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Saturday, January 17, 2026, 12:17 am

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मौत आपके द्वार कभी भी दे सकती है दस्तक…पीएम मोदी से लेकर न्यायाधीश तक कोई सुरक्षित नहीं, पत्रकारों पर दबाव बढ़ा, पूंजीवादी विदेशी ताकतों के निशानों पर भारत सहित कई देश

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जीने के सारे रास्ते बंद किए जा रहे, आपकी हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही…पूंजीवाद ललकार रहा है, बच सकते हो तो बच लो…भारत के लोग संगठित होकर और जागरूक होकर खुद और एक-दूसरे को बचा सकते हैं…

डीके पुरोहित. वाशिंगटन डीसी

“खाएं तो मरें, ना खाएं तो मरें… आखिर क्या करें?”
यह महज एक कविता नहीं, बल्कि आज के भारत की कड़वी सच्चाई है। 1995 में लिखी गई यह लाइनें आज 2025 में सच का आईना बनकर खड़ी हैं — हमारी थाली में जहर परोसा जा रहा है और टारगेट कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि देश के सबसे ताकतवर लोग हैं।

जहर की खेप: आपकी रसोई बन रही है हथियार

खाद्य सुरक्षा की आड़ में एक साइलेंट जेनोसाइड चल रहा है। फल, सब्जियाँ, दूध, दाल, मसाले, मिठाइयां, यहां तक कि पैक्ड फूड — हर चीज़ में ज़हर घुला है।

खुफिया स्रोतों के अनुसार, बाजार में बड़ी मात्रा में ऐसे फल और सब्जियां पहुंचाई जा रही हैं, जिन्हें माइक्रो-इंजेक्शन से जहरीले रसायनों से भरा जा रहा है।
यह रसायन शरीर में पहुंचकर कुछ ही मिनटों में हार्ट फेलियर, साइलेंट अटैक, या ब्रेन स्ट्रोक को जन्म देते हैं।

सिर्फ 100 मिग्रा रसायन — और एक चाय का कप बन जाता है मौत का निमंत्रण।

मोदी भी नहीं अछूते: पीएम को साइलेंट अटैक से मारने की आशंका?

यह कोई फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं — एक वायरल वीडियो के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इस ‘खाद्य आतंकवाद’ के निशाने पर हैं
वीडियो में ऐसा कोई दावा तो नहीं किया गया है, मगर अंतरराष्ट्रीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री मोदी जैसे भारत के कई ताकतवर लोगों को मारने का प्लान तैयार हो चुका है।

  • उनके रसोई स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों की पृष्ठभूमि की गहन जांच नहीं हाे रही। 

  • कुछ नव-नियुक्त लोग ‘हायर’ किए गए हो सकते हैं, जिनकी निष्ठा संदिग्ध है।

  • हर गतिविधि — सुबह की चाय से लेकर रात के भोजन तक — निगरानी में है

क्या किसी दिन प्रधानमंत्री की ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ से मौत की खबर आ सकती है?
क्या यह मात्र प्राकृतिक घटना होगी — या एक सुनियोजित इंटरनेशनल साजिश?

इंटरनेशनल कनेक्शन: पूंजीवाद की साजिश या जैविक युद्ध?

जांच में सामने आया है कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पूंजीवादी लॉबी द्वारा विशेष ‘टारगेट ग्रुप’ के खिलाफ यह साजिश रची जा रही है।

टारगेट ग्रुप में कौन हैं?
  • राष्ट्रीय नेता (प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, न्यायाधीश)

  • स्वतंत्र विचारकों, वैज्ञानिकों और एक्टिविस्ट्स

  • सामाजिक परिवर्तन के अगुआ

  • कुछ IAS, IPS अधिकारी, जो भ्रष्टाचार विरोधी हैं

विदेशी एजेंसियां इन समूहों की डेली एक्टिविटी ट्रैक कर रही हैं
कौन क्या खाता है, कहां जाता है, किससे मिलता है, और कौन उसका किचन संभाल रहा है — सब पर नज़र है।

हत्याएं या हादसे?

पिछले एक साल में निम्नलिखित हाई-प्रोफाइल मौतें सवालों के घेरे में हैं:

नाम पद/पहचान मृत्यु का कारण संदेह
वरिष्ठ जज (नाम छुपा लिया) हाई कोर्ट जज हार्ट अटैक बिना मेडिकल हिस्ट्री
वैज्ञानिक X DRDO से जुड़े ब्रेन हैमरेज अचानक, कोई पूर्व लक्षण नहीं
युवा नेता विपक्षी दल फूड प्वाइजनिंग घर का बना खाना था

खुफिया एजेंसियों की चेतावनी: “खाद्य जैविक आतंकवाद”

RAW, IB और NIA की रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में “Bio-Chemical Food Infiltration” हो रहा है।
पाकिस्तान, चीन और कुछ पश्चिमी देशों से नैनो पॉइजन, स्लो एक्टिंग टॉक्सिन्स भारत में भेजे जा रहे हैं।

आम नागरिकों के लिए खतरे की घंटी

यदि आप सोच रहे हैं कि यह साजिश सिर्फ बड़े लोगों तक सीमित है, तो आप गलत हैं।
“टारगेट ग्रुप” का दायरा अब आम नागरिकों तक फैल चुका है — विशेष रूप से:

  • RTI कार्यकर्ता

  • किसान नेता

  • दलित, आदिवासी, महिला अधिकारों के अगुआ

  • सरकारी घोटाले उजागर करने वाले, नामी गिरामी पत्रकार, मिशन को लेकर चल रहे पत्रकार।

आज का ज़हर ब्रांडेड बोतलों में छुपा है, चमचमाते पैकेट्स में लिपटा है।

सरकार से सवाल
  1. क्या प्रधानमंत्री कार्यालय इस खतरे से अवगत है?

  2. क्या VIP रसोइयों की बैकग्राउंड चेक होती है?

  3. क्या FSSAI को इस पर कोई विशेष निर्देश दिए गए हैं?

  4. क्या एयरपोर्ट और डिलीवरी चेन में जैविक जहर की जांच की जा रही है?

अब समय है जागने का!

यह महज एक काल्पनिक डर नहीं — यह एक अदृश्य युद्ध है, जो हमारी थाली से शुरू होकर तिरंगे की रक्षा तक पहुंच गया है।
यह जहर की राजनीति है।
यह भोजन का बॉयो-टेररिज़्म है।
और यदि आज हम नहीं चेते, तो कल मौत हमें साइलेंट अटैक की शक्ल में निगल जाएगी।

यह रिपोर्ट पढ़ें, साझा करें, और देश को सतर्क करें। आज प्रधानमंत्री हैं निशाने पर, कल कोई और हो सकता है — शायद आप।


[यह रिपोर्ट एक वायरल वीडियो के आधार पर संभावित खतरों का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती, किंतु संबंधित एजेंसियों का ध्यान आकृष्ट करना आवश्यक है।]

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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