राइजिंग भास्कर, जोधपुर
ग्रुप एडिटर – डी.के. पुरोहित
दिनांक: 24 जुलाई 2025
सेवा में,
श्री ओमप्रकाश जी,
पुलिस कमिश्नर, जोधपुर शहर
विषय: जोधपुर की सुरक्षा व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था पर आपके कार्यकाल के लिए शुभकामना एवं कुछ ज़रूरी सुझाव
आदरणीय श्री ओमप्रकाश जी,
सर्वप्रथम राइजिंग भास्कर परिवार की ओर से आपको जोधपुर शहर के पुलिस कमिश्नर पद का कार्यभार संभालने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आपकी अब तक की सेवा पृष्ठभूमि अनुशासन, निर्णय क्षमता और निर्भीकता की मिसाल रही है। ऐसे में आपकी नियुक्ति से जोधपुर के नागरिकों को नई उम्मीदें जगी हैं। परंतु, यह भी कटु सत्य है कि जोधपुर आज कई भीतरी और बाहरी अपराध नेटवर्कों की गिरफ्त में है – और आपका कार्यकाल एक बड़ी परीक्षा के रूप में सामने खड़ा है।
10 वर्षों से विकराल होती चुनौतियाँ
जोधपुर, जो कभी मर्यादा और संस्कृति के लिए जाना जाता था, पिछले एक दशक में अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। बीते वर्षों में हमने नीचे दिए गए गंभीर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी देखी:
- बजरी माफिया का बोलबाला:
अवैध खनन और बजरी माफिया की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि कई पूर्व पुलिस अधिकारी भी या तो चुप रहे या स्थानांतरण के बाद ही बोल पाए। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी सीमा तक ट्रकों की आवाजाही और खनन माफिया के खुलेआम संचालन ने कानून को मज़ाक बना दिया है। - साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी:
साइबर अपराधियों का जाल दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। लाखों की ठगी, सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग, ओटीपी फ्रॉड – ये अपराध अब गली-मोहल्लों तक पहुँच चुके हैं। - नशीले पदार्थों की तस्करी:
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े ड्रग सिंडिकेट्स आज स्कूल-कॉलेज के बच्चों तक को निशाना बना रहे हैं। NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई तो होती है, लेकिन असली सरगना आज भी कानून की पकड़ से दूर हैं। - छोटे अपराधों की बड़ी फौज:
मोबाइल झपटमारी, चैन स्नैचिंग, बाइक चोरी, घरों में सेंधमारी और ट्रैफिक सिग्नल्स पर लूट जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधी नाबालिगों को आगे कर रहे हैं। - संदिग्ध और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी:
बाहरी राज्यों से आए कुछ गिरोह जोधपुर में सक्रिय हैं, जो धर्म, जाति और वर्ग के आधार पर सामाजिक विद्वेष फैलाने का काम कर रहे हैं। इनकी निरंतर निगरानी और पहचान अब अनिवार्य हो चुकी है।
अब जनता को चाहिए “कार्रवाई” ना कि सिर्फ “विज्ञप्ति”
आदरणीय कमिश्नर साहब,
आपके पूर्ववर्ती अधिकारियों के कार्यकाल में अधिकतर मामलों में प्रेस विज्ञप्तियों में “कड़ी निगरानी”, “सख्त कदम” और “फोर्स अलर्ट” जैसे जुमले तो खूब बोले गए, परंतु जमीनी कार्रवाई बेहद सीमित रही। आज जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, दिखने वाली सख्ती चाहिए।
क्या आप उन पुलिस प्रमुखों की सूची में शामिल होंगे जो वातानुकूलित कमरों में बैठकर केवल पीआर गतिविधियों तक सीमित रहे? या फिर आप एक ऐसा उदाहरण स्थापित करेंगे जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा?
डीसीपी पश्चिम श्री विनीत कुमार से अपेक्षाएं
पश्चिमी जोधपुर – जहाँ से शहर की सबसे बड़ी आवासीय, शैक्षणिक और औद्योगिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं – वहाँ की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती है। श्री विनीत कुमार जैसे युवा और तेजतर्रार अफसर से जनता को तेज कार्रवाई, सक्रिय बीट पुलिसिंग और लोक संवाद की उम्मीद है।
आपके लिए कुछ सुझाव:
- जन संवाद अभियान:
प्रत्येक थाने को निर्देशित किया जाए कि वे हर महीने एक “जनसुनवाई दिवस” आयोजित करें, जिसमें थानेदार आम नागरिकों की शिकायतें सीधे सुनें। - माफिया सूची का प्रकाशन:
बजरी, शराब, ड्रग, सट्टा और साइबर अपराध से जुड़े स्थानीय माफिया की सूची जारी कर पब्लिक डोमेन में लाया जाए। - महिला सुरक्षा पर विशेष सर्किट:
स्कूल, कॉलेज और हॉस्टलों के आसपास पिंक पेट्रोलिंग यूनिट सक्रिय की जाए, ताकि छात्राओं और महिलाओं में विश्वास बहाल हो। - पुलिस का सामाजिक चेहरा:
“जनपुलिस मित्र” योजना को फिर से शुरू कर हर वार्ड में जागरूक नागरिकों को जोड़कर पुलिस को सूचना तंत्र मजबूत करना चाहिए। - सस्पेंड और ट्रांसफर नहीं, जेल भेजिए:
भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ केवल निलंबन नहीं, FIR और गिरफ्तारी होनी चाहिए।
अंतिम शब्द
राइजिंग भास्कर का सिद्धांत रहा है – “सत्ता से सवाल, व्यवस्था से संवाद”।
हम आपको न केवल शुभकामनाएं देते हैं, बल्कि पूरे शहर की ओर से यह अपेक्षा रखते हैं कि आप इस शहर में कानून का राज स्थापित करेंगे, ना कि प्रेस रिलीज़ का शासन।
यदि आप साहसिक और जनमुखी निर्णय लेते हैं, तो पूरा मीडिया और नागरिक समाज आपके साथ होगा।
आपका शुभेच्छु,
डी.के. पुरोहित
ग्रुप एडिटर, राइजिंग भास्कर
जोधपुर
(प्रतिलिपि: डीसीपी पश्चिम श्री विनीत कुमार को भी प्रेषित)




