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Thursday, July 9, 2026, 9:23 am

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Lifestyle

कविता : भूख

(कविता : नाचीज बीकानेरी)

भूख

भूख नहीं होती तो
प्रगति भी नहीं होती
पाषाण युग से लेकर
अंतरिक्ष तक की
यात्रा भी नहीं होती  ।

तन-मन-धन की भूख
सुख-चैन छीन लेती है
राज की भूख पागल बना देती है
भूख अदना से आला
आला से अदना बना देती है  ।

भूख आदमी की कमजोरी है
भूख आदमी की आशा है
भूख से पाप, अनाचार व भृष्टाचार बढ़ता है
भूख धर्मात्मा को
पापी बना देती है  ।

भूख तो भूख ही है
भूख सुख-सुख का संसार है
भूख ऋषि मुनियों का
ईमान डगमगा देती है  ।

भूख से इंसान घर से बेघर
दर -दर की ठोकरें खाए
भूख इंसान को शैतान बनाए
भूख इंसान को भगवान से
मिलने की राह ले जाए  ।

भूख न होती तो
ये जीव – जगत
ये सृष्टि भी न होती
भूख इंसान की फितरत में है
भूख से भीख -भोजन-भोग का रिश्ता है ।

मान -सम्मान-यश की भूख
इंसान को याचक बनाती है
जन्म से मृत्यु तक भूख ही भूख
भूख अंधी होती है
भूख इंसान को भी अंधा बना देती है
भूख तो भूख है ।

मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी ,”
मो .9680868028

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor