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Thursday, March 12, 2026, 9:29 am

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सेवाभावी बाली सिंह से बातचीत : पुण्यार्थम्… हर माह 3 लाख से 75 संस्कार केंद्र और 1.26 लाख से 18 स्कूल हो रहे संचालित, कच्ची बस्तियों के बच्चों का इंजीनियरिंग-आईटीआई में चयन

-गुरुजी माधव सदाशिव गोलवलकर के सपनों को सच करने जनसहयोग से जल रही शिक्षा-संस्कारों की ज्योत

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी माधव सदाशिव गोलवलकर का मानना था कि शिक्षा केवल जानकारी का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्रनिर्माण का आधार होनी चाहिए। वे कहते थे कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो चरित्रवान, आत्मनिर्भर और राष्ट्रभक्त नागरिक तैयार करे। उनका स्पष्ट विचार था कि संस्कारों से ही व्यक्ति महान बनता है, और यही संस्कार गृह, विद्यालय और समाज मिलकर देते हैं। गुरुजी का विश्वास था कि भारत का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी में निहित है। यदि युवाओं को उचित शिक्षा, नैतिकता और सेवा-भावना दी जाए तो वे भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बना सकते हैं। वे मानते थे कि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों में भी अपार प्रतिभा होती है, बस उन्हें मौका, मार्गदर्शन और संस्कारों की आवश्यकता होती है। उनकी दृष्टि में शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो राष्ट्र प्रथम, सेवा, सहयोग, और संघर्षशीलता जैसे मूल्यों को आत्मसात कराए। उनका जीवन इसी विचार का उदाहरण था—संघ के माध्यम से संगठन, सेवा और संस्कारों की अखिल भारतीय चेतना जागृत करने वाले महान विचारक और कर्मयोगी के रूप में वे आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।… इसी भावना से माधव सेवा समिति ने एक शिक्षा-संस्कार-संस्कृति और सामाजिक सरोकार का एक आंदोलन चलाया है- पुण्यार्थम्…।

पुण्यार्थम् क्या है? समिति के सह सचिव बाली सिंह बताते हैं- पुण्यार्थम् सही मायने में पुण्य का कार्य है। यह पुण्य का कार्य शिक्षा के माध्यम से किया जा रहा है। शिक्षा में संस्कार भी है, राष्ट्र चेतना भी है, नशे से बचने का जागरण भी है, खेलों से बलिष्ठ बनाने की भावना भी है और भविष्य को मजबूत बनाकर राष्ट को सशक्त बनाने का मूलमंत्र भी है। यह कार्य हो रहा है जन सहयोग से। अभी सत्र जुलाई 2025-26 के प्रवेश चल रहे हैं। बाली सिंह लोगों और समर्थ संस्थाओं से अपील करते हैं कि वे इन संस्कार केंद्रों और विद्यालयों को गोद लें ताकि शिक्षा और संस्कार की ज्योत प्रज्वलित होती रहे। राष्ट्र आराधना के यज्ञ में कल्याण की आहुतियां जारी रहे।

98 सेवा बस्तियों में चल रहे स्कूल-संस्कार केंद्र 

वर्तमान में जोधपुर शहर की 98 सेवा बस्तियों में से बासनी, सूरसागर, बनाड, भदवासिया व रातानाडा सेवा बस्तियों में संस्कार और शिक्षा के 18 विद्यालय सहित 75 संस्कार केंद्र संचालित हैं। एक संस्कार केंद्र पर 4000 और कुल 75 संस्कार केंद्रों पर करीब 300000 रुपए मासिक खर्च होते हैं। इसी तरह 18 विद्यालयों पर 7 हजार के हिसाब से औसतन 126000 मासिक खर्च आता है।

माधव सेवा समिति के सह सचिव बाली सिंह से राइजिंग भास्कर का साक्षात्कार

1. श्री माधव सेवा समिति शिक्षा के क्षेत्र में किन मूलभूत सिद्धांतों को आधार मानकर कार्य कर रही है?
(उत्तर)- शिक्षा, संस्कार, सेवा व स्वावलंबन को।
2. आपके अनुसार वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों में शिक्षा और संस्कार लाने से समाज में किस प्रकार का परिवर्तन देखने को मिला है?
(उत्तर)- शिक्षा व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है, नशा नहीं करना, देश संपत्ति की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण आदि ।
3. संस्कार केंद्रों और विद्यालयों में बच्चों को किन गतिविधियों से जोड़ा जाता है जो उन्हें आत्मनिर्भर और चरित्रवान बनाते हैं?
(उत्तर) महापुरुषों की जयंती व कार्यक्रम कर, महापुरुषों के जीवन चित्र को बनाकर व खेलकूद के माध्यम से व प्रतिदिन की वंदना सभा ।
4. संस्थान द्वारा संचालित विद्यालयों और संस्कार केंद्रों में शिक्षा के अलावा और कौन-कौन से नैतिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं?
(उत्तर)- कन्या पूजन, अंबेडकर जयंती, शिक्षक दिवस, गुरु पूर्णिमा, वाल्मीकि जयंती व रक्षाबंधन पर अपने हाथों से बनी राखी बस्ती में घर घर जाकर बांधना, मिट्टी से गणेशजी की प्रतिमा बनाना व पूजन, दीपावली पर दीपक बना कर बस्ती में वितरण ।
5. संस्था किन तरीकों से बच्चों में राष्ट्रभक्ति, सेवा और स्वाभिमान की भावना विकसित करती है?
(उत्तर)- प्रत्येक माह देशभक्ति गीत, महापुरुषों के अमृतवचन, सुभाषित, गीता श्लोक का वाचन कर
6. गुरुजी माधव सदाशिव गोलवलकर के विचारों से प्रेरित होकर संस्था किस तरह शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है?
(उत्तर)- “जहां कोई नहीं वहां हम” नीति पर, प्रामाणिक व निरंतर प्रवास, समय पालन। सामग्री वितरण केवल पारितोषिक के निमित्त।
7. संस्था द्वारा संचालित 75 संस्कार केंद्र और 18 विद्यालयों का संचालन किन चुनौतियों और संकल्पों के साथ होता है?
(उत्तर)- बस्ती में कार्यरत कार्यकर्ता के आर्थिक सहयोग की चुनौती महत्वपूर्ण होती है, बस्ती की महिला कार्यकर्ता बस्ती से बाहर कार्य करने में झिझकते हैं।
8. आपके द्वारा संचालित सेवा बस्तियों में किन विशेष सामाजिक या आर्थिक बदलावों को आप महसूस करते हैं?
(उतर)- अन्यों को देखकर पहनावे, बोलचाल व रहन-सहन में परिवर्तन बस्ती में आया है, नशे की लत की कमी होने पर आर्थिक रूप से सक्षम जरूर हुए हैं।
9. संस्थान की शिक्षा प्रणाली और सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में क्या अंतर है और संस्था किस दिशा में विशेष कार्य कर रही है?
(उत्तर)- विशेष कोई अंतर नहीं, सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम को लेकर उसमें कुछ नवाचार के विषय जैसे-पर्यावरण, प्लास्टिक मुक्ति, जल संरक्षण आदि के विषय पर कार्यशाला होती है तथा संस्था राष्ट्रीय विषयों को लेकर इन बस्तियों में जाकर जागरूकता अभियान चलाती है।
10. कोई एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करें जहां किसी बच्चे या परिवार के जीवन में संस्था के प्रयासों से सकारात्मक बदलाव आया हो।
(उत्तर)- संस्था सत्र 2012 से कार्य कर रही है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय अंबेडकर नगर पाक विस्थापित विद्यालय में जब कार्य प्रारंभ किया तब वहां कुल 40 बच्चों का नामांकन था तथा भवन भी जर्जर अवस्था में था, आज ये विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय है वहां भामाशाह के सहयोग से 30-35 लाख का कार्य हुआ तथा वर्तमान मे 344 का नामांकन है। जिसमें कुछ बच्चों का इंजीनियरिंग, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान आदि में चयन हुआ है।
11. सामान्य नागरिक राशि के अलावा किस प्रकार सहयोग कर सकता है?
(उत्तर)- समय पर चल रहे कार्य को देखना, बच्चों को नई तकनीक सिखाना ये अत्यंत आवश्यक है ।
12. संस्थान की भावी योजनाएं क्या है?
(उत्तर) कुल 100 स्थानों व 25 सरकारी विद्यालयों में कार्य करने की योजना है।
13. 80G के अंतर्गत कर-मुक्त सहयोग की सुविधा कितनी सहायक सिद्ध हो रही है, और क्या लोग इसके प्रति जागरूक हैं?
(उत्तर) कुछ लोग अवश्य जागरूक है, वे सहयोग तन-मन-धन से करते है, लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है
14. जो लोग सेवा क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं, उन्हें आप किस प्रकार प्रेरित और मार्गदर्शित करते हैं?
(उत्तर) उन्हें अपने कार्य की जानकारी देना तथा अपने साथ लेकर कार्य दिखाना।
15. आपका संदेश उन लोगों के लिए जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, लेकिन अभी तक शिक्षा और संस्कार जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए आगे नहीं आए हैं? उन्हें कैसे प्रेरित करेंगे?
(उत्तर)- संपर्क कर उनसे मिलना व अपने कार्य व बस्ती के होनहार बच्चों की जानकारी देना कि किस प्रकार कम साधन में भी बच्चे कितना बेहतर कार्य कर रहे हैं।

पुण्यार्थम् के पुण्य-पुरुषार्थ से जागृत हो रहा बचपन

शिक्षा : बच्चों में ज्ञान का प्रकाश फैल रहा है। जरूरतमंद बच्चों को आसानी से शिक्षा मिल रही है और वे अपने भविष्य को लेकर आशान्वित हैं।
शारीरिक-मानसिक विकास : खेल-खेल में बच्चों का शारीरिक विकास किया जा रहा है। साथ ही तरह-तरह की एक्टिविटी से मानसिक सशक्तिकरण भी हो रहा है।
संस्कृति-संस्कार : बच्चों में संस्कार का बीजारोपण हो रहा है। वहीं संस्कृति की पौध लहलहाने लगी है। ये बच्चे भोजन मंत्र, गीता श्लोक और दोहों के माध्यम से संस्कार और संस्कृति से जुड़ रहे हैं।
नशा मुक्ति : बच्चों को नशे की दुनिया से दूर रखा जा रहा है। उन्हें अपने परिवार के लोगों को भी नशे से बचने के संस्कार दिए जा रहे हैं। बच्चों को नवजागरण की भोर से जोड़ा जा रहा है।
सशक्त भविष्य की नींव : इन संस्कार केंद्रों और विद्यालयों के माध्यम से सशक्त भविष्य की नींव रखी जा रही है। यह कार्य कर माधव सेवा समिति समाज में आदर्श स्थापित कर रही है।
राष्ट्र चेतना : बच्चों में राष्ट्रवाद और राष्ट्र चेतना की सीख दी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि किस तरह राष्ट्र भक्ति से देश के विकास को नव आयाम दिया जा सकता है।
अच्छे नागरिक : इन बच्चों को अच्छा नागरिक बनना सिखाया जा रहा है। बच्चों में गुणों का विकास कर अच्छी सीख के माध्यम से सभ्यता और संस्कारों के साथ मानवता का विकास किया जा रहा है।
कला का विकास : बच्चों में छुपी नैसर्गिक कला और आर्ट को विकसित किया जा रहा है। उन्हें क्रिएशन से जोड़कर रोजगार की दिशा में ढालने का प्रयास किया जा रहा है।

इस तरह बन सकते हैं आप भी सहभागी 

संस्था के एकाउंट में सहयोग राशि डाल सकते हैं। राशि जमा करने के पश्चात नाम, पैन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर व पूरा पता सहित 9784010900 पर जरूर बताएं ताकि रसीद बनाई जा सकें। संस्था को दिया गया आर्थिक सहयोग 80G के अन्तर्गत कर आयकर मुक्त है।
Shri Madhav Sewa samiti
Axis Bank account
920010073203038
IFSC-UTIB0003668
Saraswati nagar Branch, Jodhpur
संजय कुमार
(उपाध्यक्ष, श्री माधव सेवा समिति)
बाली सिंह
(सहसचिव, श्री माधव सेवा समिति) (9784010900)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor