Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 7:26 am

Thursday, July 9, 2026, 7:26 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

विधि त्रिवेदी (दाधीच) का भरतनाट्यम अरंगेत्रम आज शाम 6 बजे, नृत्य साधना होगी साकार

शिवम नाट्यालय द्वारा प्रतापनगर स्थित श्री महालक्ष्मी शिक्षण संस्थान में होगा आयोजन

राखी पुरोहित. जोधपुर 

8302316074 diliprakhai@gmail.com

जोधपुर के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान शिवम नाट्यालय द्वारा गुरुवार को भरतनाट्यम ‘अरंगेत्रम्’ कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य की विलक्षण प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगी। भरतनाट्यम की इस अनूठी विधा में शिष्या विधि त्रिवेदी (दाधीच)अपने प्रथम सार्वजनिक मंच प्रदर्शन के रूप में पारंपरिक नृत्यशैली का प्रभावशाली प्रदर्शनकरेंगी।

विधि त्रिवेदी सुपुत्री मधु त्रिवेदी व कृष्ण कुमार त्रिवेदी अपनी यह प्रस्तुति गुरु डॉ. मंजूषा चंद्रभूषण सवसैना के सान्निध्य में देंगी। यह ‘अरंगेत्रम्’ कार्यक्रम श्री महालक्ष्मी शिक्षण संस्थान, प्रतापनगर, जोधपुर में शाम 6:00 बजे आरंभ होगा। अरंगेत्रम् शब्द का अर्थ है “मंच पर पहला कदम” और यह किसी भी शास्त्रीय नर्तकी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।

भरतनाट्यम अरंगेत्रम्: नृत्य यात्रा का पहला सार्वजनिक पड़ाव

भरतनाट्यम अरंगेत्रम् एक नृत्यांगना की वर्षों की साधना और तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है। विधि मंच पर शास्त्रीय परंपरा के नियमों और भावनाओं का अनुपालन करते हुए अपना पहला एकल नृत्य प्रस्तुत करेंगी। विधि त्रिवेदी इस प्रस्तुति के दौरान न केवल मुद्राओं, भावों और ताल का श्रेष्ठ समन्वय दिखाएंगी, बल्कि अपनी ऊर्जा और समर्पण से दर्शकों का मन भी जीतने का प्रयास करेंगी।

शिवम नाट्यालय का 59वां अरंगेत्रम आयोजन होगा 

शिवम नाट्यालय के अनुसार यह उनका 59वां अरंगेत्रम् आयोजन होगा। संस्था की निदेशिका डॉ. मंजूषा चंद्रभूषण सवसैना ने बताया कि विधि की प्रस्तुति में “नवरसों” की सुंदर अभिव्यक्ति, गीतों की भाव-व्याख्या और तालबद्ध नृत्य का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि विधि ने 7 वर्षों तक कठोर अभ्यास के बाद मंच पर प्रस्तुति देंगी।

संस्कृति और परंपरा का संगम

कार्यक्रम में भरतनाट्यम की परंपरागत प्रस्तुति के साथ-साथ भावों की प्रखरता और शारीरिक सौंदर्य का ऐसा तालमेल देखने को मिलेगा जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करता है। इस अवसर पर जोधपुर के प्रमुख कलाकार, अभिभावक, गुरुजन व सांस्कृतिक प्रेमियों की उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम के अंत में विधि त्रिवेदी को सम्मानित किया जाएगा।

“अरंगेत्रम्” सिर्फ एक नृत्य नहीं, एक आध्यात्मिक यात्रा

अरंगेत्रम् केवल एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक साधक की तपस्या और गुरु के आशीर्वाद का संगम होता है। यह वह क्षण होता है जब शिष्य गुरु की दीक्षा को समाज के समक्ष प्रस्तुत करता है। विधि त्रिवेदी का यह अरंगेत्रम् कार्यक्रम जोधपुर की सांस्कृतिक धरोहर में एक और कीर्ति स्तंभ बनेगा। इस आयोजन से न केवल भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय कला के प्रति लोगों में जागरूकता और रुचि बढ़ेगी, बल्कि यह संदेश भी दिया जाएगा कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति की विरासत को न केवल सहेज रही है, बल्कि उसे गौरवपूर्ण मंच पर स्थापित भी कर रही है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor