राइजिंग भास्कर. जोधपुर
जैन समाज का पर्युषण महापूर्व बुधवार से शुरू हुआ। जिन मंदिरों में श्रद्भालओं ने पूजा-अर्चना और दर्शन वंदन का लाभ लिया। श्रद्धालुओं ने पर्व पर्युषण आया जैनों के दिलों में हर्ष समाया… आदि स्वर लहरियों के साथ पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का स्वागत किया। साथ ही परमात्मा पूजन किया और पांच कर्तव्यों पर मंथन किया।
संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया तप, त्याग एवं क्षमा का परिचायक जैनों का महान पर्व नगर स्थित रत्न प्रभ क्रिया भवन में तपोरत्नसुरी महाराज के शिष्परत्नों के सान्निध्य में तप, जप, आराधना, साधना, अष्टमंगल दर्शन और वंदन के साथ श्रावक-श्राविकाओं ने अष्ट दिवसीय पर्युषण महापर्व का शुभारंभ किया। अष्टाह्रिका सूत्र पूजा अर्चना के साथ आगाज हुआ। गणिवर्य ने कहा कि पयुर्षण आत्म आराधना का पर्व है। उन्होंने अमारी प्रवर्तन, साधार्मिक भक्ति, क्षमापना, अठम तप एवं चैत्यपरीपार्ठी आदि पांच कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि पांच कर्तव्यों द्वारा विशिष्ट मन की शुद्धि पाकर इस पर्व को मनाया जाता है। मुनि ने कहा कि वैरभाव नहीं रखें। प्रेम भाव बढ़ाओ। वैरभाव नाश करने का सबसे सस्ता व सरल उपाय क्षमापना है। क्षमापना से केवल ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है । विभिन्न लाभार्थियों द्वारा ज्ञान पूजा अर्चना पूजन आंगी रचना आरती सांय प्रतिक्रमण व सांय भक्ति भावना की गई। सचिव उम्मेदराज रांका ने बताया कि पर्व के द्वितीय दिवस 21 अगस्त को वार्षिक 11 कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा । विनायकिया ने बताया इसी तरह तपोरत्नसुरी समुदाय के शिष्यों का गुलाब नगर पारसनाथ जैन मंदिर सभागार तथा गुरुओं के तालाब पारसनाथ जैन प्राचीन तीर्थ में भव्य पयुर्षण पर्व मनाया जा रहा है।










