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Sunday, August 23, 2026, 5:23 am

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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: नोटों से हटेंगे गांधी, आएंगे श्रीकृष्ण? विपक्ष में मचा बवाल

राखी पुरोहित की नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार एक ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सूत्रों के अनुसार, अब भारतीय करेंसी नोटों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर की जगह भगवान श्रीकृष्ण की छवि लगाने पर गंभीर विचार किया जा रहा है। इसके लिए भाजपा नेतृत्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अर्थशास्त्रियों के बीच प्रारंभिक विमर्श शुरू हो चुका है।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी के भीतर इस विचार को लेकर तेज़ी से मंथन चल रहा है। यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री मोदी के एक ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ आधारित दृष्टिकोण से भी जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारत की सनातन परंपराओं को और अधिक प्रमुखता देने की बात शामिल है।

नोटों पर बदलाव की तैयारी

वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी इस विषय पर विचार किया गया है। श्रीकृष्ण की छवि का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है क्योंकि वे धर्म, नीति, कृषि, व्यापार और आध्यात्मिकता—सभी क्षेत्रों के प्रतीक माने जाते हैं।

सूत्र बताते हैं कि प्रारंभिक योजना के अनुसार, यह बदलाव 100, 500 और 2000 रुपयों के नोटों पर प्रभावी किया जा सकता है, लेकिन यह चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और जनता की प्रतिक्रिया को भी ध्यान में रखा जाएगा।

 ‘रामराज्य’ की ओर सांस्कृतिक संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मोदी सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वह रामराज्य, भारतीयता और आध्यात्मिक मूल्यों को शासन व्यवस्था में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने मथुरा और द्वारका परियोजनाओं में भी भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित “धार्मिक पर्यटन सर्किट” की बात की थी, जिसे इस निर्णय से जोड़ा जा रहा है।

विपक्ष का तीखा विरोध

सरकार के इस संभावित फैसले पर कांग्रेस, टीएमसी, सपा, आप समेत कई विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के एक लीडर ने तो यहां तक कह दिया कि –

“गांधीजी सिर्फ भारत के नहीं, पूरी दुनिया के लिए सत्य और अहिंसा के प्रतीक हैं। उनका स्थान नोटों पर केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और नैतिक रूप से अनमोल है।”

टीएमसी के एक सांसद ने कहा-

“यह कोई संस्कृति नहीं, यह सत्ता की सनक है। गांधी को हटाकर भगवान को राजनीति में घसीटना बेहद निंदनीय है।”

जनता की राय दो भागों में बंटी

जनता के बीच इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मानते हैं कि श्रीकृष्ण जैसे सनातन प्रतीकों को नोटों पर लाना भारतीय अस्मिता की पुनर्स्थापना है, वहीं कुछ वर्ग इसे एक राजनीतिक हथकंडा मान रहे हैं।

मोदी सरकार देश की पहचान को एक नई सांस्कृतिक परिभाषा देना चाहती है

हालांकि यह प्रस्ताव अभी औपचारिक स्तर पर नहीं पहुंचा है, लेकिन इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार देश की पहचान को एक नई सांस्कृतिक परिभाषा देने की ओर अग्रसर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कदम वास्तव में लागू होता है या विपक्ष के दबाव और संवैधानिक बहसों के चलते पीछे हटता है। क्या भारत एक “धर्मनिरपेक्ष गणराज्य” से “धार्मिक राष्ट्र” की ओर बढ़ रहा है? यह प्रश्न आने वाले समय की राजनीति की धुरी बन सकता है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor