” गुरु शिष्य परंपरा व आध्यात्मिक प्रगति” पर कार्यक्रम आयोजित
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के तत्वावधान में माहेश्वरी भवन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन “क्रिया योग दीक्षा” कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें नए साधकों को स्वामी अच्युतानंद गिरी द्वारा क्रिया योग की दीक्षा प्रदान की गईl
इस अवसर पर स्वामी जी ने भारत की प्राचीन व महान गुरु – शिष्य परंपरा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भक्त को भगवान से मिलने में गुरु एक सेतु का कार्य करते हैं, यानी माध्यम बनते हैं l गुरु के निर्देशानुसार बताए गए पथ का अनुसरण करने पर अंततः भक्त का भगवान से मिलन हो जाता है l स्वामी जी ने कहा कि 25% भक्त का प्रयास, 25% गुरु का आशीर्वाद व 50% भगवान की कृपा, इन तीनों के फलीभूत होने से भगवान के दर्शन होते हैं l
मनुष्य की आध्यात्मिक प्रगति में भी कई बाधाएं आती हैं, मनुष्य का स्वयं का आध्यात्मिक अहम् कि भगवान के प्रति मेरा समर्पण, मेरा ध्यान इत्यादिl आध्यात्मिक प्रगति का सूचक व्यक्ति का स्वयं की संकीर्ण विचारधारा यानी उस भाव से बाहर आना है कि कितनी करुणा का भाव, अश्रु रूपी करुणा आप में विकसित हो रही है l
सामूहिक ध्यान आपके ज्ञान की गहनता और तीव्रता को और ज्यादा बढ़ाता है, क्योंकि वहां के वातावरण में ऐसे स्पंदन जुड़े रहते हैं जो आपकी आध्यात्मिक प्रगति को बढ़ाने में सहायक होते हैं l आध्यात्मिक प्रगति से भक्त की बुद्धि व प्रभावशीलता बढ़ती है और दूसरों की मदद की भावना जागृत होती हैl माया भी ईश्वर प्रदत्त एक दैवीय स्वरुपा हैl माया को विष्णु भक्ति प्रदायिनी भी कहा जाता हैl अभी पूरा संसार एक राजसी चरण से निकल रहा है l योग सूत्र परंपरा के माध्यम से प्राचीन सनातन धर्म का जो खजाना है वह आज के युग में काफी लोगों की जगत कल्याण में मदद कर रहा हैl ब्रह्म चेतना से जुड़कर आत्मिक गुणों का विकास करके ही मानव कल्याण संभव हैl इस कड़ी में “क्रिया योग” विज्ञान ही ऐसा होगा, जो संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा l
Author: Dilip Purohit
Group Editor










