किसी की मदद करना चाहें तो आप भी साहस की पतवार थाम सकते हैं… तमन्ना भाटी इसका जीवंत उदाहरण हैं…“जब कोई एक महिला उठती है, तो वह अपने साथ कई पीढ़ियों को उठा लेती है। यही है – हमारा साहस।”
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित | जोधपुर
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जोधपुर की सड़कों पर अगर आप कभी ध्यान से देखेंगे, तो आपको कुछ चेहरे ऐसे मिलेंगे जिनमें संघर्ष की रेखाएं भी होंगी और आत्मविश्वास की चमक भी। ये वे चेहरे हैं जिन्होंने ज़िंदगी की विषम परिस्थितियों से लड़कर न केवल अपने लिए राह बनाई, बल्कि दूसरों के लिए भी उम्मीद का रास्ता खोला। ऐसे ही एक रोशनी के स्तंभ का नाम है – “हमारा साहस ट्रस्ट”।
संघर्ष से सृजन तक: तमन्ना भाटी की प्रेरणा
तमन्ना भाटी। एक साधारण युवती, जिन्होंने शादी के बाद अपने जीवन को असाधारण उद्देश्य में ढाल दिया। तमन्ना एक प्रशिक्षित फैशन डिज़ाइनर थीं, लेकिन विवाह के बाद जब उन्होंने देखा कि समाज में महिलाओं की स्थिति अब भी बहुत पीछे है, तो उन्होंने सिर्फ़ आत्मनिर्भरता का सपना नहीं देखा – बल्कि उसे साकार करने के लिए एक ठोस मंच भी खड़ा किया। वर्ष 2015 में, तमन्ना ने जोधपुर में ‘हमारा साहस ट्रस्ट’ की स्थापना की। इस ट्रस्ट की नींव एक सरल लेकिन शक्तिशाली विचार पर रखी गई: “सशक्त महिलाएं ही एक सशक्त समाज की नींव हैं।”
उनका लक्ष्य था – समाज की वंचित और गरीब महिलाओं और बच्चों के लिए ऐसा मंच खड़ा करना, जहां वे आत्मनिर्भरता, सम्मान और शिक्षा के साथ अपना जीवन जी सकें। तमन्ना का कहना है,
“बच्चों के रूप में महिलाएं ही समाज की सबसे प्रमुख इकाई हैं। उनकी गरिमा, आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास को बढ़ाना ही समाज को बदलने का सबसे कारगर तरीका है।”
एक छोटा कदम, एक बड़ी शुरुआत
तमन्ना ने शुरुआत अपने ही घर के एक कमरे से की, जहां वे कुछ स्थानीय महिलाओं को कपड़े सिलने और डिजाइन करने की कला सिखाने लगीं। वहीं कुछ बच्चियों को स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई में सहयोग करना भी शुरू किया। यह कदम धीरे-धीरे एक आंदोलन में बदल गया।
तमन्ना बताती हैं –
“शुरुआत में बहुतों ने कहा कि गरीब महिलाएं घर से निकलकर नहीं आएंगी। लेकिन जब उन्हें समझ आया कि हम उन्हें न सिर्फ़ हुनर दे रहे हैं, बल्कि सम्मान और पहचान भी दे रहे हैं, तब वे खुद आगे आने लगीं।”
आत्मनिर्भरता का केंद्र बना जोधपुर
आज हमारा साहस ट्रस्ट जोधपुर की महिलाओं के लिए न सिर्फ़ एक संस्था है, बल्कि एक आश्रय, एक विश्वास और एक नई सुबह है। महिलाएं यहां आकर न सिर्फ़ हस्तनिर्मित वस्त्र बनाना सीखती हैं, बल्कि सिलाई-कढ़ाई, ज्वेलरी निर्माण, पेपर बैग, राखी और अन्य हस्तकला उत्पादों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
इस ट्रस्ट की सबसे खास बात यह है कि यहां काम करने वाली अधिकांश महिलाएं पहले घरेलू हिंसा, गरीबी, अशिक्षा या बाल विवाह की शिकार रह चुकी थीं। लेकिन आज वे अपने अनुभवों को पीछे छोड़कर समाज में मिसाल बन रही हैं।
“हमारा साहस” की कुछ प्रमुख पहलें:
1. व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र – महिलाओं को फैशन डिज़ाइनिंग, सिलाई-कढ़ाई, बैग निर्माण आदि में प्रशिक्षण देना।
2. हस्तशिल्प को बढ़ावा – महिलाएं स्वयं हस्तनिर्मित वस्तुएं बनाकर बेचती हैं, जिससे आय अर्जन होता है।
3. स्वास्थ्य एवं मानसिक परामर्श – पीड़ित महिलाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए काउंसलिंग सुविधा।
4. बच्चों की प्राथमिक शिक्षा – विशेष रूप से लड़कियों को निःशुल्क शिक्षा, यूनिफॉर्म, किताबें व ट्यूशन क्लासेस।
5. सामाजिक न्याय – बाल विवाह, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न के मामलों में कानूनी सहायता।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम
ट्रस्ट के अंतर्गत महिलाएं जो उत्पाद तैयार करती हैं, उन्हें स्थानीय बाजारों, प्रदर्शनियों और सोशल मीडिया के ज़रिए बेचा जाता है। इस आय से वे न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि अपने बच्चों की पढ़ाई और घर की ज़रूरतों में भी हाथ बंटाती हैं।
तमन्ना बताती हैं –
“पहले महिलाएं अपने नाम से बैंक खाता खोलने से डरती थीं। आज वे अपने हाथ से कमाई करती हैं, खुद का खाता चलाती हैं और दूसरों को प्रेरणा देती हैं।”
समाज के लिए संदेश: “पहला साहसिक कदम ज़रूरी है”
‘हमारा साहस’ ट्रस्ट का नाम ही अपने आप में संदेश है – जो महिला या बच्चा एक बार साहसिक कदम उठाता है, वह पूरे समाज को बदलने की ताक़त रखता है।
ट्रस्ट के एक सदस्य के अनुसार –
“पहले महिलाएं शर्म और डर के कारण कुछ कह नहीं पाती थीं। आज वे आत्मविश्वास से मंच पर आकर अपने विचार साझा करती हैं। यह बदलाव केवल हुनर का नहीं, बल्कि मानसिक आज़ादी का भी प्रतीक है।”
चुनौतियाँ और उनका समाधान
सामाजिक पूर्वाग्रह: कई बार महिलाओं के घरवाले उन्हें बाहर काम करने नहीं देते थे। ट्रस्ट ने परिवारों के साथ बैठकर चर्चा की, सेमिनार कराए और यह भरोसा दिलाया कि यह काम सिर्फ़ आय का नहीं, बल्कि सम्मान का है।
आर्थिक कठिनाई: ट्रस्ट ने बैंक से लोन, स्वयंसेवी सहयोग और स्थानीय व्यापारियों से सहायता लेकर महिलाओं को शुरूआती निवेश प्रदान किया।
शिक्षा की कमी: जिन महिलाओं ने कभी स्कूल नहीं देखा, उनके लिए भी स्पेशल “साक्षरता कक्षाएं” चलाई जाती हैं।
सहयोग और विस्तार
तमन्ना का सपना है कि हमारा साहस सिर्फ़ जोधपुर तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राजस्थान और फिर देशभर में फैल जाए। वे चाहती हैं कि हर गांव, हर शहर की महिलाओं के पास यह मंच हो। इसके लिए वे अन्य एनजीओ, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) योजनाओं और सरकारी विभागों से सहयोग प्राप्त कर रही हैं।
वे कहती हैं –
“अगर आप किसी को एक दिन की रोटी दें, तो वह उस दिन जी लेगा। लेकिन अगर उसे आत्मनिर्भर बना दें, तो वह पूरी ज़िंदगी जी लेगा – और दूसरों को भी ज़िंदा रखेगा।”
भविष्य की योजनाएं
एक नया वुमन इन्क्यूबेशन सेंटर खोलना, जहां महिलाएं अपने स्टार्टअप्स शुरू कर सकें।
स्किल ट्रेनिंग के लिए मोबाइल ट्रेनिंग वैन, जिससे दूरदराज़ गांवों तक सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।
“बेटी स्कॉलरशिप योजना”, जिसके तहत होनहार छात्राओं को ट्रस्ट स्पॉन्सर करेगा।
एक मिसाल बनता ट्रस्ट
आज हमारा साहस ट्रस्ट ने सिर्फ़ सैकड़ों महिलाओं की ज़िंदगी बदली है, बल्कि समाज को यह दिखा दिया है कि बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है। जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, तो पूरा परिवार और समाज बदलता है।
तमन्ना भाटी जैसी महिलाओं के प्रयास यह साबित करते हैं कि सामाजिक सेवा केवल भाषणों से नहीं होती – उसके लिए ज़मीन पर उतरकर, हाथ से काम करना होता है, आंखों में भरोसा और दिल में जुनून होना चाहिए।
अगर आप भी इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो ‘हमारा साहस’ से जुड़िए। किसी एक महिला की जिंदगी बदलने में आपकी छोटी मदद भी बहुत मायने रखती है।
संपर्क: 9309364702
ईमेल: bhatiitamnna1@gmail.com
बैंक डिटेल्स: State Bank of India, A/C: 61350016937, IFSC: SBIN0031201




