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प्रतिभाओं का पलायन रोकना जरूरी

प्रतिभा को पलायन से रोकने के लिए मोदी सरकार तत्पर है. वास्तव में प्रतिभा ही देश के विकास की धुरी होती है…

राखी पुरोहित. जोधपुर

जब कोई देश अपने सबसे प्रतिभाशाली युवाओं, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, प्रोफेशनलों, कलाकारों या विचारकों को खो देता है, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस देश की सामूहिक क्षति होती है। इसे ही “प्रतिभाओं का पलायन” या Brain Drain कहा जाता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह समस्या और भी अधिक गंभीर है, जहां उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण में वर्षों की मेहनत और संसाधनों को लगाने के बाद जब कोई प्रतिभा विदेश जाकर वहां की प्रगति का साधन बनती है, तब यह देश के लिए चिंताजनक हो जाता है। इस आलेख में हम प्रतिभाओं के पलायन के कारणों, प्रभावों और इससे रोकथाम के उपायों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।


प्रतिभाओं का पलायन क्या है?

प्रतिभाओं का पलायन वह सामाजिक-आर्थिक स्थिति है, जिसमें एक देश के प्रतिभाशाली, शिक्षित एवं कुशल व्यक्ति बेहतर अवसरों, वेतन, सुविधाओं और जीवन-स्तर की खोज में अन्य देशों की ओर प्रवास कर जाते हैं। आमतौर पर यह प्रवास स्थायी हो जाता है और उनका योगदान उस देश को मिलता है, जिसने उन्हें शिक्षा नहीं दी, पर अवसर दिए।


भारत में प्रतिभाओं का पलायन — एक आंकड़ों की झलक

भारत से विदेश जाने वाले छात्रों और पेशेवरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उदाहरण के लिए:

  • 2023 में ही 7.5 लाख से अधिक भारतीय छात्र उच्च शिक्षा हेतु विदेश गए।
  • अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय आईटी और हेल्थ सेक्टर प्रोफेशनल्स की संख्या लाखों में है।
  • नोबेल पुरस्कार प्राप्त भारतीय मूल के कई वैज्ञानिक या लेखक स्थायी रूप से विदेशों में रहते हैं।

यह आंकड़े न केवल यह दर्शाते हैं कि भारत में प्रतिभाएं हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि उन्हें यहां वह अवसर नहीं मिल पा रहे जो वे चाहते हैं।


प्रतिभाओं के पलायन के प्रमुख कारण

  1. सुविधाओं की कमी:
    भारत में रिसर्च सुविधाएं, उच्च स्तरीय प्रयोगशालाएं, पर्याप्त फंडिंग, पेटेंट समर्थन जैसी बुनियादी चीजें अभी भी सीमित हैं। एक वैज्ञानिक को अपनी खोज के लिए जो वातावरण चाहिए, वह विदेशों में अधिक सुलभ होता है।
  2. वेतन और करियर ग्रोथ:
    अमेरिका, यूरोप या खाड़ी देशों में वेतन और जीवनस्तर भारतीय स्तर की तुलना में कई गुना बेहतर है। एक ही पद पर विदेश में 5-10 गुना अधिक वेतन मिलता है।
  3. राजनीति और लालफीताशाही:
    सरकारी तंत्र में राजनीति, भ्रष्टाचार, चापलूसी और लालफीताशाही के कारण योग्य व्यक्ति का सम्मान नहीं होता। विदेशों में योग्यता आधारित मूल्यांकन प्रणाली होती है।
  4. अनुकूल शोध वातावरण का अभाव:
    भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध को बढ़ावा नहीं मिलता, न ही उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत गठजोड़ है।
  5. सामाजिक और पारिवारिक आकर्षण:
    कई बार युवाओं को विदेशों की संस्कृति, स्वतंत्रता और जीवन शैली भी आकर्षित करती है।

प्रतिभाओं के पलायन के दुष्परिणाम

  1. राष्ट्रीय क्षति:
    जब एक प्रतिभाशाली व्यक्ति भारत छोड़ता है, तो यह केवल उसकी नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक निवेश और भविष्य की योजना की हानि होती है।
  2. रिसर्च और इनोवेशन में पिछड़ापन:
    यदि हमारे वैज्ञानिक, इंजीनियर और डॉक्टर्स विदेशों में काम करेंगे, तो भारत में रिसर्च, मेडिकेयर और टेक्नोलॉजी का विकास धीमा हो जाएगा।
  3. आर्थिक घाटा:
    उच्च शिक्षा पर सरकार द्वारा किया गया खर्च देश को वापस नहीं मिलता क्योंकि वह प्रतिभा किसी अन्य देश को सेवा देती है।
  4. समाज में असंतुलन:
    जब उच्च शिक्षा प्राप्त लोग विदेश जाते हैं, तब देश में अनुभवहीनता और नेतृत्व का अभाव होता है।
  5. सॉफ्ट पावर की कमी:
    प्रतिभाएं किसी देश की वैश्विक छवि और कूटनीति को भी मज़बूत बनाती हैं। उनका पलायन सॉफ्ट पावर को भी प्रभावित करता है।

कुछ सकारात्मक पहलू भी

हालांकि पलायन को केवल नकारात्मक रूप में देखना उचित नहीं होगा। कुछ पहलू ऐसे हैं जो देश को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ भी पहुंचाते हैं:

  • रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा भेजना):
    एनआरआई द्वारा भारत में भेजी जाने वाली विदेशी मुद्रा भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है।
  • ग्लोबल नेटवर्किंग:
    विदेशों में बसे भारतीय उच्च पदों पर रहकर भारत को वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व देते हैं।
  • टेक्नोलॉजी और ज्ञान का ट्रांसफर:
    कई बार विदेश में सीखी तकनीक और अनुभव को व्यक्ति भारत लौटकर लागू करता है (उदाहरण: स्टार्टअप्स में योगदान)।

प्रतिभाओं का पलायन रोकने के उपाय

  1. शिक्षा में सुधार और नवाचार का प्रोत्साहन:
    भारत में उच्च शिक्षा को केवल डिग्री आधारित न बनाकर नवाचार और अनुसंधान केंद्रित बनाना होगा।
  2. रिसर्च और स्टार्टअप्स को फंडिंग:
    वैज्ञानिकों, युवा उद्यमियों, और नवाचारकों को पर्याप्त फंडिंग और इन्क्यूबेशन सुविधा दी जाए।
  3. योग्यता आधारित चयन प्रणाली:
    नौकरियों और पुरस्कारों में पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि व्यक्ति की योग्यता के आधार पर उसे अवसर मिलें।
  4. समान अवसर और सुविधा:
    विदेशों जैसी सुविधाएं, कार्य-संस्कृति और प्रोत्साहन की नीति भारत में लागू होनी चाहिए।
  5. पुनरागमन नीति (Reverse Brain Drain):
    विदेशों में बसे प्रतिभाशाली भारतीयों को भारत लौटने के लिए आकर्षित करने की नीति बननी चाहिए, जैसे: शोध संस्थानों में उन्हें उच्च पद, वेतन, और स्वतंत्रता दी जाए।
  6. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP):
    सरकारी और निजी संस्थाएं मिलकर शोध एवं विकास को गति दें, जिससे युवा प्रतिभाओं को देश में ही मंच मिले।

भारत सरकार की कुछ पहलें

  •  विदेशों में बसे भारतीय वैज्ञानिकों को भारत में अल्पकालिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए आमंत्रित करती है।
  • स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया:
    इन पहलों के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP):
    इसमें नवाचार, लचीलापन और स्किल पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने का वादा किया गया है।

समाज की भूमिका

केवल सरकार या नीतियां ही नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने युवाओं को देशप्रेम, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित करे। परिवार, शिक्षक और मीडिया को युवाओं को यह समझाने की जरूरत है कि विदेश जाना ही सफलता नहीं, देश में रहकर बदलाव लाना भी एक महान कार्य है।


पलायन राष्ट्रीय समस्या

प्रतिभाओं का पलायन एक राष्ट्रीय चिंता है, जिसका समाधान केवल बंदिशों से नहीं, बल्कि अवसरों से किया जा सकता है। जब देश में ही युवाओं को वह सम्मान, सुविधा, और अवसर मिलेंगे जो उन्हें विदेशों में मिलते हैं, तब ही यह प्रवृत्ति रुकेगी। आज आवश्यकता है एक ऐसी राष्ट्र नीति की, जो न केवल प्रतिभाओं को विकसित करे, बल्कि उन्हें भारत में ही समर्पित और सक्रिय बनाए रखे।

प्रतिभा कभी सीमाओं की मोहताज नहीं होती, पर राष्ट्र की उन्नति के लिए उसका अपने घर में रहना आवश्यक होता है।


 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor