विहिप की ओर से रोटरी भवन में ”वैश्विक चुनौतियां एवं विश्व गुरु भारत” विषय पर आयोजित प्रबुद्धजन संगोष्ठी में हुआ मंथन
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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विश्व हिंदू परिषद की ओर से रोटरी भवन सभागार रेजिडेंसी रोड में 4 सितंबर को शाम ”वैश्विक चुनौतियां एवं विश्व गुरु भारत” विषय पर प्रबुद्धजन संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रमुख स्वामी विज्ञानानंद थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता एयर मार्शल जगदीश चंद्र परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, विशिष्ट सेवा पदक और सेवानिवृत्त कमांडर इन चीफ भारतीय वायु सेना ने की। मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली पब्लिक स्कूल के निदेशक डॉ. बीएस यादव को आमंत्रित किया गया था। विशिष्ट अतिथि के रूप में कमला नेहरू महिला महाविद्यालय की निदेशक प्रो. डॉ. संगीता लूंकड़ थीं। विहिप के प्रांत अध्यक्ष डॉ. राम गोयल ने बताया कि इस मौके पर शहर के कई प्रबुद्ध लोग मौजूद थे।
कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता स्वामी विज्ञानानंद ने संबोधित करते हुए कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था इतनी बड़ी थी कि हम दुनिया के विद्यार्थियों को भारत में पढ़ाते थे और फ्री में पढ़ाते थे। दुनिया में हमारा हर तरह से प्रभाव था। तब हम निश्चित रूप से विश्व गुरु थे। आज ऐसी स्थिति नहीं है। आज अच्छी स्थिति नहीं है। अर्थव्यवस्था, शिक्षा, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, आस-पड़ोस के देश, एकेडेमिया, मीडिया, पॉलिटिक्स, यूथ…आदि पर विशेष ध्यान देकर ही हम विश्व गुरु बन सकते हैं। किसी भी देश को विश्व गुरु बनना है तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। हम बहुत बड़ी अध्यात्म की बातें करते हैं इससे देश आगे बढ़ने वाला नहीं है। दुनिया को आपके अध्यात्म से कोई मतलब नहीं है। दुनिया आपकी ताकत और क्षमता को देखता है। विद्या ददाति विनयम… तो सही है पर इस बात पर भी गौर करना होगा कि पहले धन आएगा तभी धर्म-कर्म की ओर अग्रसर होंगे, यह बात हमारे शास्त्रों में भी कही गई है, जिसे हम बहुत हवाबाजी कर भूल जाते हैं। देश स्वतंत्र हुआ। यूरोप, अमेरिका, जर्मनी आगे बढ़ गए। नेहरूजी के सोशलिस्ट इकोनॉमी मॉडल की वजह से भारत 50-60 साल आगे बढ़ाने की बजाय पीछे छूट गया। हमसे कई देश आगे हैं। उनसे आगे बढ़ने के लिए बड़ा गेप आ गया है। उस गेप को पाटने के लिए बड़ा परिश्रम करना पड़ेगा। औद्योगिकरण सबसे बड़ी चुनौती है। एग्रीकल्चर का विकास नहीं हुआ। नरेंद्र भाई एग्रीकल्चर पर लॉ लाए थे, लेकिन गुजरातीवादी नेताओं ने जो मुट्ठी भर थे विरोध किया। 99 प्रतिशत किसान सहमत थे, मगर 1 प्रतिशत किसानों ने शोर कर इस बिल को वापस लेने पर मजबूर कर दिया और हम एग्रीकल्चर में फिर से पिछड़ गए।
1985 तक हम चाइना से अर्थव्यवस्था में आगे थे। 1991 में नरसिम्हा राव ने अर्थव्यवस्था में भारत को कुछ मजबूत किया। इसके लिए हम नरसिम्हा राव को थेंक्स देना चाहेंगे, जिन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया। तब भारत का एस्प्रेक्शन जागा। वर्ल्ड की इकोनॉमी में भारत आज भी पीछे है। चाइना आज भी 29 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग करता है। उसकी इकोनॉमी 29.1 है और हमारी 2.1 है। अगर भारत को विश्व गुरु बनना है तो अपनी इकोनॉमी बढ़ानी होगी। केवल इतना कहने भर से कि भारत शक्तिशाली है, विश्व गुरु है और विकसित भारत है इससे कुछ होने वाला नहीं है। यह हवा-हवाई बाते हैं।
जो देश व्यापारियों का आदर नहीं करता, वह कभी विकास नहीं कर सकता :
स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि जो देश व्यापारियों का आदर नहीं करता, वहां विकास नहीं हो सकता। भारत में बिजनेसमैन को चोर कहा जाता है और जो चोर हैं वो साधु बने बैठे हैं। ऐसा करने से देश का भला होने वाला नहीं है। जो बिजनेसमैन इनोवेशन कर धन अर्जित करता है, उसे देश में टैक्स में रिबेट नहीं मिलती। यह सबसे बड़ी विडंबना है। अर्थव्यवस्था काे मजबूत करने से ही देश का विकास किया जा सकता है। अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करके ही हम विश्व गुरु बन सकते हैं। सरकार, मंत्रियों, ब्यूरोक्रेट्स, बिजनेसमैन और मीडिया के साथ लोगों को समझना होगा कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाकर ही हम विकसित भारत बना सकते हैं। हमारी इकोनॉमी रेट बढ़ाने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी, हवा हवाई बातों से कुछ होने वाला नहीं हैं।
18 लाख बच्चे हर साल विदेश पढ़ने जाते हैं, 70 हजार करोड़ फीस में विदेश चला जाता है :
स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि हम नालंदा और तक्षशिला की बात करते हैं और सबसे बड़ा तथ्य और कटु सत्य यह है कि हर साल 18 लाख बच्चे विदेश पढ़ने जाते हैं और 70 हजार करोड़ रुपए फीस के रूप में विदशों में जाता है। अगर इतनी बड़ी राशि बच जाए तो देश में 100 आईआईटी खुल सकते हैं। स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि भारत में शिक्षा का स्तर बड़ा ही निम्न हैं। यहां फैकल्टी ट्रेनिंग नही होती। अंग्रेजी के प्रोफेसर को अंग्रेजी पढ़ाना नहीं आता। हमारे यहां शिक्षा के मद में जितना बजट होता है उतना चाइना में एक बड़े इंस्टीट्यूट का बजट होता है। डिजाइन, डेवलपमेंट, पेटेंट सबमें हम पिछड़े हुए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम हमारे यहां बहुत ही कम बनते हैं और चाइना सहित अन्य देशाें पर निर्भर हैं। नरेंद्र भाई के आने के बाद देश में कुछ विकास हुआ है। टेक्नोलॉजी की दिशा में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। स्वीट्जरलैंड जैसा छोटा सा देश भी विकसित है। हमे अभी बहुत काम करने की जरूरत है।
डिफेंस के क्षेत्र में आज भी आत्मनिर्भर नहीं, फाइटर जेट तक प्रॉपर नहीं बना पाता भारत
स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि डिफेंस के क्षेत्र में आज भी हम आत्मनिर्भर नहीं हैं। हालात यह है कि देश फाइटर जेट तक प्रॉपर रूप से नहीं बना पाता। उसमें पॉवर इंजन डेवलेप नहीं कर पाए हैं। आज हमें हमारे ही पड़ोसियों से खतरा है। अमेरिका ने अपने आपको इतना ताकतवर बना लिया है कि उसे अपने पड़ोसियों से कोई खतरा नहीं है, जबकि भारत के पड़ोसी उन्हें आंख दिखाते रहते हैं। असली खतरा भारत को यूरोप से नहीं है, बल्कि चाइना से है। हिंदी चीनी भाई भाई की हवा हवाई बातों में हम डूब गए। पाकिस्तान हमारे लिए खतरा नहीं बल्कि सिर दर्द है। पाकिस्तान चीन का चाकू है। वह हमारे लिए खतरा कभी नहीं रहा, बस सिरदर्दी है। इधर बांग्लादेश जिसे हमने स्वतंत्र करवाया वह भी हमारे लिए सिरदर्द बन रहा है। कभी सुधरता है और फिर कभी सिरदर्द बन जाता है। श्रीलंका जिसे हमने अनाज दिया और आर्थिक मदद दी वह भी हमारी बात नहीं मानता। मालदीव जिसे राजीव गांधी ने कब्जे से मुक्त करवाया, वह भी आए दिन अंगुली उठाता है। नेपाल और भूटान भी आंख उठाते रहते हैं।
करीब 40 मिनट की स्पीच में भारत को विश्व गुरु बनाने के दिए सूत्र
स्वामी विज्ञानानंद ने करीब 40 मिनट की स्पीच में भारत को विश्व गुरु बनने के सूत्र दिए। उन्होंने अर्थव्यवस्था, शिक्षा, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, आस-पड़ोस के देश, एकेडेमिया, मीडिया, पॉलिटिक्स, यूथ…आदि पर विशेष फोकस करते हुए कहा कि इन विषयों को जब तक हम आत्मसात नहीं कर लेते हमारे लिए विश्व गुरु बनना आसान नहीं हैं। उन्होंने अपनी पूरी स्पीच में अर्थव्यवस्था पर जोर दिया और कहा कि जिस देश में बिजनेसमैन को आदर भाव नहीं दिया जाता, उनकी मेहनत की कद्र नहीं होती, वह देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता।
Author: Dilip Purohit
Group Editor









