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Sunday, August 23, 2026, 9:18 am

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पानी है वहां, इसी आस में समंदर तक गई प्यास..19 कवियों ने रचनाएं सुनाई झकास

काव्य-कलश की मासिक गोष्ठी पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ हुई संपन्न

पंकज जांगिड़. जोधपुर

नगर के साहित्यिक धरातल पर सतत क्रियाशील संस्था “काव्य-कलश” की नियमित मासिक काव्य-गोष्ठी संस्था के पावटा ‘सी’ रोड स्थित संस्था कार्यालय पर संपन्न हुई। इसमें ऊर्जा से लबरेज नगर के 19 नामचीन कवियों, कवयित्रियों एवं शायरों ने लगभग तीन घंटे की गोष्ठी में बढ़-चढ़कर अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।

संस्था के सचिव श्याम गुप्ता ‘शान्त’ ने बताया कि गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार एडवोकेट एनडी निंबावत ने की। गोष्ठी का आगाज कवयित्री नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’ ने सरस्वती-वंदना से किया। तत्पश्चात राखी पुरोहित, शायर अब्दुल रहीम सांखला, दिलीप कुमार पुरोहित, ओमप्रकाश गोयल ने अपने-अपने नायाब नगमे पेश किए। संस्था के उपाध्यक्ष अशफ़ाक अहमद फौजदार ने मंच संचालन करते हुए अपनी गज़ल “उनकी तो मुझपे मेहरबानी बहुत है..” ने खूब तालियां बटोरी।

बोतल बयालीसा ने रंग जमाया

श्याम गुप्ता ‘शान्त’ ने- ‘बोतल-बयालीसा’ सुनाकर महफिल की फिज़ा बदल दी। नामवर शायर रजा मोहम्मद खान की दोनों गजलें पुर असर रही। कला-मर्मज्ञ प्रमोद वैष्णव की कविताओं का रेंज सदा की तरह शिखर पर रहा, उनकी कविता की पंक्तियां “मनीप्लांट की तरह होता है दिल लगाना..” बेमिसाल थीं।

नवीन पंछी की लघु कविता- “पानी है वहां, इसी आस में समंदर तक गई प्यास..” का असर देर तक बना रहा। प्रदीप शर्मा ने कविता की रूह में पर्यावरण का पेड़ लगाकर उसे हरा-भरा कर दिया। विदुषी कवयित्री डॉ. तृप्ति गोस्वामी ‘काव्यांशी’ ने “जनहरण घनाक्षरी छंद” में शिव-महिमा प्रस्तुत की। सुलझे हुए शायर असरार ‘आहिल’ ने “पता है वो मुझे मुड़कर न देखेगी..” ने सबका मन मोह लिया। पंकज ‘बिंदास’ ने फिल्मी गीत- ‘कभी कभी मेरे दिल में खयाल..’ को अपने दिलकश अंदाज में पेश किया। दिलीप राव श्रीमाली ‘दलपत’ ने डिंगल भाषा में शानदार रचना सुनाई। दीपिका ‘रूहानी’ की कविता- “हमने तुझे याद आना छोड़ दिया..” रूह को छू गई। उमेश दाधीच ने अपने कनाडाई संस्मरण को कविता के रूप में जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष एडवोकेट निंबावत ने तीन मुक्तक सुनाकर समां बांध दिया। अंत में संस्था के अध्यक्ष मनोहर सिंह राठौड़ ने संस्था की उत्तरोत्तर विकासशील गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की।

संस्था के सचिव गुप्ता ने आगंतुक कवियों के शिरकत करने पर सभी का हृदय से आदर-सत्कार करते हुए आभार व्यक्त किया

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor