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Sunday, October 18, 2026, 9:43 am

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Lifestyle

गुरु पूर्णिमा पर नीलम व्यास स्वयंसिद्धा की रचनाएँ

गुरुदेव स्तुति

सुनो गुरुदेव भरो हिय ज्ञान,
लिखे नव गीत सुने ज़माना।
बहे मधु राग सजें सुर ताल,
प्रणाम करूँ पद धूल पाना।

मुझे अपने चरणों रज मान,
विकार मिटाय पुनीत पाना।
नहीं मन से तज के मुँह मोड़,
चलो मुझको तप हैं सिखाना।।

मिले नव लक्ष्य चलूँ सत राह,
हरो मन पीर जिया खिलाना।
भरो उर तेज रटू गुरु नाम,
निभा कर धर्म सुधा पिलाना।

प्रभो दिखते गुरुदेव कृपालु,
धरूँ तव शीश मुझे मिलाना।
मिटे तम ओज भरो उर आज,
सदा गुणगान लगें सुहाना।।

नीलम व्यास स्वयंसिद्धा

जय गुरुदेव
माधव मालती/मन मनोरम छंद

राह गुरुजी है दिखाते, ज्ञान दाता तार देना।
दूर हो अज्ञान मेरे, नाव मेरी आप खेना।
प्रेरणा गुरुवर हमारे, छंद गीतों को सिखाया।
भाव से भर ओज वाणी, ग्रंथ नव को है लिखाया।।

हाथ गुरु का थाम कर ही, मन उजाले से भरा है।
साथ देना आप गुरुवर, मोह माया मन धरा है।।
सूर्य हो गुरु चाँद हो गुरु, आप से ही है उजाला।
ज्ञान धारा में बही हूँ,लेखनी सुर राग ढ़ाला।

नीलम व्यास स्वयंसिद्धा

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor