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Sunday, August 23, 2026, 9:18 am

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Lifestyle

हंसराज हंसा की कविता

कवि : हंसराज हंसा

बुढ़ापा

उम्र होने लगी याददाश्त जाने लगी
अदबी सफर में कलम सुस्ताने लगी

मगर शौक है लिखने का आगे
बहुत अफसानों की याद आने लगी

कोशिश करता यादों के दिये जलाने की
मगर वक्त की आंधी इन्हें बुझाने लगी

बूढा तन से हुआ दिलो दिमाग से नहीं
फिर से पेपर कलम मुझे रिझाने लगी

साहित्य की विधाएं बहुत लिख दी”हंसा”
पीरी में अंगुलियां हाथों की कंपकंपाने लगी

मायने
पीरी=बुढापा
अदबी=साहित्यिक

हंसराज”हंसा”
आदर्श बस्ती,मंडोर
जोधपुर (राजस्थान)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor