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Thursday, July 9, 2026, 6:07 pm

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आपके जाने के बाद भी आप की धड़कन किसी और के सीने में धड़क सकती है…कीजिए अंगदान, आज ही लें संकल्प

अंगदान : अमरता की राह, जीवन के बाद भी जिंदा रहने की चाह…आपका एक संकल्प- अनेक मरीजों का उम्मीद…

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

8302316074 diliprakhai@gmail.com

अंगदान क्यों जरूरी है?

भारत में हर साल लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में होते हैं, लेकिन पर्याप्त दानदाताओं के अभाव में उनमें से कई अपनी जिंदगी खो देते हैं। आंकड़े बताते हैं कि –

  • हर साल लगभग 5 लाख लोग अंगों की कमी के कारण मर जाते हैं

  • एक मृत दाता 8 लोगों को नया जीवन और 50 से अधिक लोगों की जीवन-गुणवत्ता बेहतर कर सकता है।

लेकिन अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी, मिथकों और डर ने इसे वह गति नहीं दी जो होनी चाहिए थी।

कानूनी पहलू – विश्वास और पारदर्शिता

भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण को लेकर कड़ा कानूनी प्रावधान है – मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994

  • इस अधिनियम के तहत, अंगों की खरीद-बिक्री पूरी तरह अवैध है।

  • दान केवल स्वेच्छा और मानवीय आधार पर ही हो सकता है।

  • अंगदान के लिए दाता की स्पष्ट सहमति अनिवार्य है।

इन नियमों से यह सुनिश्चित होता है कि अंगदान की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित हो।

पंजीकरण कैसे करें? – सरल और निःशुल्क प्रक्रिया

आज तकनीक ने अंगदान को सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर ला दिया है। आप घर बैठे अंगदान के लिए पंजीकरण कर सकते हैं –

  1. NOTTO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
    (National Organ and Tissue Transplant Organization)
    या
    Organ India जैसी किसी विश्वसनीय NGO की साइट पर जाएं।

  2. पंजीकरण फॉर्म भरें
    इसमें आपका नाम, पता, संपर्क विवरण, उम्र आदि जानकारी भरनी होगी।

  3. अंगदान के लिए प्रतिज्ञा करें
    फॉर्म में आप स्पष्ट करते हैं कि आप मृत्यु के बाद अपने अंग दान करने के इच्छुक हैं।

  4. डोनर कार्ड प्राप्त करें
    पंजीकरण के बाद आपको एक Donor Card मिलेगा – यह आपके निर्णय का प्रतीक है और आपके परिवार को भी आपकी इच्छा के बारे में जानकारी देता है।

मिथक बनाम सच्चाई

अंगदान से जुड़े कई भ्रम और डर हैं, जो लोगों को इस नेक काम से रोकते हैं। आइए इन्हें दूर करें –

मिथक: अंगदान से शरीर का अपमान होता है।
सच्चाई: अंगदान के बाद शरीर को पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जाता है।

मिथक: अगर मैं डोनर हूं, तो डॉक्टर मुझे बचाने की पूरी कोशिश नहीं करेंगे।
सच्चाई: डॉक्टर की प्राथमिक जिम्मेदारी हमेशा मरीज की जान बचाना है। अंगदान केवल तभी होता है जब मृत्यु पूरी तरह और कानूनी रूप से प्रमाणित हो।

मिथक: मैं बूढ़ा हूं, मेरे अंग काम नहीं आएंगे।
सच्चाई: उम्र बाधा नहीं है। अंग की कार्यक्षमता ही मायने रखती है।

अंगदान – सेवा की सर्वोच्च अभिव्यक्ति

अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, यह सेवा, दया और मानवता का शुद्धतम रूप है। यह वह क्षण है जब इंसान जाति, धर्म, भाषा, और सीमाओं से परे होकर “मैं” से “हम” बन जाता है।

जब कोई दाता अपने अंग देकर किसी को जीवन देता है, तो यह सिर्फ शरीर का हिस्सा नहीं होता, यह उम्मीद और दूसरा मौका होता है।

प्रेरक वास्तविक कहानियां
  1. दिल से दिल तक
    जयपुर के एक 18 वर्षीय युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उसके माता-पिता ने उसका दिल दान कर दिया। आज वह दिल एक 12 साल की बच्ची के सीने में धड़क रहा है, जिसने अब स्कूल में दौड़ना फिर से शुरू कर दिया है।

  2. रोशनी की वापसी
    दिल्ली की 55 वर्षीय महिला की मृत्यु के बाद उनकी आंखें दान की गईं। अब दो लोग, जो सालों से अंधेरे में थे, रंग और रोशनी देख पा रहे हैं।

परिवार की भूमिका

अंगदान में परिवार की सहमति बेहद अहम होती है। इसलिए,

  • अपनी इच्छा अभी अपने परिवार के साथ साझा करें।

  • उन्हें बताएं कि आप मृत्यु के बाद अंगदान करना चाहते हैं।

  • इससे उस कठिन घड़ी में उनका निर्णय आसान हो जाएगा।

अंगदान – मृत्यु से अमरता तक

शरीर नश्वर है, लेकिन सेवा अमर होती है। अंगदान वह सेतु है जो आपके जीवन को एक नए अर्थ से जोड़ देता है। आप भले ही इस दुनिया में न रहें, लेकिन आपका एक हिस्सा – दिल, आंखें, किडनी – किसी और में जीवित रहेगा।

संकल्प का दिन : क्या हम मृत्यु के बाद भी जीवन देना चाहते हैं?

विश्व अंगदान दिवस सिर्फ एक अवसर नहीं, बल्कि एक संकल्प का दिन है। यह वह दिन है जब हम अपने भीतर झांककर तय कर सकते हैं कि क्या हम मृत्यु के बाद भी जीवन देना चाहते हैं? रक्तदानी ओर समाजसेवी नरेंद्र सिंह ने अंगदान करने का संकल्प लिया हैं. ऐसी पहल घर घर से होनी चाहिए.

आज, बस एक निर्णय लें –
NOTTO या Organ India पर जाएं, फॉर्म भरें, डोनर कार्ड लें, और अपने परिवार को बताएं।

याद रखिए –

आपकी चुप्पी किसी की मौत हो सकती है, लेकिन आपका हस्ताक्षर किसी का जीवन।

अंगदान कीजिए, जीवन बचाइए, और अपने अस्तित्व को अमर बनाइए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor