कपिल भटनागर. नई दिल्ली
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसी देश की सर्वोच्च नौकरशाही सेवाओं की निष्पक्षता, राष्ट्रभक्ति और पारदर्शिता पर एक खतरनाक साया मंडरा रहा है। हाल ही में सामने आई एक गोपनीय रिपोर्ट ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है, बल्कि पूरे राष्ट्र को हिलाकर रख दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीते तीन दशकों से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अन्य पाक प्रशिक्षित जासूसी नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से UPSC परीक्षा में अपने एजेंटों की घुसपैठ करवा रहे हैं।
इस गंभीर रिपोर्ट को भारत के खुफिया निगरानी संगठन UPSC वॉच ने केंद्र सरकार को सौंपा है। इसमें कुछ ऐसे व्यक्तियों की सूची दी गई है, जो IAS और IPS बनकर बिहार, उत्तर प्रदेश, और अन्य सीमावर्ती राज्यों में सेवा कर चुके हैं और अब पाकिस्तान लौट चुके हैं। इसके पीछे की रणनीति, लापरवाही और राजनीतिक मिलीभगत की परतें अब खुलने लगी हैं।
1. रिपोर्ट का निष्कर्ष: कौन हैं UPSC वॉच और क्या है उनके पास सबूत?
UPSC वॉच एक अर्ध-गोपनीय निगरानी संस्था है जिसे केंद्र सरकार ने एक दशक पूर्व खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में बनाया था। इसका कार्य सिविल सेवा परीक्षा में संभावित सुरक्षा खतरे, विदेशी हस्तक्षेप और अनुचित गतिविधियों पर नजर रखना है।
इस बार UPSC वॉच ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- 1988 से 2015 तक UPSC परीक्षा के माध्यम से चुने गए कुछ उम्मीदवारों के दस्तावेज, पहचान और शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।
- इन उम्मीदवारों का संबंध पाकिस्तानी सीमा के पास के क्षेत्रों से था, और इनमें से अधिकांश की पृष्ठभूमि संदिग्ध थी।
- कुछ नाम ऐसे हैं जो भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहकर देश की नीतियों, कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र तक पहुंच रखते थे, और सेवा समाप्ति के बाद रहस्यमय तरीके से भारत छोड़ चुके हैं।
2. बिहार, यूपी और सीमावर्ती क्षेत्र क्यों बने ISI के लिए आसान निशाना?
रिपोर्ट में कहा गया है कि ISI ने खास तौर पर बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान जैसे राज्यों को लक्ष्य बनाया क्योंकि:
- इन राज्यों में सीमावर्ती क्षेत्रों में आसान प्रवेश, नकली पहचान पत्र बनवाना और सीमित प्रशासनिक निगरानी की सुविधा थी।
- कई बार प्रशासनिक पदों के लिए सामाजिक-आर्थिक पिछड़े वर्गों से आने वाले लोगों को प्राथमिकता मिलने के कारण, ISI ने इन वर्गों को छलकर भर्ती में आसानी पाई।
- धार्मिक और जातीय पहचान का लाभ उठाकर कई एजेंट फर्जी भारतीय नागरिक बन गए।
3. सूची में कौन-कौन से नाम? सेवा कहां दी और अब कहां हैं?
रिपोर्ट में लगभग 23 नाम शामिल हैं, जिनमें से:
- 9 पूर्व IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने विभिन्न जिलों में कलेक्टर, सचिव और सचिवालय स्तर पर काम किया।
- 11 IPS अधिकारी रहे, जो SP से लेकर IG स्तर तक पदों पर आसीन रहे।
- 3 अन्य केंद्रीय सेवा अधिकारी थे, जिन्हें RAW, IB और गृह मंत्रालय जैसे विभागों में तैनाती मिली।
इनमें से अधिकांश अब पाकिस्तान या खाड़ी देशों में सक्रिय हैं, और वहां कथित रूप से भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।
4. भर्ती प्रक्रिया में सेंध: UPSC प्रणाली कितनी पारदर्शी?
UPSC को भारत की सबसे कठिन और पारदर्शी परीक्षा माना जाता है। लेकिन रिपोर्ट ने सवाल उठाए हैं कि:
- प्रवेश परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक, कौन-कौन से चरणों में घुसपैठ संभव है?
- कई बार आईटी और साइबर फ्रॉड के जरिए डेटाबेस से छेड़छाड़ हुई।
- इंटरव्यू पैनल में कुछ ऐसे सदस्य शामिल थे जिन पर पक्षपात और सांठगांठ के आरोप लगे।
UPSC वॉच ने यह भी संकेत दिए हैं कि कुछ राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने जानबूझकर फर्जी उम्मीदवारों को प्रमोट किया, जिससे उनकी वफादारी ISI जैसे संगठनों की ओर बनी रही।
5. पूर्व सरकारों और राजनेताओं की भूमिका संदिग्ध
सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर पिछले 30 सालों से ये घुसपैठ चल रही थी, तो भारत सरकार, गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों ने क्या किया?
- रिपोर्ट में 1990 के दशक से लेकर 2010 तक की सरकारों पर विशेष रूप से उंगलियां उठाई गई हैं।
- कुछ पूर्व केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और सीमावर्ती राज्य सरकारों के अधिकारियों की मिलीभगत और चुप्पी को “देशद्रोही चूक” की संज्ञा दी गई है।
- एक पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ तो रिपोर्ट में ये तक लिखा है कि उन्होंने “सिस्टम में कुछ नामों को सुरक्षित रखने की सिफारिश की थी”।
6. देश की सुरक्षा पर खतरा: इन अफसरों ने क्या-क्या लीक किया?
इन जासूस अफसरों ने:
- जासूसी नेटवर्क, सैन्य ठिकानों की जानकारी, पुलिस वायरलेस कोड, VIP मूवमेंट, सीमा सुरक्षा रणनीतियाँ ISI तक पहुंचाई।
- गृह मंत्रालय की गोपनीय बैठक, कश्मीर नीति, नक्सल योजना और चुनावी रणनीति जैसे दस्तावेज लीक हुए।
- कुछ मामलों में तो हथियारों की डिलीवरी तक की सूचना लीक कर आतंकी घटनाओं को अंजाम तक पहुंचाया गया।
7. अब क्या कदम उठा रही है सरकार?
रिपोर्ट के लीक होते ही:
- गृह मंत्रालय ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
- IB, RAW, और CBI को संयुक्त रूप से इन नामों की जांच सौंप दी गई है।
- UPSC अध्यक्ष और सचिव से भी जवाब तलब किया गया है।
- सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि सेवा में रहे इन अफसरों को मरणोपरांत भी ‘देशद्रोह’ के तहत चिन्हित किया जा सकता है और उनकी पेंशन एवं परिवार को मिलने वाली सुविधाएं बंद हो सकती हैं।
8. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष और सत्ता आमने-सामने
- भाजपा ने इसे “कांग्रेस काल की एक और ऐतिहासिक भूल” बताया और तत्काल हाईलेवल जांच की मांग की।
- कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि “अब सरकारें खुद को बचाने के लिए फर्जी रिपोर्टों का सहारा ले रही हैं।”
- पूर्व नौकरशाहों और थिंक टैंक्स ने मांग की है कि UPSC की परीक्षा प्रणाली की स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट होनी चाहिए।
क्या अब भी समय बचा है?
UPSC जैसी संस्था को लेकर भरोसा अब सवालों के घेरे में है। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के स्तंभों में से एक है। अगर इन स्तंभों में ही घुन लग चुका है, तो इसका मतलब है कि हमारी पूरी व्यवस्था खतरे में है।
देश को अब एक ऐसी पारदर्शी, निडर और राष्ट्रवादी समीक्षा प्रक्रिया की ज़रूरत है जो राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर सच्चाई को सामने ला सके। वरना, वो दिन दूर नहीं जब निर्णय लेने वाली कुर्सियाँ दुश्मन के हाथों में होंगी — और हम अनजान रहेंगे।
विशेष अनुसंधान सहायता:
- पूर्व RAW अधिकारी से इनपुट
- रिटायर्ड DIG से बातचीत
- RTI दस्तावेज
- UPSC वॉच की लीक रिपोर्ट के अंश



