Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 2:01 am

Thursday, July 9, 2026, 2:01 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

फ़रवरी मार्च में शुरू करना था वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान, 5 जून से किया, मानसून सक्रिय अधूरा छूटेगा अभियान, पैसों की बर्बादी

पूँछ हिलाऊ आई ए एस अधिकारी कैसी योजनाएं बनाते हैं ये किसी से छुपा नहीं हैं. अब वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान को ही लें, मानसून बरस रहा है और अभियान का कुछ पता नहीं, मंत्री-अफसर दौरा कर रहे हैं जबकि समय हाथ से निकल गया. क्या ही अच्छा होता अभियान 4-5 महीने पहले चलाया जाता, जलस्रोत की सफाई होती, आगोर से अतिक्रमण हटाते, अफ़सोस ऐसा नहीं हुआ, अफसर जनता को मुर्ख बनाते रहे और धन की बर्बादी होती रही. वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान दम तोड़ गया.. बधाई हो इस उपलब्धि के लिए सीएम भजन लाल शर्मा जी… कीप इट अप

डी के पुरोहित. जोधपुर

भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक विरासत में जल स्रोतों का विशेष महत्व रहा है। राजस्थान जैसे अर्धशुष्क राज्य में परम्परागत जल स्रोत – बावड़ियाँ, तालाब, कुएँ, जोहड़, टांके – न केवल जल आपूर्ति का साधन रहे हैं बल्कि समुदायों के सामाजिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा रहे हैं। जल संकट और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार ने “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य जन भागीदारी से जल स्रोतों की सफाई, पुनर्भरण और संरक्षण करना है।

लेकिन इस नेक उद्देश्य के साथ शुरू हुआ यह अभियान समय के लिहाज से गंभीर प्रश्नों के घेरे में है। जब मानसून की दस्तक राजस्थान में हो चुकी है और कई जगह प्री-मानसून बारिश हो चुकी है, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह अभियान अपने उद्देश्य को पूरा कर पाएगा? और क्या सरकार ने इसके लिए समय पर योजना बनाई थी?


अभियान का उद्देश्य और इसकी आवश्यकता:

“वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” का मुख्य उद्देश्य  पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार करना है. राजस्थान जैसे राज्य में, जहाँ साल भर का अधिकांश पानी मानसून में ही गिरता है, वहाँ इस जल को संरक्षित करने के लिए पुराने जल स्रोतों को सक्रिय और साफ रखना आवश्यक है।

लेकिन अभियान की घोषणा मई के अंत और जून के पहले सप्ताह में हुई। जबकि जल संरक्षण कार्यों की वास्तविक जरूरत फरवरी-मार्च से होती है, ताकि मई-जून आते-आते जल स्रोत बारिश का पानी समेटने को तैयार हों।


अदूरदर्शिता के प्रमाण:

1. समय की चूक:

जल स्रोतों की सफाई, खुदाई, गाद हटाने, किनारों की मरम्मत जैसे कार्यों में समय लगता है। यदि यह कार्य फ़रवरी मार्च में शुरू होते, तो जून के आते-आते अधिकांश पारंपरिक जल स्रोत बारिश का पानी संचित करने में सक्षम होते।
परंतु अब जबकि मानसून दस्तक दे चुका है, कई क्षेत्रों में वर्षा शुरू हो चुकी है, ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि

  • जल स्रोतों की सफाई अब होगी या बाद में?
  • क्या बारिश के पानी के साथ बहकर आने वाली गंदगी और गाद जल स्रोतों को और खराब नहीं करेगी?
  • क्या सरकार ने समय की संवेदनशीलता को नजरअंदाज कर दिया?

2. अभियान की धीमी प्रगति:

राजस्थान में इस अभियान के प्रचार-प्रसार को लेकर भी भारी कमी देखी गई है। कई जिलों में पंचायतों को कोई दिशा-निर्देश तक समय पर नहीं मिले। कई अधिकारियों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि उन्हें जून में ही जल स्रोतों की सूची भेजने और कार्य प्रारंभ करने को कहा गया, जबकि मई में गर्मी चरम पर होती है और कार्य आसान होता।


स्थानीय जन की प्रतिक्रिया:

राजस्थान के नागौर जिले के किसान भैराराम चौधरी कहते हैं,
“हमने मार्च में ही ग्राम पंचायत में गुहार लगाई थी कि हमारे जोहड़ की सफाई हो जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब तो बारिश आ गई है, अब क्या फायदा? बारिश का पानी बिना रुके बह जाएगा।”

जोधपुर की एक सरपंच बताती हैं,
“हमें 10 जून को सूचना मिली कि जल संरक्षण जन अभियान चलाना है। 15 दिन में हम क्या-क्या कर सकते हैं? मशीन चाहिए, मज़दूर चाहिए, और अब बारिश भी आने लगी है।”


विशेषज्ञों की चेतावनी:

सामाजिक कार्यकर्ता आशा व्यास कहती है,
“जल स्रोतों की सफाई मानसून से पहले होनी चाहिए। अब मानसून आ गया है, तो किसी भी तरह की खुदाई या मरम्मत से और अधिक नुकसान हो सकता है। पानी में बहाव तेज होता है, जिससे कच्चे किनारे टूट जाते हैं।”

वे यह भी कहते हैं कि जल स्रोतों की सफाई अब करना जोखिम भरा है और इससे स्थानीय पारिस्थितिकी को भी नुकसान हो सकता है।


राजनीतिक दृष्टिकोण:

विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाया है। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के एक नेता ने कहा,
“सरकार सिर्फ नाम बदलकर योजनाएं लाती है, लेकिन ज़मीनी तैयारी नहीं करती। वन्दे गंगा अभियान हो या अमृत सरोवर योजना – जब तक समय पर कार्य नहीं होगा, तब तक ये महज दिखावा है।”


समस्या का निचोड़:

जल संरक्षण सिर्फ नीति नहीं, नियोजन का विषय है। वर्षा से पहले यदि जल स्रोत तैयार नहीं हुए तो वर्षा का अधिकांश जल व्यर्थ बह जाएगा। यही हो रहा है आज। मानसून के साथ अभियान शुरू करना वैसा ही है जैसे खेत में फसल काटने के समय बीज बोना।

राजस्थान जैसे राज्य में, जहाँ जल का हर बूँद बहुमूल्य है, वहाँ जल संरक्षण का सही समय चूकना बड़ी अदूरदर्शिता है। यह सिर्फ सरकारी विफलता नहीं, बल्कि भविष्य की जल आपूर्ति पर संकट का संकेत है।


समाधान और सुझाव:

  1. पूर्व नियोजन की आवश्यकता:
    आगामी वर्षों में सरकार को फरवरी में ही जल स्रोतों की पहचान, सफाई और मरम्मत शुरू कर देनी चाहिए।
  2. स्थानीय संस्थाओं को सशक्त बनाना:
    ग्राम पंचायतों को पहले से फंड ट्रांसफर और तकनीकी मदद देकर उन्हें योजनाओं का स्वामित्व देना चाहिए।
  3. जनभागीदारी बढ़ाना:
    स्कूल, कॉलेज, युवा संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं इस अभियान में पहले से जोड़ी जाएँ ताकि सामाजिक चेतना जागे।
  4. मॉनिटरिंग और पारदर्शिता:
    हर जिले में एक निगरानी समिति बनाई जाए जो कार्यों की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा करे और रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

अच्छी पहल, समय अनुचित

वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान एक अच्छी पहल है, मगर इसे सही समय और सही रणनीति के साथ लागू नहीं किया गया। जल संरक्षण मौसम के अनुसार होने वाला कार्य है। जब नीति नियोजन से कट जाती है, तब उसका प्रभाव धरातल पर नहीं दिखता। मानसून आ चुका है, और जल स्रोत अधूरे पड़े हैं। सरकार को अब इस गलती से सीखते हुए अगले चक्र की तैयारियाँ अभी से शुरू करनी चाहिए। तभी “वन्दे गंगा” का नारा वास्तव में जल संकट से मुक्ति का मंत्र बन सकेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor