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Thursday, July 9, 2026, 1:13 am

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राइजिंग भास्कर विशेष खोजी रिपोर्ट : अनंत पद्मनाभस्वामी की मूर्ति: 7800 किलो सोना, 780,000 हीरे और एक रहस्य जिसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती

केरल के तिरुवनंतपुरम से राइजिंग भास्कर की खास रिपोर्ट

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित अनंत पद्मनाभस्वामी मंदिर विश्व के सबसे रहस्यमय और समृद्ध मंदिरों में से एक है। लेकिन इस मंदिर की एक सबसे असाधारण और चौंकाने वाली बात है – यहां स्थित भगवान विष्णु की एक अनोखी प्रतिमा, जिसे अनंत पद्मनाभस्वामी की मूर्ति कहा जाता है।

यह मूर्ति सिर्फ़ श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय कला, संपदा और आध्यात्मिक रहस्य का अद्वितीय संगम है। 7800 किलो शुद्ध सोना, 780,000 हीरे, 780 कैरेट हीरों से जड़ी यह प्रतिमा इतनी बेशकीमती है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी इसकी कीमत तय नहीं कर सके। इसकी वास्तविक कीमत “खरबों” में नहीं, बल्कि “अनंत” में मानी जा रही है।


इतिहास की परतों में दबा एक चमत्कार

यह मूर्ति लगभग 3000 वर्षों से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। यह तथ्य ही इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए रहस्य बन चुका है।

ऐसा कहा जाता है कि इस मूर्ति की स्थापना चेर वंश के शासनकाल में की गई थी, और तब से यह मूर्ति किसी भी आक्रमण, प्राकृतिक आपदा या चोरी के प्रयासों से अछूती रही है।

इतिहासकार डॉ. पंडलम नारायणन कहते हैं:

“भारत में हजारों मंदिर हैं, लेकिन अनंत पद्मनाभस्वामी जैसी सुरक्षा और रहस्य का संगम कहीं नहीं देखा गया… मूर्ति खुद एक जीवित कथा है।”


मूर्ति की बनावट: अद्भुत शिल्प और अलौकिक सौंदर्य

यह मूर्ति भगवान विष्णु को योगनिद्रा मुद्रा में दर्शाती है, जो शेषनाग के सहारे विश्राम कर रहे हैं। खास बात यह है कि पूरी मूर्ति:

  • 7800 किलो शुद्ध सोने से बनी है।
  • 780,000 हीरों और 780 कैरेट हीरों से जड़ी गई है।
  • इसकी आँखों, मुकुट, और छाती पर लगे रत्न प्राकृतिक और प्राचीन खदानों से मिले थे।
  • यह एक ही प्रस्तर पर नहीं, बल्कि 12 खंडों में विभाजित है, लेकिन देखने में यह एक अखंड मूर्ति प्रतीत होती है।

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मूर्ति की ऊर्जा और आभा इतनी प्रबल है कि इसके सामने खड़े होना अपने आप में ध्यान की अनुभूति देता है।


फ़्रांस से आई विशेषज्ञ टीम भी रह गई दंग

सन् 2018 में भारत सरकार ने विश्व स्तर पर मूर्ति के सांस्कृतिक मूल्यांकन के लिए फ्रांस की एक विशेष संग्रहालय व गहना विशेषज्ञ टीम को आमंत्रित किया।

टीम ने  लगभग 10 दिनों तक इस मूर्ति का परीक्षण किया, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सके

उनका कहना था:

“इस मूर्ति का मूल्यांकन करना मानो किसी तारे को तौलने जैसा है… यह कला, अध्यात्म और असंभव धरोहर का संगम है।”


छुपा खजाना या साक्षात् ईश्वर का तेज?

साल 2011 में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर के तहखानों को खोला गया, तो करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का खजाना सामने आया।

लेकिन सबसे रहस्यमय और “न छुए गए” तहखाने में ही यह मूर्ति स्थापित है — जिसे Vault B या “ताकत का द्वार” कहा जाता है।

यहां आम लोगों का जाना निषिद्ध है, और ऐसा विश्वास है कि इस तहखाने को खोलना संपूर्ण भारतवर्ष पर संकट ला सकता है। यही कारण है कि सरकार और ट्रस्ट इसे बंद ही रखने में विश्वास रखते हैं।


केवल एक वीडियो दर्शन: समस्याओं का समाधान?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा जिसमें यह दावा किया गया कि “जो व्यक्ति इस मूर्ति को नहीं देख सकता, वह इस वीडियो के माध्यम से भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है और अपनी समस्याओं से मुक्ति पा सकता है।”

यह वीडियो मात्र एक डिजिटल कंटेंट नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का माध्यम बन चुका है।

धार्मिक विचारक प्रो. रमेश भट्ट कहते हैं:

“भगवान की मूर्ति या तस्वीर हो या डिजिटल वीडियो — सच्ची श्रद्धा हो, तो वह माध्यम बन जाता है ईश्वर से जुड़ने का। और पद्मनाभस्वामी की यह मूर्ति तो स्वयं चमत्कार है।”


मूल्य: खरबों से परे…

सोने और हीरों के वर्तमान अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्यों के अनुसार:

  • 7800 किलो सोना = ₹4.3 लाख करोड़ (लगभग)
  • 780,000 हीरे = ₹8.5 लाख करोड़ से अधिक
  • 780 कैरेट हीरे = ₹3000 करोड़ से अधिक

लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मूल्य इससे कहीं अधिक है क्योंकि यह धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

भारतीय पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पी.के. श्रीधरन के अनुसार:

“यह मूर्ति ना बेची जा सकती है, ना तौली जा सकती है। इसकी वास्तविक कीमत केवल एक शब्द में समझी जा सकती है — ‘अनंत’।”


सुरक्षा व्यवस्था: सबसे कड़ा पहरा

इस मूर्ति और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत सख्त है:

  • भारतीय सेना, केरल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ 24 घंटे तैनात रहती हैं।
  • 24×7 CCTV निगरानी और बायोमैट्रिक एक्सेस सिस्टम।
  • तहखानों के बाहर 6 लेयर सुरक्षा तंत्र और कंप्यूटराइज्ड मोनिटरिंग सिस्टम।

मूर्ति का आध्यात्मिक महत्व: क्यों लोग इसे केवल ‘देखने’ से धन्य हो जाते हैं?

इस मूर्ति को देखने मात्र से व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति, कष्टों से मुक्ति और मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

कई श्रद्धालु इसे जीवन की सबसे पवित्र घटना मानते हैं। कहा जाता है कि इस मूर्ति की ऊर्जा इतनी प्रबल है कि ये ध्यान में बैठे ऋषियों जैसी अनुभूति देती है।


वर्तमान चुनौतियाँ: धरोहर बनाम सुरक्षा बनाम तकनीक

हालाँकि मूर्ति को आधुनिक तकनीकों से सुरक्षित रखा गया है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी रहती हैं:

  • समय-समय पर इसके मूल्य पर अंतरराष्ट्रीय नज़रें।
  • चोरी या आक्रमण के अतीत के खतरे।
  • मूर्ति के भव्यता और ऊर्जा  रूप से जोड़ना।

निष्कर्ष: यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, भारतीय आत्मा का अंश है

अनंत पद्मनाभस्वामी की यह मूर्ति केवल आस्था, सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक नहीं है — यह भारत की चेतना, संस्कृति और गौरव की संजीवनी है।

आज जब दुनिया पथभ्रष्टता, अशांति और मानसिक तनाव से जूझ रही है, यह मूर्ति केवल सोना और हीरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति का दीप है।

यदि आप इसे प्रत्यक्ष देख सकें तो सौभाग्य, और न देख सकें तो भी एक वीडियो ही पर्याप्त है — क्योंकि श्रद्धा माध्यम से नहीं, मन से जुड़ती है।


 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor