विशेष प्रेरणास्पद कार्यक्रम आयोजित, जिसने न्यायपालिका की गरिमा, सामाजिक उत्तरदायित्व और समावेशिता को एक नई ऊंचाई प्रदान की
दिलीप कुमार पुरोहित. शिव वर्मा. जोधपुर
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राजस्थान उच्च न्यायालय शुक्रवार को अपनी स्थापना के 76 वर्ष पूर्ण कर रहा है। राजस्थान उच्च न्यायालय के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष और प्रेरणास्पद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने न्यायपालिका की गरिमा, सामाजिक उत्तरदायित्त्व और समावेशिता को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
प्रातः 10:10 बजे सेरेमोनियल गेट पर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जहां आचार्य हस्ती विशेष आवासीय विद्यालय के 66 बालक-बालिकाओं का आत्मीय स्वागत किया गया। ये बच्चे न्यायालय परिसर में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित थे, जिनका अभिनंदन न्यायाधीशगण, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारीगण, रजिस्ट्रारगण एवं न्यायालय परिवार के अन्य सदस्यों ने पुष्प, मिष्ठान्न एवं रंग भेंट कर किया।
जस्टिस पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहाः “न्यायालय केवल विवादों का निपटारा करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के लिए आशा, प्रेरणा और मार्गदर्शन का केंद्र भी है। उनका यह संदेश बच्चों के मन में आत्मविश्वास और संकल्प की भावना भर गया।
न्यायपालिका केवल विधिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ जुड़ने और उन्हें सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध :
इस आयोजन में न्यायालय परिवार ने बच्चों के साथ समय बिताकर यह दर्शाया कि न्यायपालिका केवल विधिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के साथ जुड़ने और उन्हें सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। समारोह के विशेष भाग के रूप में बच्चों को राजस्थान उच्च न्यायालय परिसर का भ्रमण कराया गया, जिसमें उन्होंने न्यायिक कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा और समझा। बच्चों को न्यायालय के संग्रहालय में ले जाया गया, जहां उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, न्यायिक वेशभूषा और पुरानी अदालतों के चित्रों को देखा। राजस्थान की न्यायिक विरासत, प्रमुख निर्णयों और न्यायाधीशों के योगदान को समझा। डिजिटल डिस्प्ले और इंटरैक्टिव मॉडल्स के माध्यम से न्याय प्रक्रिया का अनुभव किया। यह संग्रहालय दर्शन बच्चों के लिए एक शैक्षिक और प्रेरणादायक अनुभव रहा, जिसने उन्हें न्याय की गहराई और गरिमा से परिचित कराया। भ्रमण के दौरान बच्चों को न्यायालय परिसर में स्थित क्रैश (बाल देखभाल केंद्र) भी दिखाया गया। इस भ्रमण का सबसे प्रभावशाली भाग रहा अदालत कक्ष का दौरा, जहां बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया की वास्तविक झलक देखने का अवसर मिला। उन्हें न्यायाधीशों की पीठ, अधिवक्ताओं की बहस, वादियों की उपस्थिति और न्यायिक अनुशासन का वातावरण दिखाया गया। यह अवलोकन न्यायपालिका की समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण बना। यह आयोजन एक नई परंपरा की शुरुआत है। जहाँ स्थापना दिवस को केवल औपचारिकता न मानकर, समाज के विशेष वर्गों के साथ जुड़ने का माध्यम बनाया गया। समारोह न्यायालय के स्थापना दिवस का सजीव और प्रेरणादायक उत्सव रहा। यह आयोजन न केवल स्मरणीय रहा, बल्कि यह न्यायपालिका की मानवीय छवि को और अधिक सशक्त करने वाला क्षण बन गया।
Author: Dilip Purohit
Group Editor










