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Thursday, July 9, 2026, 5:54 am

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संदीपनी महाराज के साथ कुल पल : “जहां हर सांस में गीता, हर स्पंदन में गाय – यही है जोधपुर की वह दिव्य गोशाला जहां मिलती है मोक्ष की अनुभूति”

ओम श्री श्री महर्षि संदीपनी राम महाराज ने 600 किलो शुद्ध देसी घी कलश में भरकर बैलगाड़ियों के माध्यम से अयोध्या भेजा था। राम मंदिर की पहली आरती उसी घी से हुई थी। नौ कुंडीय यज्ञ हुआ। आज जो मंदाग्नि ज्योति मंदिर में जल रही है – उसमें जोधपुर की इसी गोशाला का घी समाया हुआ है…। 2024 में सवा दो सौ किलो घी भिजवाया।  

लाइव रिपोर्ट | राइजिंग भास्कर

दिलीप कुमार पुरोहित और सज्जन सिंह, जोधपुर से

8302316074 diliprakhai@gmail.com

स्थान – बनाड़ रोड, गणेश पेट्रोल पंप के सामने, बसंत बिहार खोखरिया।
समय – शाम : 4:00 बजे।
माहौल – हल्की हवा, गोधन से घिरा परिसर, और एक अलौकिक शांति।

हमारी कार धीरे-धीरे रुकती है। सामने बोर्ड पर सुनहरे अक्षरों में लिखा है – “ओम श्री श्री महर्षि संदीपनी राम गोशाला”

कार से उतरते ही देसी गायों की गूंज मिलती है… गायें जैसे मंत्रमुग्ध होकर सुन रही हैं, जी, हां- पीछे एक मधुर ध्वनि बह रही है –

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन…”
यह गीता का श्लोक है – और पूरे परिसर में हर वक्त, 24 घंटे यह दिव्य ग्रंथ गूंजता है।

गोशाला की संचालिका, माताजी, आत्मीय मुस्कान के साथ स्वागत करती हैं। माथे पर टीका, भगवा वस्त्र, सरल वाणी – जैसे कोई तपस्विनी।
हमारे साथ हैं – राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित और फोटो जर्नलिस्ट सज्जन सिंह

“आइए…गौ माता की सेवा और संकल्प की यात्रा पर…”

कुछ मिनटों में ही सामने आते हैं – ओम श्री श्री महर्षि संदीपनी राम महाराज
गेरुए वस्त्र, हल्की दाढ़ी, गंभीर किंतु शांत मुखमंडल।
हम महाराज श्री को चरण वंदन करते हैं…और फिर बिना औपचारिकताओं के, जैसे कोई प्रवाह खुल गया हो – अपनी कहानी कहने लगते हैं।

गायों की गूंज में गीता – एक अनोखा प्रयोग

“गायों को भी गीता सुनने को मिल जाए फिर क्या चाहिए साहब…” – महाराज श्री कहते हैं –
“जब ये 24 घंटे श्रीमद्भगवद्गीता सुनती हैं, तो उनकी आत्मा जागती है।
दूध अधिक देती हैं, गर्भधारण सहज होता है, बीमारियां दूर रहती हैं।
और जो मनुष्य इनके संग होता है – उसे मोक्ष की राह मिल जाती है।”

फोटो जर्नलिस्ट सज्जन सिंह कैमरा उठाते हैं, और साथ ही क्लिक हो जाती है एक तस्वीर –
जहां गोशाला की गायें जैसे गीताजी का पाठ साक्षात सुन रही हैं…
24 घंटे गीताजी का श्लोक – और दोनों जैसे ध्यान में डूबे हों।

“शुरुआत तब हुई जब…60 गायें मौत के मुहाने पर थीं”

महाराज श्री की आंखें नम होती हैं –
“एक ट्रक में 60 गायें ठूंस-ठूंस कर ले जाई जा रही थीं। कुछ तो दम घुटने से मर चुकी थीं। बाकी हांफ रही थीं। उस दिन तय किया –
अब जीवन इन्हीं के लिए समर्पित।”

गायों को छुड़ाया।
फिर 20×50 का एक प्लॉट किस्तों में लिया।
“वो मेरा पहला आश्रय था…” – वे धीमे स्वर में कहते हैं।

आज यहां 350 से अधिक गायें हैं – और उनके लिए हरियाली, पानी, संगीत, सेवा और प्रेम की कोई कमी नहीं।

बैलगाड़ियों से अयोध्या – 600 किलो घी की पुण्ययात्रा

यह वो घटना है जिसने संदीपनी राम महाराज जी को पूरे देश में चर्चित कर दिया।
“हमारी गोशाला से तैयार हुआ – 600 किलो शुद्ध देसी घी। कलश में भरकर बैलगाड़ियों के माध्यम से अयोध्या भेजा। राम मंदिर की पहली आरती उसी घी से हुई। नौ कुंडीय यज्ञ हुआ।
आज जो मंदाग्नि ज्योति मंदिर में जल रही है – उसमें भी हमारा घी समाया हुआ है।”

यह सुनते ही हम मुस्कुराते हैं –
“आपका योगदान अयोध्या तक पहुंचा… और जोधपुर की आत्मा भी वहां गूंजी।” 2024 में सवा दो सौ किलो घी भिजवाया।

“हर नवरात्र, मेरे हाथ पर जलती है अखंड ज्योति – और मैं कुछ नहीं खाता, नित्य क्रियाएं भी नहीं होती”

“22 वर्षों से, हर नवरात्र – एकम से नवमी तक – मैं न कुछ खाता हूं, न जल पीता हूं, न नित्य क्रिया करता हूं।
बस हाथ में जलती है अखंड ज्योति – और मैं ‘राम-राम’ करता हूं।”

डॉक्टरों ने कई बार परीक्षण किया –
पर हार गए। विज्ञान भी चुप रहा।
इस चमत्कार ने न सिर्फ श्रद्धालुओं को खींचा, बल्कि आश्चर्य से भर दिया।

गोशाला अब दो – एक जाजीवाल गहलोतां में भी

“रामनवमी पर 9 बीघा ज़मीन में दूसरी गोशाला शुरू की है – जहां अब 90 गायें हैं।”
हमें बताया जाता है कि वहां अभी कार्य चल रहा है…महाराज श्री वहीं से काम करते हुए लौटे हैं…। महाराज श्री आज भी हार्ड वर्क करते हैं और गायों की सेवा के साथ साधना में समय व्यतीत होता है।

महाराज श्री बताते हैं – “हर दिन एक बार हर गाय के माथे पर तिलक होता है।
जैसे किसी संत का सम्मान करते हैं, वैसे।”

कामधेनु गाय और ऋषि-मुनियों की बात

“हमने कामधेनु गाय की कथा सुनी है –
जो ऋषियों की रक्षा करती थीं, जो सेना और शस्त्र तक प्रकट कर देती थीं।
पर अब… वो ऋषि ही नहीं रहे। तो गायें कहां से होंगी?”

महाराज श्री के इस संवाद में वेदांत का दर्द छलकता है –
“अब गाय की रक्षा नहीं हो रही। नशा, हिंसा, जीव हत्या – सब बढ़ गए।
इसीलिए तो मैंने संकल्प लिया – हर बच्चा गाय की सेवा करे।”

जीव हत्या – पाप का दंड तय है

महाराज श्री का स्पष्ट मत है –

“प्रकृति सबका पालन करती है और संहार भी।
इंसान अगर जीवों की हत्या कर भक्षण करता है, तो उसे उसका दंड अवश्य मिलता है।
धर्म यही है – सब जीवों की रक्षा।”

वे कहते हैं –
“नशा नरक का द्वार है।
जो नशा करेगा, वो किसी का नहीं रहेगा।
और जो प्रसन्नता से प्रभु का नाम लेगा, वही कल्याण पाएगा।”

प्रभु स्मरण – हर क्षण, हर सांस में

“सुबह उठो तो प्रसन्नता से उठो,
रात को सोओ तो प्रभु का नाम लेकर सोओ।”
महाराज श्री की वाणी शुद्ध अनुभव है –
“प्रभु नाम लेने में जब आनंद हो, तो उसी क्षण मोक्ष की राह खुल जाती है।” महाराज श्री का कहना है कि जीवन में समय का बड़ा वक्त है। जो व्यक्ति समय की यानी वक्त की कद्र नहीं करता, वक्त भी उसे महत्व नहीं देता। जैसे आप लोगों ने शाम 4 बजे का समय दिया और समय पर पहुंचे, वैसे ही हर व्यक्ति समय की कद्र करना सीख जाए तो हर समस्या का समाधान हो जाए। समय का पालन करके ही व्यापार, धर्म, दान-दक्षिणा, साहित्य, कला, संस्कृति, संगीत और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। समय केवल घड़ी का कांटा नहीं है। समय ही एक दिन इतिहास बनता है और समय ही इतिहास गढ़ता है। इसलिए समय की कद्र करना जरूरी है।

संपूर्ण गोशाला में प्रसन्नता – अनुशासन – और आत्मा का संगीत

पूरा परिसर किसी तपोवन जैसा है –
■ हर गाय के नाम हैं – लक्ष्मी, रुक्मिणी, गौरी, सरस्वती, सीता…
■ महाराज श्री का मानना है कि – “गाय का जल, देवता का अमृत।”
■ कर्मचारियों के लिए नियम – गीता पाठ, प्रभु स्मरण, और आत्म-सेवा।

सज्जन सिंह हर कोने की तस्वीर खींचते हैं –
जहां एक गायों की सेवा में कई युवक तैयार हैं…एक युवक का कहना है कि सर, गीता जी 24 घंटों सुनते हैं और गौ सेवा करते हैं…मस्त लाइफ है।

समाप्ति नहीं – एक नई शुरुआत

मुलाकात के आखिर में महाराज श्री कहते हैं –
“हमारा काम प्रचार नहीं, प्रेरणा है।
अगर एक भी बच्चा गाय को मां समझने लगे – तो गोशाला सफल हो गई।”

हम लौटते हैं। कार का शीशा धीरे से ऊपर होता है –
पर भीतर कुछ ठहर गया है – गीता की ध्वनि, गायों की आंखें, और एक साधु का संकल्प।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor