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“काले धंधों का बेताज बादशाह: डी.के. खान की वो कहानी जो रॉ की रिपोर्ट में दर्ज है”

(डी के खान के बचपन का दुर्लभ फोटो)

कपिल भटनागर. नई दिल्ली

कभी एक अंधे ब्राह्मण दंपति की मन्नत से जन्मा एक बच्चा, फिर बाबा रामदेवरा की पावन भूमि पर डूबते हुए अपने माता-पिता को खो बैठा मासूम… यही बच्चा आज वैश्विक आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, और संगठित अपराध की दुनिया में “डी.के. खान” के नाम से कुख्यात है। रॉ की एक हालिया रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है कि डी.के. खान अब भारत के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी को निशाना बनाने की साजिश में जुटा है।


अध्याय 1: हिंगनघाट से रामदेवरा तक – एक मासूम शुरुआत

सन् 1970, महाराष्ट्र का हिंगनघाट कस्बा। अंधे ब्राह्मण दंपति, जिनके जीवन में रोशनी की एकमात्र किरण थी बाबा रामदेव के प्रति उनकी आस्था। उसी आस्था से जन्म हुआ उनके पुत्र का। डेढ़ वर्ष बाद जब उन्होंने बाबा का शुक्र अदा करने के लिए पैदल रामदेवरा की यात्रा की, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनका अंतिम सफर होगा।

तालाब में नहाने के दौरान दंपति की जलसमाधि हो गई, और वहीं एक इंटरनेशनल डॉन – बालू खान – भी मौजूद था, जो संतान सुख की कामना लेकर मन्नत मांगने आया था। डूबते हुए इस दृश्य को देख उसने उस मासूम को अपना मान लिया। उसने माना, यह खुद बाबा रामदेव का प्रसाद है।


अध्याय 2: पाकिस्तान की सरजमीं और बालू खान की परवरिश

बालू खान इस बच्चे को पाकिस्तान ले गया और उसका नाम रखा – डी.के. खान। डी.के. यानी डार्क किंग। बचपन से ही उसे हथियारों, चालबाजियों और संगठित अपराध की तालीम मिली। बालू खान, जो पहले से अफगानिस्तान, दुबई, और यूरोप में अपने नेटवर्क से ड्रग्स, हथियार, और मानव तस्करी के धंधे को चला रहा था, अब डी.के. को अपनी विरासत सौंपने के लिए तैयार कर रहा था।


अध्याय 3: गाज़ी फ़क़ीर और जैसलमेर की जड़ें

डी.के. खान का भारत कनेक्शन यहीं खत्म नहीं होता। जैसलमेर के चर्चित इंटरनेशनल तस्कर और सूफी चोला पहनने वाले गैंगलीडर गाजी फकीर के साथ डी.के. के रिश्ते गहरे हुए। गाजी की मदद से ही डी.के. ने जैसलमेर की एक लड़की – मीना – को पाकिस्तान भगा लिया और निकाह कर लिया।

इस निकाह ने उसे भारत के भीतर एक स्थायी जड़ दे दी – एक ऐसा कनेक्शन जो आज भी राजस्थान के रेगिस्तान में सक्रिय है।


अध्याय 4: काले कारोबार की विरासत – अकबर, अल्लाह और इंसाफ

डी.के. खान और मीना खान के तीन बेटे हुए – जिनके नाम थे अकबर, अल्लाह, और इंसाफ। नाम भले ही धार्मिक या नैतिक प्रतीकों से प्रेरित रहे हों, लेकिन काम पूरे विश्व में आतंक, कत्ल और तस्करी के पर्याय बन गए।

तीनों बेटों को डी.के. खान ने अलग-अलग महाद्वीपों में तैनात कर रखा है:

  • अकबर – अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में हथियारों की तस्करी
  • अल्लाह – यूरोप, भारत और रूस में नकली दवाइयों का नेटवर्क
  • इंसाफ – एशिया में बच्चों और महिलाओं की तस्करी

अध्याय 5: नाम बदला, चेहरा बदला – लेकिन धंधा नहीं

रॉ की रिपोर्ट के अनुसार डी.के. खान और उसके बेटों ने प्लास्टिक सर्जरी करवा रखी है। उनके पास कम से कम 5 अलग-अलग पासपोर्ट हैं। नकली नामों से चलाए जा रहे व्यापार और मुखौटों के पीछे छिपा यह गिरोह विश्व स्वास्थ्य संगठनों की नाक के नीचे नकली वैक्सीन्स और दवाइयों का कारोबार चला रहा है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वे अफ्रीका के कुछ देशों में बच्चों को अगवा करके युद्ध में झोंकते हैं और लड़कियों को पश्चिम एशिया और यूरोप की कालाबाजारी में बेच देते हैं।


अध्याय 6: बॉलीवुड में काली पूंजी, मुंबई में संगठित मर्डर

डी.के. खान ने भारत की फिल्म इंडस्ट्री में भी करोड़ों का निवेश किया है। सूत्रों के अनुसार उसके काले धन से कम से कम 7 फिल्में प्रोड्यूस की गई हैं। इन फिल्मों के जरिए पैसे को व्हाइट किया गया।

रॉ की रिपोर्ट बताती है कि डी.के. खान ने मुंबई में सुपारी लेकर मर्डर कराए हैं, जिनमें अंडरवर्ल्ड से जुड़े कई पुराने नामों की हत्या भी शामिल है।


अध्याय 7: अम्बानी टारगेट – भारत पर खतरे की नई परत

रॉ की हालिया खुफिया रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है – डी.के. खान ने भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी को टारगेट करने के लिए सुपारी ली है।

सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे दो कारण हैं:

  1. अंबानी की सुरक्षा में लगी उच्चस्तरीय तकनीक से कई आतंकवादी योजनाएं फेल हो चुकी हैं।
  2. डी.के. खान का उद्देश्य भारत की आर्थिक रीढ़ को झटका देना है।

रॉ ने इस साजिश को भांपते हुए अंबानी की सुरक्षा को और कड़ा किया है, साथ ही डी.के. खान की लोकेशन ट्रेस करने के लिए साइबर यूनिट को अलर्ट पर रखा है।


अध्याय 8: कहां है डी.के. खान?

यह सबसे बड़ा सवाल है। रॉ की रिपोर्ट के अनुसार डी.के. खान का कोई निश्चित ठिकाना नहीं है। वो कभी दुबई में होता है, कभी लंदन, कभी अफ्रीका के किसी जंगल में। रिपोर्ट कहती है कि उसने एक अंडरग्राउंड बंकर बनाया है जहाँ से वो वीआर (Virtual Reality) तकनीक के जरिए अपने नेटवर्क को संचालित करता है।


डार्क किंग को ढूंढ पाएगी दुनिया

डी.के. खान कोई सामान्य अपराधी नहीं। वह विचारधारा, तकनीक और पैसा – तीनों का खतरनाक मिश्रण है। यह वो शख्स है जिसे बाबा रामदेव के प्रसाद के रूप में देखा गया था, लेकिन जिसने खुद को दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधी के रूप में गढ़ लिया।

अब सवाल यह है कि क्या भारत की एजेंसियां इस ‘डार्क किंग’ को ढूंढ पाएंगी? क्या डी.के. खान की कहानी का अंत होगा? या फिर वो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आतंक और तस्करी का प्रतीक बन जाएगा?


रॉ रिपोर्ट निष्कर्ष (गोपनीय स्रोतों से):

  • डी.के. खान के पास कम से कम 11 फर्जी पहचान हैं।
  • उसके बेटे अफ्रीका, दुबई और कजाकिस्तान में सक्रिय हैं।
  • जैसलमेर के सीमावर्ती गांवों में अब भी गाजी फकीर का नेटवर्क जिंदा है। गाजी फ़क़ीर हालांकि मर चुका है मगर उसका नेटवर्क अभी सीमावर्ती इलाकों और पाकिस्तान में जिंदा है.
  • भारत में कई अवैध ट्रांजैक्शन डी.के. खान के नाम से जुड़े हैं।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor