संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से दीक्षा प्रदान करने की अनुज्ञा प्राप्त की । आज्ञा मिलते ही जैसे ही आचार्य भगवंत ने जीवन पर्यंत के लिए तीनों मुमुक्षु बहिनों को करेमि भंते के पाठ से दीक्षा प्रदान की तो सभा में उपस्थित जनसमूह ने गुरु हीरा की जय जयकार एवं नवदीक्षित महासतीयां जी की जय जयकार से दीक्षा स्थल को गुंजायमान कर दिया । दीक्षा कार्यक्रम में ज्ञानगच्छीय परंपरा के संत श्रद्धेय श्री रविंद्र मुनि जी महाराज साहब एवं महासती मंडल भी पधारें एवं संयम की महिमा का गुणगान किया । श्रद्धेय योगेश मुनि जी महाराज साहब ने संयम जीवन में सच्चा सुख बताते हुए नवदीक्षित सतीवृन्द को शुभकामना दी । भावी आचार्य प्रवर श्रद्धेय श्री महेंद्रमुनि जी महाराज साहब ने उपस्थित जन समूह को संयम की व्याख्या करते हुए सांसारिक भोगों को छोड़कर चारित्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा की तथा मुमुक्षु दिव्या जी भलगट को महासती दिव्यता श्री जी म.सा. एवं मुमक्षु दिव्या जी सिंघवी को महासती विरति श्री जी म.सा. एवं मुमुक्षु मासूमी जी पटवा को महासती महत्ती श्री जी म.सा.,उनके नवीन नाम से सम्बोधित किया । दीक्षा के पावन प्रसंग पर पूज्य आचार्य प्रवर श्री हीराचन्द्र जी म.सा. ने महत्ती कृपा करते हुए आशीर्वचन रूप में फरमाया कि जहर उतारने के लिए अनेक मंत्र हैं चाहे वो सांप का जहर हो, चाहे बिच्छू का जहर हो पर वह सभी मंत्र शरीर को स्वस्थ,मस्त बनाने वाला हैं पर भगवान ने जो मंत्र दिया है वह आत्मा को मस्त बनाने वाला हैं और वह मंत्र है समता भाव वाला “करेमि भंते का पाठ”जिसे विरले ही जीवनभर के लिए स्वीकार करते हैं,आपमें से कोई जीवनभर के लिए नहीं अपना सकता तो कम से कम एक-दो सामायिक के रुप में भी अपनाएं और अपने जीवन को धन्य बनाएं । मीडिया प्रभारी दीपक कुमार सिंघवी ने जानकारी देते हुए बताया कि दीक्षा कार्यक्रम में संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं स्थानीय पदाधिकारीगण के साथ अनेक गणमान्य श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही । श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ जोधपुर के अध्यक्ष श्री नवरतनमल डागा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि दीक्षा कार्यक्रम के संयोजक श्री धनपत सा सेठिया,श्राविका मंडल की अध्यक्ष श्वेता जी कर्णावट,युवक परिषद के अध्यक्ष श्री आशीष चौपड़ा के नेतृत्व में जोधपुर संघ के सभी श्रावक-श्राविका एवं युवा कार्यकर्ताओं के सहयोग से एवं चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के स्थानीय श्रावक-श्राविका एवं युवा कार्यकर्ताओं के विशेष सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor