विभिन्न विशेषज्ञों के इनपुट के आधार पर यह आलेख तैयार किया गया है, शिलाजित आयुर्वेद का वरदान है। आयुर्वेद में तो यहां तक कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में एक किलो शिलाजीत का सेवन कर लेता है वो अकाल मृत्यु से बच सकता है- पढिए़ पूरी रिपोर्ट-
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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शिलाजित। धरती का मद्य। मद्य यानी नशा। इसे अमृत भी कह सकते हैं। यह धरती में कुछ जगह ही रिसती है। रिसने के बाद पत्थरों और मिट्टी से लिपट कर यह डली का रूप धारण कर लेती है। डॉ. दीपक कुमार अक्सर अपने इंटरव्यू में यह बात कहते हैं कि शिलाजित आयुर्वेद का वरदान है और बॉडी के सभी ऑर्गन एक्टिव रखने का अगर किसी में गुण है तो वह शिलाजित है। पेट के कीड़े निकालने में भी शिलाजित महत्वपूर्ण औषधि है। आयुर्वेद के चार स्तंभ है- त्रिफला, त्रिकुटा, कजली और शिलाजित…। जब किसी बीमारी में कोई भी दवा कारगर सिद्ध ना हो तो शिलाजित एक मात्र ऐसी औषधि है जो विधिपूर्वक सेवन करने से अपना असर अवश्य दिखाती है।
आयुर्वेदाचार्य स्व. ज्येष्ठमल व्यास की पांडुलिपियों का अवलोकन करते हैं तो उनके अनुसार- शिलाजित का अगर नियमपूर्वक सेवन किया जाए तो शरीर के जीर्ण रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र के निर्माण में फायदा होता है। यही नहीं ओज का निर्माण भी होता है। चेहरे पर कांति बढ़ जाती है। व्यक्ति को फिर से जवान करने में शिलाजित महत्वपूर्ण औषधि है। कहा भी गया है कि जो व्यक्ति जीवन में एक किलो शिलाजित का सेवन कर लेता है वह अकाल मृत्यु से बच सकता है।
केवल सेक्स रोगों में ही उपयोगी नहीं, कुछ फार्मा कंपनियों ने इसे बदनाम कर दिया
अक्सर शिलाजित की बात आती है तो लोग इस विषय पर बोलना भी पसंद नहीं करते। क्योंकि कई फार्मा कंपनियों ने सेक्स रोगों में शिलाजित को इतना भुना दिया है कि अब शिलाजित सेक्स का ही पर्याय मान लिया गया है, जबकि ऐसा नहीं है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसी बीमारी हो जिसमें शिलाजित उपयोगी और फायदेमंद ना हो। यह आयुर्वेद का वरदान है और कई बीमारियों की रामबाण औषधि है।
पाकिस्तान की शिलाजित सबसे अच्छी : चाइना की सबसे कम असरदायक
डॉ. दीपक कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में बताया है कि पाकिस्तान की शिलाजित सबसे अच्छी होती है। इसकी रिकवरी रेट 15 प्रतिशत होती है। इसके बाद नेपाल, कुमायूं और चाइना की होती है। चाइना की शिलाजित बाजार में सबसे अधिक बिकती है, मगर इसका असर कम फायदेमंद होता है।
चोट में फायदा, टूटी हड्डी जोड़ने में रामबाण औषधि :
अगर किसी व्यक्ति की हड्डी टूट जाए तो शिलाजित फायदेमंद होती है। हालांकि हड्डी जुड़ती अपने हिसाब से ही है, मगर यदि किसी व्यक्ति के प्लास्तर बंधा हो और उसे 40 दिन बाद डाॅक्टर खोलने को कहें और उस व्यक्ति को एक दो बूंद शिलाजित दूध के साथ नियमित दी जाए तो प्लास्तर 30 दिन में ही खुल सकता है। यही नहीं चोट में भी यदी शिलाजित का लैप लगाया जाए तो फायदा हो सकता है। यही नहीं अगर एक-दो बूंद दूध के साथ शिलाजित दी जाए तो कैसी भी चोट लगी हो फायदा हो सकता है।
बिना दूध शिलाजित का फायदा नहीं, तासीर गर्म इसलिए सर्दियों में सेवन की सलाह
शिलाजित की तासीर गर्म होती है। इसे पचाने की ताकत केवल दूध में ही होती है। बिना दूध के सेवन के शिलाजित का सेवन नहीं करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार 1 बूंद से 10 ग्राम शिलाजित दूध के साथ शुरुआत में लेनी चाहिए। फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ानी चाहिए। शिलाजित का सेवन डॉक्टरों के निर्देशन में लेना ही उचित होता है। शिलाजित का सेवन करते समय शाम को या रात को एक गिलास दूध अवश्य पीना चाहिए, तभी इसका पूरा फायदा मिल सकता है।
किन-किन बीमारियों में शिलाजित फायदेमंद :
1-सभी ऑर्गन को एक्टिव रखता है शिलाजित।
2-मशल्स वीक हो तो रामबाण।
3-मस्क्यूलर डिस्ट्राफी बीमारी में लाभकारी।
4-बॉडी के सेल्स को व्यवस्थित रखता है।
5-थकावट दूर कर जीवन में ऊर्जा भरता है।
6-पिंडलियों के दर्द को दूर कर उत्साह का संचार करता है।
7-ब्लड प्रेशर की बीमारी दूर करता है।
8-पेट के कीड़े निकालने में मदद करता है।
9-अर्थराइटिस में विशेष लाभकारी।
10-किडनी और लिवर की बीमारी से बचाव में मदद करता है।
11-मूत्र संबंधी विकार दूर करता है।
12-पेट साफ रखता है।
शिलाजित का सेवन करते समय इन चीजों का परहेज रखें :
1-चाय, काफी, शराब, लाल मिर्च, बैंगन, खटाई, गुड।
शिलाजित असली और नकली की पहचान कैसे करें ?
शहद, घी और शिलाजित असली है या नकली है इसकी परख वही कर सकते हैं जो रात दिन इसका उपयोग करते हैं। अक्सर तार में खींची जाने वाली शिलाजित नकली होती है और जो स्वाद में कड़वी होती है वह असली होने की पहचान है। कई बार लोग पके हुए गुड़ में तैयार की गई शिलाजित दिखाते हैं जिसके सेवन के बाद लास्ट में मीठापन लगता है, वह नकली होती है।
शोधन विधि :
शिलाजित के शोधन की अनेक विधिया हैं। सबसे पहले शिलाजित को घोट लें। फिर चार गुना त्रिफला के काढ़े के साथ भिगो दें। फिर उसे हल्की आंच पर उबाल कर रख लें। दो तीन दिन चला लें। फिर दो तीन दिन छोड़ दें। बाद में जब मिट्टी बैठने लगे तो ऊपर से रूई की बत्ती लगा लें या धीरे-धीरे निथार लें। फिर हल्की आंच पर पकावें। पकाने की दो विधियां हैं-
अग्नि : अग्नि पर हल्की आंच पर पका सकते हैं।
सूर्यतापी : शिलाजित के पानी को छत पर वहां रखें जहां सूर्य की किरणें पड़ती हों। बर्तन के ऊपर कपड़ा या कांच का ढक्कन रख दें। बाद में जब कुछ दिनों बाद जब बर्तन में मलाई जमने लगे तो उसे अलग कर लें। सूर्यतापी से तपाई शिलाजित अधिक श्रेष्ठ रहती है। इसमें गुण अधिक होते हैं। गौ मूत्र में भी शिलाजित का शोधन किया जा सकता है, लेकिन गौ देसी होनी चाहिए। बछिया का मूत्र अधिक उपयोगी रहता है।
सड़क किनारे बेचने वाले अक्सर नकली शिलाजित रखते हैं
सड़क किनारे झोलाछाप वैद्य अक्सर शिलाजित सस्ती दर पर बेचते हैं। इस भ्रम में ना रहें। क्योंकि आपके साथ धोखा हो सकता है। सड़क किनारे बेचने वाले अक्सर निकली शिलाजित बेचते हैं। शिलाजित खरीदते समय उसकी अच्छी तरह पहचान करें। संभव हो तो प्रमाणित फार्मेसी की शिलाजित ही लें या आपके विश्वास पात्र व्यक्ति से ही शिलाजित खरीदें।










