शिव वर्मा. जोधपुर
संतों की तपोस्थली श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर में चातुर्मास सत्संग समारोह के अंतर्गत संत विष्णुदास महाराज ने हनुमंत चरित्र कथा में हनुमान जी का जन्मोत्सव का पावन प्रसंग सुनाया। साथ ही परमहंस डॉ. रामप्रसाद महाराज ने नैनी बाई का मायरा का पावन चरित्र को सुनाते हुए कहा कि जीव को जब सत्संग मिलता है तो जीव के जीवन कि दशा व दिशा दोनों बदल जाती है। जिस घर में संत -महापुरुष भोजन प्रसाद करते हैं। उस घर पर भगवत कृपा सदा बनी रहती है।
संत ने कहा कि मेहता नरसी ने सत्संग कीर्तन सुनकर वैराग्य प्राप्त कर सारी सम्पत्ति परमार्थ सेवा में लगा कर संत वेश धारण करके भगवान के भजन में लग गया। भगवान की भक्ति में कभी चतुराई काम नही आती है। इसलिए मनुष्य जीवन को सार्थक करना है तो राम नाम का स्मरण करना चाहिए। जो राम नाम लेता वह सदा निर्भय होकर रहता है।





