वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर राइजिंग भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट अमित सांखला की खास रिपोर्ट
क्या आपने कभी सोचा है कि किसी क्षण को हमेशा के लिए कैसे कैद कर लिया जाता है? आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के मौके पर हम आपको बताते हैं तस्वीरों की उस अद्भुत यात्रा के बारे में, जिसने हमारी सोच और देखने का नजरिया ही बदल दिया है।
शुरुआत हुई थी कैमरा ऑब्स्क्यूरा से, जहां बाहर की छवि अंधेरे कमरे में उलटी दिखाई देती थी। इसके बाद आए डागुएरियोटाइप – चमकदार धातु की प्लेट पर बनने वाली तस्वीरें, जो अनूठी और बेहद महंगी होती थीं। हर तस्वीर एक अलग कलाकृति होती थी, जिसे दोहराया नहीं जा सकता था।
लेकिन तस्वीरों की दुनिया में असली क्रांति लाई जॉर्ज ईस्टमैन और उनकी कंपनी कोडक ने। उन्होंने रोल फिल्म और सस्ते बॉक्स कैमरे बनाए। उनका मशहूर नारा था – “आप बटन दबाओ, बाकी काम हम करेंगे।” इसी से आम आदमी की ज़िंदगी में फोटोग्राफी उतरी। त्योहारों की रौनक, पारिवारिक पल, यात्राओं की यादें – सब अब कैमरे में कैद होने लगे। 35mm कैमरों के आने से फोटो पत्रकारिता और स्ट्रीट फोटोग्राफी को नई उड़ान मिली।
आज वही परंपरा आगे बढ़ाते हुए स्मार्टफोन कैमरे ने फोटोग्राफी को और आसान बना दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल फोटोग्राफी की मदद से मोबाइल न सिर्फ दिन में बल्कि रात में भी शानदार तस्वीरें खींच सकते हैं। बैकग्राउंड ब्लर, एडिटिंग और अनचाही चीज़ें हटाने तक की सुविधा अब हर किसी के हाथ में है।
यही कारण है कि आज हर व्यक्ति एक नागरिक पत्रकार बन चुका है। चाहे जोधपुर की गलियों का कोई आम नागरिक हो या कोई पेशेवर फोटोजर्नलिस्ट – हर कोई अब अपनी कहानी तस्वीरों के जरिए कह सकता है।
फोटोग्राफी आज सिर्फ एक शौक नहीं रह गई है, बल्कि यह समाज में बदलाव लाने, इतिहास दर्ज करने और भावनाओं को दुनिया तक पहुंचाने का शक्तिशाली माध्यम बन चुकी है। यह एक ऐसी भाषा है जिसे किसी अनुवाद की ज़रूरत नहीं होती।
तो अगली बार जब आप अपने फोन से कोई तस्वीर लें, याद रखिए – आप सिर्फ बटन नहीं दबा रहे, बल्कि इतिहास का एक हिस्सा संजो रहे हैं।





