रोकथाम नहीं की तो परिणाम भयंकर होंगे…
डी के पुरोहित. नई दिल्ली
“हमने 2005 में जो देखा था, हम उसे फिर से नहीं देख सकते। समय है रोकथाम का, नहीं तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।” यह बात WHO ने हाल ही में तल्ख़ चेतावनी देते हुए कही हैं.
एक भुलाया हुआ खतरा फिर लौट आया है
साल 2005-06 की बात है जब चिकनगुनिया नामक बीमारी ने हिंद महासागर के कई द्वीपों को झकझोर कर रख दिया था। भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मॉरीशस, मेडागास्कर और कई अन्य देशों में लाखों लोग एक झटके में बिस्तर पर पड़ गए।
और अब, लगभग दो दशक बाद, वही वायरस एक बार फिर अपने पंजे फैलाने लगा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 119 देशों में करीब 5.6 अरब लोग अब इस बीमारी के उच्च जोखिम में हैं।
तेज़ी से फैल रहा वायरस: डेटा की ज़ुबानी खतरा
WHO की ग्लोबल निगरानी प्रणाली के अनुसार, सिर्फ पिछले 18 महीनों में चिकनगुनिया के 13 नए देशों में प्रकोप की पुष्टि हुई है।
- यूरोप में ग्रीस और इटली
- दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड, मलेशिया, भारत
- अफ्रीकी क्षेत्र में केन्या और नाइजीरिया
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी मच्छर जनित है और Aedes aegypti और Aedes albopictus मच्छर इसके प्रमुख वाहक हैं – वही मच्छर जो डेंगू और ज़ीका वायरस भी फैलाते हैं।
WHO की चेतावनी: दोहराव टालने के लिए तत्काल कदम ज़रूरी
WHO के अनुसार :
“हम चिकनगुनिया को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट में बदलने नहीं दे सकते। इसकी रोकथाम ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है।”
WHO ने स्वास्थ्य मंत्रालयों, नगर निगमों और नागरिक संगठनों से तीन मुख्य स्तरों पर एकजुट कार्रवाई की मांग की है:
- सार्वजनिक शिक्षा
- वेक्टर नियंत्रण (मच्छर नियंत्रण)
- रोग की सक्रिय निगरानी और लक्षण पहचान
रोग की भयाहवता को समझना जरूरी
चिकनगुनिया को अक्सर “तेज़ बुखार और दर्द की बीमारी” समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं ज़्यादा डरावनी है।
इसके प्रमुख लक्षण:
- अचानक तेज़ बुखार (102°F – 104°F)
- अत्यधिक जोड़ दर्द – कई हफ्तों तक चल सकता है
- थकावट, जी मिचलाना, त्वचा पर लाल चकत्ते
- मांसपेशियों में जकड़न
- जोड़ों में सूजन
- दीर्घकालिक विकलांगता – कुछ मामलों में जोड़ पूरी तरह से काम करना बंद कर देते हैं
डॉक्टरों के मुताबिक, रोगी की हालत ऐसी हो सकती है कि वह हफ़्तों तक चलने या हाथ हिलाने में भी असमर्थ हो सकता है।
भारत की स्थिति: गंभीर लेकिन अनदेखी
भारत में पहले ही इस वर्ष (जनवरी–जून 2025) में 15,000 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा केस हैं।
विशेषकर गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे इसके प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
इलाज नहीं, केवल राहत: इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा उपचार
आज तक चिकनगुनिया के लिए न तो कोई टीका उपलब्ध है, न ही कोई प्रमाणित एंटीवायरल दवा।
डॉक्टर्स केवल लक्षणों से राहत देने वाली दवाएं देते हैं – पेरासिटामोल, हाइड्रेशन और आराम।
WHO की रिपोर्ट साफ़ कहती है –
“रोकथाम ही सबसे प्रभावी रणनीति है।”
“एक मच्छर भी एक महामारी फैला सकता है।“
बचाव के तरीके: WHO के निर्देशों पर अमल करें
- मच्छरों से सुरक्षा करें
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
- त्वचा पर मच्छर-रोधी क्रीम (repellents) लगाएं
- खिड़कियों और दरवाज़ों पर जाली या स्क्रीन लगाएं
- यदि संभव हो तो एयर कंडीशनिंग का उपयोग करें
- सोते समय विशेष सतर्कता रखें
- मच्छरदानी का प्रयोग करें, खासकर बच्चों और बीमार लोगों के लिए
- दिन में भी मच्छर काटते हैं – यह खास बात ध्यान में रखें
- पानी जमा न होने दें
- घर के आस-पास जमा पानी को साफ करें
- कूलर, गमले, बर्तन, टायर – सभी जगह से रुका हुआ पानी हटाएं
- सप्ताह में कम से कम दो बार पानी के बर्तनों को साफ़ करें
- फॉगिंग और स्प्रे
- नगर निगम द्वारा फॉगिंग सुनिश्चित कराएं
- घरों में कीटनाशक छिड़काव करें
खोजी पड़ताल: क्या प्रशासन नींद में है?
हमारी टीम ने जयपुर, जोधपुर, भोपाल और कोच्चि में ग्राउंड रिपोर्टिंग की।
जोधपुर के नागौरी गेट क्षेत्र में 7 दिन के भीतर 21 संदिग्ध चिकनगुनिया मामलों की पुष्टि हुई, लेकिन नगर निगम द्वारा एक बार भी फॉगिंग नहीं की गई।
जयपुर के मानसरोवर सेक्टर-9 में रहने वाली रीना देवी, 4 दिन से जोड़ दर्द और तेज बुखार से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने चिकनगुनिया की पुष्टि की, लेकिन कॉलोनी में कहीं भी मच्छर नियंत्रण का उपाय नहीं हुआ।
स्थानीय पार्षद से बात करने पर जवाब मिला:
“हमने स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर दिया है, इंतज़ार कर रहे हैं निर्देश का।“
क्या यह सुस्ती एक नई महामारी को न्योता नहीं दे रही?
WHO की रणनीति: वैश्विक एकजुटता का आह्वान
WHO ने सभी देशों को मिलकर निम्न प्रयासों को लागू करने की सिफारिश की है:
- राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी केंद्रों की स्थापना
- प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों को मच्छर जनित रोगों के लिए तैनात करना
- स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम चलाना
- जल निकासी और कचरा प्रबंधन सुधारना
विशेषज्ञों की राय
“चिकनगुनिया अब सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है।”
— डॉ. आशीष गुप्ता, महामारी विशेषज्ञ, एम्स दिल्ली
“भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों लोग झुग्गियों और अस्वच्छ इलाकों में रहते हैं, चिकनगुनिया तेजी से महामारी का रूप ले सकता है यदि समय रहते चेतावनी न मानी जाए।”
— डॉ. सीमा वर्मा, वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट, पुणेWHO ने चेतावनी दे दी है। वायरस फिर लौट आया है।
अब यह सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों पर निर्भर करता है कि वे इस चुनौती को किस गंभीरता से लेते हैं।




