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Thursday, February 26, 2026, 3:27 am

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पुरस्कार मिले न मिले मायड भाषा के लिए फर्ज निभाते रहें : संवितेंद्र

राजस्थानी लेखिका संस्थान द्वारा हुआ वरिष्ठ राजस्थानी लेखिकाओं का सम्मान और सालीणा उछब का आयोजन

राखी पुरोहित. जोधपुर

राजस्थानी लेखिका संस्थान द्वार शनिवार 28 जून प्रातः 10ः30 बजे नेहरू पार्क स्थित डाॅ. सावित्री-मदन डागा साहित्य भवन में वरिष्ठ राजस्थानी लेखिकाओं का सम्मान और सालीणा उछब का आयोजन हुआ। संस्थान की अध्यक्ष डॉ. शारदा कृष्ण ने अपने स्वागतीय उद्बोधन में बताया कि राजस्थानी लेखिकाओं का ये संस्थान राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के उत्थान को समर्पित है जिसकी स्थापना 2024 में हुई थी। जयपुर व बीकानेर के बाद जोधपुर में होने वाला यह कार्यक्रम वरिष्ठ राजस्थानी लेखिकाओं को समर्पित है।

इसमें वरिष्ठ राजस्थानी लेखिका डॉ. चाँद कौर जोशी, डॉ. दमयंती कच्छवाहा और डॉ. जेबा रशीद का मायड़ भासा के प्रति समर्पण को देखते हुए सम्मान किया गया। उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष सत्यदेव सवितेंन्द्र  ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि लिखना और पढ़ना चाहिए, न कि पुरस्कारों के लिए लिखा जाये। पुरस्कार मिले न मिले लेकिन अपनी मायड़ भाषा के प्रति प्रत्येक लेखक को अपना फर्ज़ निभाना चाहिये, और आज की राजस्थानी महिला लेखिकाओं की ऊर्जा देखते हुए ये आस सशक्त होकर जगी है कि राजस्थानी भाषा के मान्यता आंदोलन और राजस्थानी साहित्य के विकास में रालेस द्वारा अभूतपूर्व सहयोग मिलेगा।

आयोजन के दूसरे सत्र में डॉ कमला कमलेश पर बंसती पंवार ने उनका समग्र परिचय देते हुए उनका जीवन परिचय दिया, और उनके रचना कर्म पर प्रकाश डाला। साथ ही कोटा से आई श्वेता शर्मा ने कमला कमलेश की पोथी पगफैरा और वां दिनां कि बात पर अपना परचा प्रस्तुत किया।

डॉ सावित्री डागा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से उगम सिंह राजपुरोहित ने अपने विचार और परचा प्रस्तुत किया। द्वितीय सत्र के विशिष्ट अतिथि डॉ मीनाक्षी बोराणा और डॉ प्रोफेसर के. एल. राजपुरोहित और अध्यक्षीय भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार मनोहर सिंह राठौड़ ने निभाई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार मनोहर सिंह राठौड़ ने कहा कि राजस्थानी की मान्यता के लिए हमें अपने आप को मजबूत करना पड़ेगा।‌ राजस्थानी के सृजन से ही उसे बचाया जा सकता है। राजस्थानी भाषा की मठोठ का जिक्र करते हुए कार्यक्रम की सफलता पर अपनी खुशी जाहिर की।

वरिष्ठ अतिथि डॉ मीनाक्षी बोराणा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राजस्थानी में वर्तमान में महिलाओं द्वारा लिखे गये साहित्य को भी कार्यक्रमों के जरिए सामने लाना चाहिये, उन्होंने कमला कमलेश और सावित्री डागा पर पढे गये परचो का विस्तृत विवेचन किया। साथ ही डॉ प्रोफेसर के एल राजपुरोहित ने कहा कि पाठक का और लेखक का दोनों का बराबर दायित्व बनता है कि सृजन कर्ता लगोलग सृजन करें और पाठक उस लिखे को पढे और गुने। राजस्थानी साहित्य के विकास और विस्तार के लिए उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा के लेखन में जो भ्रांतियां है, वो दुखद है। उसे दूर करते हुए अब महिला लेखकों‌ से अपेक्षा है कि वो इसे और सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ायें।

समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ प्रकाश अमरावत ने की। उन्होंने कहा कि रालेस का गठन राजस्थानी भाषा आंदोलन और राजस्थानी साहित्य सृजन दोनों के लिए ही लाभकारी है। इस मंच से महिलाओं को एक सशक्त मंच मिला है, जो समय कि आवश्यकता भी है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि हमें पाठक बनना पड़ेगा। साथ ही सृजन के तौर पर जिस संवेदनाओं से एक महिला लिख सकती है, वो पुरुष नहीं लिख सकता। राजस्थानी भाषा के पुराने शब्दों और चलती आ रही परम्पराओं को समेटते हुए हमें राजस्थानी को जीवित रखना जरूरी है।

खास पावणा कालूराम परिहार ने कहा कि समाज की व्यवस्था को चेलेंज करके साहित्य सृजन करना कठिन काम है लेकिन वो करना ही अद्भुत काम होगा।

वरिष्ठ अतिथि माणक पत्रिका के सम्पादक पदम मेहता ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजस्थानी भाषा साहित्य और संस्कृति का विश्व में एक बेजोड़ स्थान है, राजस्थानी रै हक वास्तै आपा ने लड़नो पडसी।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ फतेहसिंह भाटी ने कहा कि राजस्थानी भाषा बचाने के साथ ही साथ हमें हमारी सभ्यता, संस्कृति और परम्पराओं और गुणो को बचाने की भी ज्यादा आवश्यकता है। और लेखक होने के नाते हमारे ऊपर ये दायित्व और अधिक बढ़ जाता है।

साथ ही वरिष्ठ लेखिका दर्शना कंवर ‘उत्सुक’ ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत करी और सत्र में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि

शीध्र ही वरिष्ठ लेखक जितेन्द्र जालोरी  के सहयोग से ‘रालेस’ जालोर जिले में भी अपना कार्यक्रम आयोजित करेगा। जोधपुर के कई वरिष्ठ और नवोदित साहित्यकारों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।डागा भवन, नेहरू पार्क में हुये इस कार्यक्रम में वरिष्ठ राजस्थानी लेखिका स्व. कमला कमलेश, कोटा पर तथा जोधपुर की वरिष्ठ राजस्थानी लेखिका स्व. डॉ.सावित्री डागा के व्यक्त्तित्व व कृतित्व पर भी चर्चा हुई

इस अवसर पर राजस्थानी ,हिन्दी व उर्दू के साहित्यकार अनामिका अनु,शिवानी पुरोहित,शालिनी गोयल, डॉ. नितिला माथुर,रेणू वर्मा, अशफाक फौजदार,सूर्यप्रकाश,कीर्ति परिहार,भाग्यश्री राजपुरोहित, शर्मिला संवितेन्द्र, छगनराज राव, निरंजन चौहान,मोहनसिंह , मनीषा डागा, कुलदीपसिंह भाटी, नीलम स्वयं सिद्धा, हरिप्रकाश राठी,दशरथ सोलंकी, मनोहरसिंह भाटी, मानाराम विश्नोई, लालसिंह राजपुरोहित,रत्नू,खेमकरण लाळस, उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में बसंती पंवार, उगमसिंह राजपुरोहित,श्वेता शर्मा कोटा के पत्र वाचन हुये। मोनिका शर्मा बीकानेर, दीपा परिहार, सुनीता शेखावत का विभिन्न सत्रों में संचालन रहा। डॉ.अंजना चौधरी,मोनिका वर्मा,मधुर परिहार ने सम्मानित लेखिकाओं का परिचय प्रस्तुत किया।
संस्थान की सचिव किरण राजपुरोहित, सह सचिव संतोष चौधरी , उपाध्यक्ष मोनिका गौड़ ने संस्थान की ओर से अपनी आयोजन को सफल करने में अपनी भूमिका निबाही।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor