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Sunday, August 23, 2026, 8:18 am

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हिंदी दिवस पर सीनियर एडवोकेट एनडी निंबावत ”सागर” और राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित की कविताएं

कवि : एनडी निंबावत ”सागर”

हिंद देश की बेटी हिंदी हूं…

मैं इस हिंद देश की बेटी, हिंदी हूं
कुछ भाई-बहिनों की वजह आज, जिंदी हूं

आज़ाद भारत देश में, अंग्रेजी के अधीन हूं
आज हर घर में, रुग्णावस्था में पड़ी दीन-हीन हूं
कहने को तो मैं राज भाषा हूं
हां, गरीबों की बहुत बड़ी आशा हूं
मेरी स्थिति को यूं समझ लीजिए
जैसे,
बिन गहनों की दुल्हन के माथे की बिंदी हूं

मैं इस हिंद देश की बेटी, हिंदी हूँ
कुछ भाई-बहिनों की बजह आज, जिंदी हूं

अपनों से ठुकराई जा रहीं हूं मैं
गैरों से अपनाई जा रही हूं मैं
विदेशों में सम्मान पा रही हूं मैं
अपने ही देश में भुलाई जा रही हूं मैं
मेरी स्थिति को यूं समझ लीजिए
जैसे,
लूली-लंगड़ी, गूंगी-बहरी, अंधी हूं

मैं इस हिन्द देश की बेटी हिंदी हूं
कुछ भाई-बहिनों की वजह आज, जिन्दी हूं

सबसे बड़े न्याय के मंदिर में मेरा प्रवेश नहीं
उनकी नजरों में मैं शरणार्थी हूं, ये मेरा देश नहीं
जो भी मुझे बोलता है, बेचारा समझा जाता है
क्या करूं सीधी-सादी हूं, बहरूपिए सा भेष नहीं
मेरी स्थिति को यूं समझ लीजिए
जैसे,
बिना किसी अपराध के अपने ही घर में बंदी हूं

मैं इस हिन्द देश की बेटी हिंदी हूं
कुछ भाई-बहिनों की वजह आज, जिंदी हूं

0000

कवयित्री : राखी पुरोहित

हिंदी है भारत की पहचान…

हिंदी है भारत की पहचान,
मातृभूमि का अमूल्य गान।

संस्कृति की गहराई इसका स्वर,
आत्मा की सच्चाई करती प्रखर।

गंगा-सी निर्मल इसकी धारा,
बोलचाल में है अपनापन सारा।

अक्षरों में झलकती है मधुरता,
शब्दों में समाई है सच्ची सरलता।

कबीर, तुलसी, सूर की वाणी,
हिंदी में पाई अपनी कहानी।

लोकगीतों का है अनुपम रंग,
हर बोली में झंकारे उमंग।

शिवानी, प्रेमचंद की लेखनी,
हिंदी से पाई विश्व में गिनती।

यथार्थ और भावों का संगम,
हिंदी है विश्वास का आलम।

नयी सोच को देती आधार,
हिंदी है जीवन का सुंदर आकार।

धरती की गोद से निकली ये भाषा,
मानवता की है सच्चा परिभाषा।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor