राजमाता कृष्णा कुमारी ने महिलाओं को समाज में रोजगार, आत्मनिर्भर एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का रास्ता दिखाकर एक मिसाल कायम की। शिक्षा के क्षेत्र में किए योगदान को हम कभी भी नहीं भूल पाएंगे। राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स स्कूल देश के प्रतिष्ठित स्कूलों में एक है…।
आलेख : अनीता मेहता, शिक्षाविद और अध्यक्ष संस्कृति फाउंडेशन जोधपुर
राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा ने बालिका शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके प्रयासों से जोधपुर में एक प्रतिष्ठित स्कूल की स्थापना हुई जो बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है।
राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल।
राजमाता कृष्णा कुमारी, जिन्होंने जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा सूर्यनगरी में स्थापित की। आज भी सूर्यनगरी इनका ऋणी है। राजमाता जी जितनी राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय थीं। उससे भी कहीं अधिक शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अभूतपूर्व योगदान देकर समाज को एक नई दिशा दी। राजमाता ने लैंगिक असमानता के भेदभाव को समाप्त कर शिक्षा के क्षेत्र में समानता का उत्तरदायित्व निभाया। महिलाओं को समाज में रोजगार, आत्मनिर्भर एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का रास्ता दिखाकर एक मिसाल कायम की। आज उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए योगदान को हम कभी भी नहीं भूल पाएंगे। इसका जीता जागता उदाहरण राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल है। उनके द्वारा शैक्षणिक स्तर पर अवार्ड दिया जा रहा है जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
यह स्कूल पूर्व नरेश गज सिंह द्वितीय द्वारा अपनी माता राजमाता कृष्णा कुमारी की याद में स्थापित किया गया था। स्कूल की स्थापना 20 जुलाई 1992 को हुई। यह विद्यालय पूर्व नरेश गजसिंह द्वितीय ने अपनी माता, राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा जो वास्तविक रूप सही मायनो में एक शिक्षिका थी। यादगार में बनवाया।
मारवाड़ की शान राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा का व्यक्तित्व व उपलब्धियों की व्याख्या करना अत्यंत आवश्यक है। जिन्होंने लैंगिक असमानता को दूर करते हुए समाज में एक मिसाल कायम की थी जो कि एक बहुत बड़ी बात है उनके बारे में मैं चंद पंक्तियां कहूंगी-
”आपकी सादगी, कर्तव्य निष्ठा, सदैव मुस्कान, संकल्पों के प्रति दृढ़ता, पक्के इरादे, सेवा समर्पण भावना, करुणा को कभी भुलाया नहीं जा सकता। राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा ऐसी विलक्षण प्रतिभा तथा अद्भुत व्यक्तित्व की धनी थी। जिन्होंने अपने जीवन में अनेक झंझावतों को पार किया। हर सुख दुख में हरसंभव तटस्थ भूमिका निभाते हुए जीवन में कर्म को प्रधानता देते हुए जीवन को अपना लक्ष्य बनाया।” राजमाता कृष्णा कुमारी का जन्म गुजरात के गंधादा रियासत में महाराणा घनश्याम सिंह के यहां हुआ। आपका विवाह 14 फरवरी 1943 को महाराजा हनवंत सिंह से हुआ। आपके दो पुत्रियां चंद्रेश कुमारी तथा शैलेंद्र कुमारी तथा 13 जनवरी 1948 को पुत्र दर्शन हुए। गुजरात के होने के कारण आप मारवाड़ की संस्कृति अपणायत, रीति रिवाज, परंपराओं को बेखुदी निभाकर जीवन को उसी के अनुरूप बेहतर तरीके से ढाला । महाराजा हनवनत सिंह का 29 वर्ष की उम्र में 26 जनवरी 1952 को हवाई दुर्घटना में देहांत हो गया ।आपके जीवन में यह घड़ी अत्यंत दुखदाई संकट की रही ।उसे समय युवराज गज सिंह मात्र 4 वर्ष के थे ।आपने विकट परिस्थितियों में धैर्यता व दृढ़ता से काम लिया।
अगस्त 1956 में 8 साल कीआयु में युवराज गजसिंह को विदेश पढ़ने के लिए भेजा । शिक्षा के मामले में आप बहुत ही सक्रिय थीं और सकारात्मक सोच का इनमें कूट-कूट कर भाव भरा हुआ था। राजमाता एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं।
राजनीति के साथ-साथ अपने बालिका शिक्षा के क्षेत्र में अपना अकथनीय योगदान स्थापित किया। सांसद के रूप में आपने बेहतर भूमिका निभाई और मारवाड़ की जनता की मांग पर अपने राजनीति में प्रवेश लिया था। 1971 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय रूप से लड़ा और 21, 497 मतों से विजय रही। जोधपुर में विमान सेवा, विकास, रेल सेवा, भीलवाड़ा पर रेल मार्ग सुझाव, भारत-पाक युद्ध के समय सैनिकों के परिवार की मदद और जनता के साथ उनकी जरूरत का ध्यान रखा। पर्यटन विकास, कर्मचारी आंदोलन, महंगाई विरोधी आंदोलन एवं समाधान और धार्मिक व सामाजिक शैक्षिक समस्याओं में आप सक्रिय भूमिका निभाई। मारवाड़ की बालिकाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अपने विशेष प्रयास किया। उनकी सकारात्मक सोच लड़का लड़की बराबर है। समान अवसर लड़कियों को भी मिलना चाहिए। शिक्षा से वंचित बालिकाओं के लिए आवश्यक छात्रावास का निर्णय लेकर आपने पाली के देसूरीगढ़ में गरीब बच्चों के लिए छात्रावास की व्यवस्था की। ताकि वह स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर सकें। जोधपुर में बालिका शिक्षा के लिए राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल की स्थापना की। सूर्यनगरी के प्रतिष्ठित विद्यालय हनुमंत एजुकेशन ट्रस्ट के द्वारा राइकाबाग में विधवा और जरूरतमंद महिलाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र कला अपने मारवाड़ की बालिका और महिलाओं के लिए बेहतर जीवन स्तर को उठाने का स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास वास्तव में सराहनीय है।
समाज के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया। नारी शक्ति बालिका शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल थीं । महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में शैक्षणिक प्रतिभाओं को सदैव सम्मान हेतु अपने अवार्ड भी घोषित किए। आप समाज में अनुकरणीय आदर्श के रूप में स्थापित हुईं। सूर्यनगरी में ही नहीं अपितु पूरे भारत में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। आज भी राजमाता कृष्णा कुमारी बालिका विद्यालय अपने आप में पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। वहां की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वहां का नैतिक संस्कार, वहां हर चीज में एक अलग ही शैक्षणिक भाव दिखाई देता है। शिक्षा के क्षेत्र में राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा का अगर स्मरण किया जाए तो शायद कोई उनके आगे इतना कुछ कर पाएगा। उनके योगदान की व्याख्या करना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात होगी। शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण उनकी सकारात्मक सोच का परिणाम है। शिक्षक दिवस में अगर हम उनको याद करते हैं तो यह हमारे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात होगी । इसीलिए हमारे पूर्व नरेश गज सिंह द्वितीय ने उनकी यादगार में एक अद्वितीय शैक्षणिक संस्था का निर्माण बालिकाओं के लिए किया, जिसका कि देश-विदेश में भी नाम विख्यात है। जिसका नाम है राजमाता बालिका विद्यालय। सूर्यनगरी की राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा का व्यक्तित्व एवं उपलब्धियां हमारे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है, उनको शिक्षा के क्षेत्र में जितना याद किया जाए उतना ही कम है।





