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Thursday, February 19, 2026, 6:16 am

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हर वक्त मिलेगा रक्त…ये रमेश छाजेड़ की गारंटी है; एक हादसे ने लिख दी सेवा के अनूठे मिशन की कहानी

रक्त नहीं मिलने से समाज की एक बच्ची को खोया तो मिला सेवा का मकसद…रमेश छाजेड़ रामसर आज हर जरूरतमंद को उपलब्ध करवाते हैं रक्त…जीव दया और मानवसेवा की बने मिसाल

दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर

8302316074 diliprakhai@gmail.com

राजस्थान के बाड़मेर जिले के रामसर निवासी रमेश छाजेड़ का जीवन एक ऐसे प्रेरणास्त्रोत की तरह है, जो न सिर्फ सेवा का पवित्र संदेश देता है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि इरादा मजबूत हो, तो व्यक्ति किसी भी मुसीबत से उबर सकता है। रमेश छाजेड़ का नाम आज जोधपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में एक मशहूर नाम बन चुका है, और इसकी वजह है उनका अद्वितीय योगदान, खासकर रक्तदान, जीव दया और मानव सेवा के क्षेत्र में।

रमेश छाजेड़ का सेवा कार्य सिर्फ एक पेशेवर पहलू नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत संघर्ष और समर्पण की कहानी है, जो जीवन में मिली एक दुखद घटना से उत्पन्न हुआ। यह कहानी सिर्फ रक्तदान और सेवा की नहीं, बल्कि एक ऐसी इंसानियत की है जो बिना किसी स्वार्थ के दुनिया की बेहतरी के लिए काम करती है।

सेवा की राह पर पहला कदम: दुखद अनुभव और संकल्प

14 साल पहले, रमेश छाजेड़ पाली से जोधपुर आ गए थे ताकि उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर हो सके। एक रात उन्हें दो बजे फोन आया। यह कॉल एक छोटे से जीवन की एक और दर्दनाक कहानी थी। कॉल करने वाले ने बताया कि एक बच्ची को ओ निगेटिव रक्त की आवश्यकता थी, जो जोधपुर के राज दादीसा अस्पताल में भर्ती थी। रमेश छाजेड़ को इस समय तक जोधपुर में कोई पहचान नहीं थी, और वे किसी ब्लड डोनर से भी परिचित नहीं थे। इसके बावजूद, उन्होंने किसी भी प्रकार से मदद करने का प्रयास किया और पारस ब्लड बैंक से संपर्क किया। इस ब्लड बैंक ने रक्त देने की सहमति भी दे दी…परंतु देर हो चुकी थी और बच्ची की मृत्यु हो गई।

यह घटना रमेश छाजेड़ के जीवन में एक ऐसा मोड़ बनी, जिसे वे आज भी नहीं भूल पाए हैं। इस दुखद हादसे ने उन्हें यह सिखाया कि इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति को ब्लड की कमी से अपनी जान नहीं गंवानी चाहिए। यही वह पल था, जब उन्होंने अपने जीवन को सेवा के प्रति समर्पित करने का संकल्प लिया।

रक्तदान की वो पहल, वो बढ़ते कदम जो बढ़ते ही गए

संकल्प के बाद, रमेश छाजेड़ ने बाड़मेर जैन समाज के युवाओं को एकत्र किया और उनसे रक्तदान करने का आग्रह किया। इस बैठक में 20-25 लोग शामिल हुए और उन्होंने रक्तदान के महत्व को समझा। उन्होंने तब पारस ब्लड बैंक के मालिक ( अब स्व.) सुखराज मेहता से संपर्क किया। उन्होंने पूरा सहयोग दिया। इस तरह पहली बार 11 युवाओं ने रक्तदान किया और रक्तदान का सिलसिला शुरू हुआ। छाजेड़ बताते हैं कि यह हादसा उनके जीवन में सेवा के संकल्प के लिहाज से टर्निंग पॉइंट था। इस हादसे के बाद वे पूरी तरह सेवा को समर्पित हो गए। धीरे-धीरे, यह सिलसिला बढ़ता गया, और आज तक यह अभियान जारी है।

“मानव सेवा संस्थान” की स्थापना

2013 में, रमेश छाजेड़ ने अपनी सोच और संकल्प को एक संगठन का रूप दिया और “मानव सेवा संस्थान” की स्थापना की। इस संस्थान के माध्यम से उन्होंने रक्तदान के साथ-साथ और भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए। यह संस्थान न सिर्फ जोधपुर, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से सेवा कार्य कर रहा है।

इसके अलावा, रमेश छाजेड़ का मानवीय कार्य यह भी दर्शाता है कि उनका उद्देश्य केवल रक्तदान तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका लक्ष्य पूरे समाज की भलाई था। उनका मानना था कि हमें हर किसी की मदद करनी चाहिए, चाहे वह इंसान हो, पशु-पक्षी हो या किसी अन्य जीव-जंतु की मदद करनी हो।

मानव सेवा संस्थान, जोधपुर में वर्तमान पदाधिकारी 

संरक्षक : डॉ. राम गोयल

अध्यक्ष : रमेश छाजेड़ रामसर

सचिव : राजेंद्र संकलेचा

कोषाध्यक्ष : संपतराज धारीवाल

संकट के समय की मदद

रमेश छाजेड़ के जीवन में सेवा कार्य के कुछ अहम मोड़ थे, जिनसे उनका उद्देश्य और भी मजबूत हुआ। एक ऐसा ही समय तब आया जब बाड़मेर की एक युवती की डिलीवरी के बाद उसकी बच्चेदानी में गंभीर समस्याएं पैदा हो गईं और रक्तस्राव नहीं रुक रहा था। उस समय, डॉ. इंद्रा भाटी ने ऑपरेशन के लिए 15 से 20 यूनिट रक्त की आवश्यकता बताई। इस आपातकालीन स्थिति में, रमेश छाजेड़ ने अपना पूरा नेटवर्क जुटाया और 15 यूनिट रक्त एकत्र किया, जिससे युवती की जान बचाई जा सकी।

कोरोना महामारी में अद्वितीय सेवा

रमेश छाजेड़ का सेवा कार्य केवल नियमित रक्तदान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी अपनी भूमिका निभाई। लॉकडाउन के दौरान, जब समाज का एक बड़ा हिस्सा भोजन और अन्य आवश्यक सामानों के लिए संघर्ष कर रहा था, तब रमेश छाजेड़ और उनके सहयोगियों ने 45,000 भोजन पैकेट वितरित किए। वे रोजाना 1500 पैकेट वितरित करते थे, जिसमें जोधपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने बालोतरा, बाड़मेर, रामसर और आसपास के गांवों में भी मदद पहुंचाई।

कलेक्टर के आदेश पर, उन्होंने मानव सेवा संस्थान की एंबुलेंस सेवा भी प्रदान की और ब्लड की जरूरत पड़े तो 46 यूनिट रक्तदान करवाकर पारस ब्लड बैंक को दिया।  बाल बसेरा सेवा संस्थान के 75 बच्चों को तीन महीने तक भोजन सामग्री उपलब्ध करवाई। 24 ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर भी खरीदे थे जो आज भी सेवा के काम आ रहे हैं। इनका उपयोग उन बुजुर्गों के लिए किया जा रहा है जिन्हें सांस संबंधी समस्या है।

अन्य सेवाएं और योगदान

रमेश छाजेड़ और उनके संस्थान ने समाज के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने वृद्धाश्रमों, बाल निकेतनों, और गोशालाओं में भी अपनी सेवाएं दीं। उदाहरण स्वरूप, उन्होंने दादा-दादी वृद्धाश्रम के लिए एक एंबुलेंस भेंट की, जो वहां के बुजुर्गों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुई।

इसके अलावा, रमेश छाजेड़ ने 162 परिवारों को गोद लिया है और उन्हें चिकित्सा सुविधा और राशन उपलब्ध करवाई। उन्होंने दृष्टिहीन बच्चों की पढ़ाई के लिए 60 स्मार्टफोन दिए, साथ ही जरूरतमंद विधवाओं को सिलाई मशीनें भेंट कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मदद की। छाजेड़ बताते हैं कि  एम्स में जब डॉ. संजीव मिश्रा डायरेक्टर हुआ करते थे तब बासनी में एक फैक्ट्री में बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर लगाया और 300 यूनिट रक्त संग्रहित कर एम्स और पारस ब्लड बैंक को दिया।

रमेश छाजेड़ ने मानव सेवा संस्थान के माध्यम से तब उल्लेखनीय कार्य किया जब चेन्नई में एक मरीज को रक्त की जरूरत पड़ने पर जोधपुर से एम्स चेन्नई हवाई जहाज द्वारा भिजवाया। बाल बसेरा संस्थान में बच्चों के पंखे कई मौकों पर भेंट कर चुके हैं।

छाजेड़ ने बताया कि बीमार कुत्तों, कबूतर, बिल्ली, बंदरों के इलाज के लिए दवाइयां, टॉस बिस्किट की कई बार मदद कर चुके हैं। राधा-रानी गोशाला में एक्सीडेंटल कुत्तों के लिए खाद्य सामग्री, मेडिसिन हर माह भिजवाते हैं। गोशालाओं में चारा, रिजका, गुड़ और लापसी आदि गोधन को खिलाते हैं। पक्षियों को चुग्गा डलवाते हैं। कहने का मतलब कि जीव दया के मिशन में भी लगे हुए हैं।

सम्मान और पुरस्कार

रमेश छाजेड़ की इन सेवा गतिविधियों को व्यापक रूप से सराहा गया है। उन्हें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। 2015 में उन्हें जस्टिस विनीत कोठारी द्वारा सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया गया। 2016 में गजेंद्रसिंह खींवसर द्वारा सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, 2021 में उन्हें कोरोना काल में उनके योगदान के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सम्मानित किया गया। रमेश छाजेड़ को 82 बार रक्तदान करने पर जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के हाथों भी सम्मान प्राप्त हुआ है। नेपाल की एक संस्था द्वारा भी सम्मान मिल चुका है।

इन पदों पर रमेश छाजेड़ रामसर वर्तमान में कार्यरत हैं 

1-मानव सेवा संस्थान जोधपुर : अध्यक्ष

2-आशा-अथाई इंटरनेशनल जोधपुर : अध्यक्ष

3-जैन सेवा संगठन जोधपुर : मुख्य संयोजक

4-सनातन गौर रक्षा बल दिल्ली जोधपुर : जिला सचिव

5-बाल बसेरा सेवा संस्थान झालामंड जोधपुर : ट्रस्टी

6-भारतीय मानवाधिकार परिषद ठाणे जोधपुर संभाग : अध्यक्ष

7-बाड़मेर जैन समाज समिति जोधपुर : सलाहकार

8-भारत विकास परिषद जोधपुर मारवाड़ शाखा : सदस्य

9-सीएलजी शास्त्री नगर पुलिस थाना जोधपुर : सदस्य

10-साधु-साध्वी वेवाक्य समिति जोधपुर : सदस्य

11-जीव दया पशु-पक्षी सेवा समिति जोधपुर-सदस्य

12-जोधपुर जिला पश्चिचम सीएलजी पुलिस : सदस्य

भविष्य की दिशा

रमेश छाजेड़ का कहना है कि उनका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और हर एक व्यक्ति को यह समझाना है कि सेवा सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे कार्यों के माध्यम से प्रकट करना चाहिए। उनके संस्थान की यह यात्रा अभी भी जारी है और वे आने वाले वर्षों में और भी अधिक सेवा कार्य करने का इरादा रखते हैं।

रमेश छाजेड़ की प्रेरक यात्रा न सिर्फ जोधपुर, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक मिसाल है। उनका मानना है कि यदि हम सभी मिलकर इस दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश करें, तो दुनिया में सचमुच बदलाव ला सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बनाड़ स्थित दादा-दादी वृद्धाश्रम में एंबुलेंस भेंट की जो वहां काम आ रही है।

छाजेड़ बताते हैं कि उन्होंने दानदाताओं के सहयोग से 2300 पानी के टैंकर गर्मियों में गौशालाओं, सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक प्याऊ में डलवाए। यह सिलसिला दो साल से गर्मियों के सीजन में चल रहा है।

 

 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor