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Sunday, April 19, 2026, 5:35 am

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दिव्यांगता कमजोरी नहीं, यह असीम क्षमता है… ये बच्चे हमें जीवन जीने का असली अर्थ सिखा देते हैं — संघर्ष, धैर्य और मुस्कान के साथ : तरुण प्रजापति

जीवनदान सेवा संस्थान के सचिव तरुण प्रजापति से राइजिंग भास्कर का विशेष इंटरव्यू

प्रजापति बोले- हमारी शुरुआत छोटी है, पर लक्ष्य बड़ा : हम चाहते हैं विधाता किसी को दिव्यांग ना बनाए…अगर दिव्यांग बनना नियती हो तो उसे इतना सक्षम बनाए कि हर बाधा बौनी हो जाए, सागर खुद रास्ता दे दे, पर्वत खुद कहे मैं झुक जाता हूं…आसमां कहे कि मैं तो तुम्हारे लिए बाहें फैलाता हूं…बस इसी उम्मीद में हमने शुरू किया है जीवनदान सेवा संस्थान…। 
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित
8302316074 diliprakhai@gmail.com 

जोधपुर की शांत गलियों में बसे जीवनदान सेवा संस्थान का नाम आज सिर्फ एक पते या संगठन के रूप में नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। एक साल से भी कम समय में यह संस्था दिव्यांग बच्चों और जरूरतमंद लोगों के लिए जो काम कर रही है, वह न केवल सराहनीय है बल्कि यह संदेश भी देती है कि सामूहिक प्रयास और मानवीय दृष्टिकोण से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

संस्थान के सचिव तरुण प्रजापति से राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित और एडिटर-इन-चीफ राखी पुरोहित ने लंबी बातचीत की। इस दौरान संस्थान की शुरुआत, बच्चों की सफलता की कहानियों, चुनौतियों, मदद के तरीकों और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर चर्चा हुई। प्रस्तुत है यह प्रेरणादायक साक्षात्कार—

प्रश्न 1: जीवनदान सेवा संस्थान की शुरुआत कैसे हुई?

तरुण प्रजापति: संस्थान की नींव 1 जुलाई 2024 को रखी गई। पंजीकृत कार्यालय हमारा 01 सुशांत विहार, पाल रोड पर है और संचालन कार्यालय फिलहाल 16/215 सर्वोदय पार्क के पास, चौहाबो में है। शुरुआत का उद्देश्य बिल्कुल साफ था – उन दिव्यांग बच्चों को एक सुरक्षित घर, शिक्षा और रोज़गार की दिशा में मार्गदर्शन देना जो समाज या परिस्थितियों के कारण पीछे छूट गए थे।

लेकिन हमने सिर्फ शिक्षा या आवास तक खुद को सीमित नहीं रखा। हमने नशा मुक्ति शिविर, ध्यान योग, आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा, महिलाओं के उत्थान, संस्कृत भाषा के प्रचार, पर्यावरण संतुलन, वृद्धों की सेवा, नेत्रदान-देहदान-अंगदान जागरूकता जैसे विषयों को भी अपने उद्देश्यों में शामिल किया।

प्रश्न 2: वर्तमान में संस्था किन-किन गतिविधियों में सक्रिय है?

तरुण प्रजापति: अभी हमारे पास 13 दिव्यांग बच्चे हैं। इनमें से कई की कहानियां तो प्रेरणा देने वाली हैं —

  • झूंझाराम जाखड़: शूटिंग में नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल जीतकर अब इंडिया टीम ट्रायल के लिए पुणे गए हैं।

  • नेमाराम: बैडमिंटन में स्टेट लेवल पर दम दिखाया।

  • गणेशाराम: स्विमिंग में जिला स्तर पर प्रदर्शन कर अब राज्य स्तर की तैयारी कर रहे हैं।

  • दिनेश जाखड़: पैरों से दिव्यांग हैं लेकिन खेलों में गजब का संतुलन और गति दिखाते हुए जिला स्तर पर पहचान बना चुके हैं।

  • सहीराम बारूपाल: उन्होंने दिव्यांगता को अपनी ताकत बनाया और क्लर्क पद पर चयनित हुए।

इन सबके पीछे सिर्फ उनका हौसला ही नहीं, बल्कि उन्हें मिला सही मार्गदर्शन और मंच भी है।

प्रश्न 3: संस्थान दिव्यांग बच्चों के अलावा और किन जरूरतमंदों की मदद करता है?

तरुण प्रजापति: हम किसी भी जरूरतमंद को निराश नहीं लौटाते। कई बार पुलिस या समाजसेवी हमें सूचना देते हैं कि किसी विद्यार्थी या व्यक्ति का सामान चोरी हो गया है, या वह अचानक कठिनाई में है। ऐसे में हम एक-दो दिन के लिए उन्हें आश्रय और भोजन देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को भी हम परीक्षा की पूरी अवधि में मुफ्त में आवास और भोजन देते हैं।

इसके अलावा CPR, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन परिस्थितियों में रोगियों को बचाने का काम भी हम करते हैं।

प्रश्न 4: संस्थान की मदद किस तरह की जा सकती है?

तरुण प्रजापति: हम किसी से शुल्क नहीं लेते। मदद के लिए हमारे पास कई विकल्प हैं —

  • नए या इस्तेमाल किए वस्त्र

  • फर्नीचर

  • खाद्य सामग्री (चावल, आटा, चीनी, तेल, चाय आदि)

  • धनराशि

हर छोटी-बड़ी मदद सीधे बच्चों की ज़रूरतों में जुड़ती है।

प्रश्न 5: काउंसलिंग का संस्थान में क्या महत्व है?

तरुण प्रजापति: कई बच्चे और युवा ऐसे होते हैं जो न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी आहत होते हैं। हम उनके लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित करते हैं। हमारी काउंसलर अनुराधा सिसोदिया इस काम को बेहद संवेदनशीलता के साथ करती हैं। उनका काम सिर्फ सुनना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास जगाना है।

प्रश्न 6: संस्थान की कार्यकारिणी में किन लोगों का योगदान है?

तरुण प्रजापति: हमारे अध्यक्ष सत्येन व्यास, संरक्षक मातेश्वरी आर्य, उपाध्यक्ष यावनीत कुलश्रेष्ठ, महासचिव त्रिलोक सियोल, कोषाध्यक्ष चुन्नीलाल राजपुरोहित, कलाकार विनोद तापड़िया, और सदस्य महेश तापड़िया, सुभाष वर्मा, गीता माली, भवानी शंकर शर्मा — ये सभी लोग मिलकर संस्थान को आगे बढ़ाने में लगातार प्रयासरत हैं।

प्रश्न 7: भविष्य की योजनाएं क्या हैं?

तरुण प्रजापति: हमारे पास 20 और बच्चे प्रवेश के लिए तैयार हैं, लेकिन जगह की कमी है। हमारी सबसे बड़ी जरूरत एक बड़ी जमीन है, जहां हम लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल बना सकें। अगर दानदाता और भामाशाह सहयोग करें तो यह सपना जल्द पूरा हो सकता है।

तरुण प्रजापति का कहना है कि उन्होंने अंगदान का फॉर्म भी भर रखा है।

प्रश्न 8: टाइम बैंक ऑफ इंडिया से आपका जुड़ाव किस तरह का है?

तरुण प्रजापति: टाइम बैंक ऑफ इंडिया वरिष्ठ नागरिकों और एकाकी बुजुर्गों की मदद के लिए काम करता है। इसमें सदस्य अपना “टाइम अकाउंट” खोलते हैं। जो समय वे सेवा में देते हैं, उतना समय उनके खाते में जुड़ जाता है। भविष्य में जब उन्हें खुद मदद की जरूरत हो, तो वे इस समय का उपयोग कर सकते हैं। इसमें किसी बुजुर्ग को अस्पताल ले जाना, बीमारी में देखभाल करना, या बस उनके साथ समय बिताना शामिल है।

प्रश्न 9: व्यक्तिगत रूप से यह काम आपको क्या सिखाता है?

तरुण प्रजापति: मैंने सीखा है कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं, यह बस एक अलग तरह की क्षमता है। कई बार ये बच्चे हमें जीवन जीने का असली अर्थ सिखा देते हैं — संघर्ष, धैर्य और मुस्कान के साथ।

अंत में तरुण प्रजापति का संदेश:
“हम चाहते हैं कि समाज हमें सिर्फ एक संस्था के रूप में न देखे, बल्कि एक परिवार के रूप में महसूस करे। जहां हर बच्चा, हर बुजुर्ग और हर जरूरतमंद सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।”

 

 

 

 

 

 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor