(सेमिनार में श्रमिक नेता ने कहा कि श्रमिक संगठित नहीं होंगे तो शोषण रुकने वाला नहीं हैं।)
भूखे पेट को दो जून की रोटी ही नहीं पूरा हक चाहिए, ऐसा नहीं हुआ तो मजदूर वर्ग आंदोलन की बिसात बिछाने को तैयार : गोपीकिशन
राखी पुरोहित की विशेष रिपोर्ट. जोधपुर
श्रमिक नेता कॉमरेड गोपीकिशन ने कहा कि अब वो समय गया जब कहा जाता था कि श्रमिक को दो जून की रोटी चाहिए। अब श्रमिक वर्ग ने ठान लिया है कि वो पूरा हक लेंगे। मालिकों को उन्हें अपनी पूंजी में हिस्सा देना होगा। आखिर कब तक उनका शोषण होगा। सरकारें कब तक श्रमिकों का हक मारेगी। काले श्रमिक कानूनों का विरोध किया जाएगा। श्रमिको का हक नहीं मिला तो क्रांति तय है। वे शुक्रवार को राजस्थान ट्रेड यूनियन केंद्र (आरसीटू) सभागार में श्रमिक जगत की हस्ती रहे कॉमरेड मोहन पुनमिया की 28वीं पुण्यतिथि के मौके पर भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड) की ओर से आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। लाल सलाम…मोहन पुनमिया अमर रहे…जब तक सूरज चांद रहेगा पुनमिया तेरा नाम रहेगा…जैसे नारों के बीच गोपीकिशन ने कहा कि श्रमिक वर्ग को हमेशा दीन-हीन समझा गया। मालिकों ने हमेशा उनका हक मारा। अच्छी सरकार और अच्छे संस्थान वही है जो श्रमिकों को उनकी मेहनत का दाम और सम्मान देते हैं। मगर अब श्रमिकों को न दाम मिलता है और न ही सम्मान। श्रमिकों को निरीह प्राणी समझा जाता है।
संगठन में ही शक्ति, संगठित होकर ही पूंजीवाद से मुकाबला संभव :
पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य व प्रदेश सचिव गोपीकिशन ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते समय श्रमजीवी जगत के पास संगठन से बड़ा दूसरा कोई हथियार नहीं है। श्रमजीवी वर्ग के शोषण से मुक्ति के लिए मार्क्सवाद व उनके विचारों की आज के समय में प्रासंगिकता है और यह श्रमजीवी वर्ग की मजबूत एकता के जरिये ही संभव है। जो केवल एक संगठन के जरिये ही संभव हो सकती है। संगठन पार्टी का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसके लिये विशेष प्रयास व ध्यान संयुक्त रूप से दिया जाना आवश्यक है।
आठ घंटे काम के अधिकार का उल्लंघन हो रहा, फिर रेल किराया बढ़ा आम आदमी की कमर तोड़ दी :
गोपीकिशन ने कहा कि श्रमिकों को प्राप्त विधिक अधिकार, जिसमें एक कार्य दिवस में आठ घंटे काम का अधिकार सम्मिलित है, उसे भी पूंजीपति वर्ग द्वारा चुनौती दी जा रही है। केन्द्र व राज्य सरकारों की आर्थिक उदारीकरण व औद्योगिक नीतियों के परिणामस्वरूप देश व प्रदेश में छोटे, बड़े व मंझले उद्योग तेजी से बंद हुए है और बेरोजगारी बढ़ी है। केन्द्र सरकार हर क्षेत्र में महंगाई पर विराम लगाने में नाकाम साबित होती जा रही है। रोजगार के सृजन में भारी कमी आई है जो कि चिंता का विषय है। केन्द्र व प्रदेश सरकार की इन श्रमिक विरोधी नीतियों से स्पष्ट है कि वह किसी भी स्थिति में मजदूर आंदोलन का दमन कर श्रमिकों का शोषण करना चाहती है तथा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। रेल किराया व मालभाड़ा, गैस, पेट्रोलियम पदार्थ सहित जीवनउपयोगी वस्तुओं की कीमतों में निरंतर इजाफा किया जा रहा है जिससे आम जनता त्रस्त है।
सरकारों की नीतियां श्रमिक विरोधी :
गोपीकिशन ने कहा कि सरकारों की नीतियां श्रमिक विरोधी हैं। केन्द्र व राज्य सरकार बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बावजूद राहत प्रदान करने के लिये आगे नहीं आ रही है। केन्द्र एवं राज्य सरकार की श्रमिक-कर्मचारी-किसान सहित जन विरोधी नीतियों ने निराशा का माहौल पैदा कर दिया है। गोपीकिशन ने कहा कि श्रमजीवी वर्ग के समक्ष वामपंथ और मार्क्सवाद ही एक हथियार है जो वर्तमान परिस्थितियों में उनके अधिकारों के संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता है। गोपीकिशन ने मेहनतकश वर्ग से एकता व संघर्ष का संकल्प लेकर आंदोलन का आह्वान करते हुए कहा कि जब तब वे राजनीति पर नियंत्रण नहीं करेंगे, जीवन भर ऐसे ही ठगे जाते रहेंगे और संघर्ष ही करते रहेंगे। सम्मेलन में पार्टी के वर्षभर में किये गये कार्यों तथा संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा की गई।
इन्होंने भी किया संबोधित, कहा- श्रमिक विरोधी संशोधन सरकार वापस लें :
कॉ. बृजकिशोर, कॉ. नदीम खान, रमेशनाथ, वहीदुदीन, हबीबुर्रहमान सहित अनेक वक्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कॉ. मोहन पुनमिया के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला और कहा कि वे राजस्थान ट्रेड यूनियन संगठनों व कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से एक थे और वे हमेशा कांतिकारी मार्क्सवादी विचारकों में अग्रणी रहे। संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद मेहनतकश आवाम के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में सम्मेलन के आरंभ में पार्टी सचिव कॉ. नदीम खान की संगठनात्मक व राजनैतिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिस पर बहस में उपस्थित सदस्यों ने हिस्सा लिया और पार्टी के विस्तार व मेहनतकश वर्ग के आंदोलन को आगे बढाने के लिए सुझाव पेश किये। सम्मेलन में श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी संशोधनों को वापिस लेने, सामाजिक सुरक्षा प्रदान कराने, कमरतोड़ महंगाई पर रोक लगाने, साम्प्रदायिकता पर रोक लगाने सहित जनहित के अनेक प्रस्ताव पास किए गए। सम्मेलन स्थल को लाल झंडों व बैनरों से सुसज्जित किया गया।










