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Friday, January 23, 2026, 8:07 am

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चन्द्र सिंह बिरकाळी प्रकृति चित्रण के अमर चित्तेरे थे : कमल रंगा

राखी पुरोहित. बीकानेर
8302316074 rakhipurohit@gmail.com
राजस्थानी पुरोधा-अमर कवि चन्द्र सिंह बिरकाळी आधुनिक राजस्थानी भाषा के महान साहित्यकार एवं प्रकृति काव्य के अमर चित्तेरे थे। यह उदï्गार आज प्रात: नत्थूसर गेट बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में कवि चन्द्र सिंह बिरकाळी की 33वीं पुण्यतिथि पर आयोजित दो दिवसीय ‘ओळू’ के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्याकार कमल रंगा ने व्यक्त किए।
रंगा ने कहा कि चन्द्रसिंह बिरकाळी की काव्य साधना अपने आप में महत्वपूर्ण रही है। क्योंकि आपने रूढि़बद्ध, स्थूल और सप्रयास होने वाले रूपक के बंधन से मुक्त होकर कहन की सहजता को बल दिया। साथ ही आपने पारम्परिक छंद में अनुभूतियों को गहरी एवं सूक्ष्म रूप में प्रयोग कर छंद विधान में नई संभावनाएं निकाली।
इस अवसर पर अपनी शब्दाजंलि अर्पित करते हुए कवि गिरीराज पारीक ने उन्हें लोक मन का कवि बताते हुए राजस्थानी प्रकृति चित्रण का महान रचनाकार बताया। संस्कृतिकर्मी हरिनारायण आचार्य ने उनकी रचना ‘बादळी’ के कुछ अंश का वाचन किया। इसी क्रम में वरिष्ठ शिक्षाविद राजेश रंगा ने उन्हें मरुधरा का सच्चा सपूत बताते हुए उनकी काव्य साधना पर बात की एवं उनकी काव्य रचना ‘लू’ का अंश वाचन भी किया। इस अवसर पर सहभागी रहे कई युवा पीढ़ी के राजस्थानी समर्थकों से अपनी बात कहते हुए युवा साहित्यकार गंगाबिशन बिश्नोई ने कहा कि ऐसे अवसरों के माध्यम से ही नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य के गौरवपूर्ण इतिहास से रूबरू होती है। चन्द्रसिंह बिरकाळी की पुण्यतिथि पर आयोजित दो दिवसीय ‘ओळू’ कार्यक्रम के तहत प्रथम दिन युवा पीढ़ी के अनेक राजस्थानी समर्थकों ने बिरकाळी की कविताओं का मूल राजस्थानी एवं हिन्दी अनुवाद का वाचन कर सभी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षाविद भवानी सिंह ने कहा कि चन्द्रसिंह बिरकाळी की भाषा साहित्य साधना युवा पीढ़ी की प्रेरणा पुंज है। सभी का आभार संस्कृतिकर्मी अशोक शर्मा ने ज्ञापित किया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor