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Sunday, October 18, 2026, 9:00 am

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महामृत्युंजय कोटि रुद्र हवन में अभी तक 45 लाख आहुतियां दी

संवित धाम में 1008 पार्थिव शिवलिंग की पूजा 27 को

भरत जोशी. जोधपुर 

परमहंस स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज द्वारा दईजर लाछा बासनी में स्थापित संवित धाम आश्रम में श्रावण मास की हरियाली तीज पर 27 जुलाई को सायं 5 बजे से 1008 पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक, पूजा, अर्चना होगी। 24 जुलाई को पुष्य नक्षत्र की पुण्य वेला में वैदिक मंत्रों के साथ ब्राह्मणों ने पार्थिव शिवलिंग का निर्माण शुरू किया। वहीं 12 जुलाई से लगातार एक माह तक चल रहे भव्य महामृत्युंजय कोटि रुद्र हवन में अभी तक महामृत्युंजय मंत्रों के साथ 45 लाख आहुतियां दी जा चुकी हैं। संवित साधनायन सोसायटी की अध्यक्षा रानी ऊषा देवी के निर्देशन और सोमयाजी अग्निहोत्री पंडित नवरतन व्यास के आचार्यत्व में महामृत्यंजय हवन और पार्थिव शिवलिंग का विशेष पूजन होगा। पार्थिव शिवलिंग का निर्माण शुद्ध मिट्टी, गंगाजल, दूध के मिश्रण से किया जा रहा है। कलयुग में पार्थिव शिवलिंग की पूजा विशेष लाभदायी है। माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पाने के लिए पार्थिव शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी।

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के सचिव भरत जोशी और संयुक्त सचिव शेखर थानवी ने बताया कि श्रावण मास की हरियाली तीज के मघा ओर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र की पुण्य वेला में अग्निहोत्री पंडित नवरतन व्यास के नेतृत्व में 1008 पार्थिव शिवलिंग का दूध, दही, घृत, शहद, पंचामृत से अभिषेक होगा। नक्षत्र के अधिपति भग है जो कि भगवान शिव और देवता इंद्र का भी नाम है। साथ ही शुक्ल यजुर्वेद के त्रिशती के 300 रुद्र नामावली के साथ बिल्व पत्र, भस्मी, रुद्राक्ष से अर्चना होगी। बाद में आश्रम परिसर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग वन के समुद्र जल में पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन किया जाएगा। महेश हर्ष, श्यामकिशन बोहरा, रामराज पुरोहित, अश्विनी व्यास, नेमाराम गहलोत, अनुज अवस्थी, महेश जोशी, मदन सिंह राजपुरोहित और विनोद त्रिवेदी सहित अन्य साधक पार्थिव शिवलिंग के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं।

रुद्राग्नि से बन रही भोजन प्रसादी

संवित धाम आश्रम में प्रतिदिन भोजन भंडारा प्रसादी रुद्राग्नि से बन रही है। आश्रम की लक्ष्मी सोनी और शशिबाला कल्ला ने बताया कि पहले दिन अरणी मंथन से अग्नि प्रज्ज्वलित की गई थी जिससे हवन कुंड में अग्नि स्थापित की गई और उसी अग्नि से भोजनशाला में माता अन्नपूर्णा के समक्ष अखंड दीपक प्रज्ज्वलित किया गया है तथा उसी दीपक की अग्नि से प्रतिदिन भोजनशाला में चूल्हा जलाकर भोजन प्रसादी बनाई जा रही है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor