राइजिंग भास्कर कॉलम : दिलीप कुमार पुरोहित
समस्याओं, मुद्दों और परिस्थितियों पर आधारित कॉलम बेबाक बातें आज से शुरू किया जा रहा है। हम देश-काल परिस्थितियों के हिसाब से लिखेंगे। हमारे ध्यान में अगर स्थानीय मुद्दे आए तो हम उस पर लिखेंगे। अगर राज्य, देश और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य सामने हुआ तो उस पर भी कलम चलेगी। नेता, चर्चित व्यक्ति, साहित्यकार, कलाकार और हमारी नजर हर उस शख्स पर रहेगी जो समाचार का हिस्सा रहेगा या जिस पर लिखना सामयिक होगा। आज हम शुरुआत नेपाल के ताजा हालात से कर रहे हैं।
जलता नेपाल : भारत को हाथ डालने से बचना होगा, स्वामी विज्ञानानंद की बातों पर गौर करने की जरूरत
गत 4 सितंबर को विहिप के अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार स्वामी विज्ञानानंद जोधपुर में थे। उन्होंने अपनी आधा घंटे से ज्यादा की स्पीच में एक जगह कहा कि हमे यूरोप से खतरा नहीं है। हम खतरा हमारे पड़ोसी चीन से है। फिर उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को हमने स्वतंत्र करवाया मगर वह हमें आंख दिखाता है। पाकिस्तान चीन का चाकू बना हुआ है। पाकिस्तान से हमे खतरा नहीं है, मगर वह हमारे लिए सिरदर्द बन जाता है। श्रीलंका को हमने आर्थिक मदद दी और अनाज दिया मगर वह भी हमारी बात नहीं मानता। मालदीव, बर्मा और नेपाल के बारे में भी उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसियों से हमें चुनौती है।…हम हमारी बात स्वामी विज्ञानानंद की उन पंक्तियों से ही शुरू करते हैं।
अभी नेपाल जल रहा है। नेपाल तख्तापलट की ओर है। नेपाल का राजनीतिक संकट लगातार गहराता जा रहा है. काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में हिंसक विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद नेपाल में कमान सेना के हाथ में आ गई है। नेपाली सेना अध्यक्ष इस वक्त किसी राष्ट्रीय नेता की तरह पूरे देश में चल रहे प्रदर्शन और हिंसा पर नियंत्रण की योजना बना रहे हैं। नेपाल सेना ने मंगलवार रात 10 बजे से सुरक्षा अभियानों की कमान संभाल ली। सबसे पहले उन्होंने बुधवार शाम से पूरे देश में कर्फ्यू का ऐलान कर दिया है। दूसरी ओर सेना और राष्ट्रपति की बैठक में आगे का रास्ता निकल सकता है।




