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Thursday, July 9, 2026, 5:52 pm

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10-20 रुपए का रिजका सड़कों पर गायों को फेंककर…दुर्घटनाओं का न्यौता दे रहे दानदाता, यह कैसा पुण्य? हाईकोर्ट के आदेश पर भी नगर निगम मौन, कौन करेगा कार्रवाई?

राइजिंग भास्कर मुहिम : खुले में ना डाले चारा, सुरक्षित हो यातायात, ना हो कोई हताहत

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

अस्पतालों के ट्रोमा सेंटरों में रोज दुर्घटनाओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जानते हैं क्यों? बीच सड़क पर लोग रिजका फेंक कर पुण्य कमाने की होड़ में है और हादसे बढ़ रहे हैं। जिन गायों को चारा डालकर लोग पुण्य अर्जित कर रहे हैं, एक्सीडेंट में न केवल गाय मर रही है वरन दुर्घटनाओं में लोग भी घायल हो रहे हैं। पिछले एक महीने में सैकड़ों कैसेज सामने आ चुके हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता केवलचंद कोठारी इन दानदाताओं के कृत्य से काफी व्यथित हैं। कोठारी का कहना है कि दानदाताओं को चाहिए कि रिजका और चारा गौशालाओं में भिजवाएं या अपने निर्देशन में गौशालाओं में जाकर खिलाएं। मगर रोज सुबह-सुबह शहर के विभिन्न स्थानों पर नजारे आम हो गए हैं कि आवारा गौधन रिजका खाते नजर आते हैं। ऐसे में कई बार ये गौधन आपस में झगड़ते हुए सड़कों पर दौड़ते हैं और वाहनों के आगे आ जाते हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही है।

गौधन भी मर रहा और एक्सीडेंट में लोग घायल हो रहे

सस्ता पुण्य कमाने के चक्कर में गौधन भी मर रहा है और एक्सीडेंट में लोगों की जान पर भी बन आती है। शहर भर में सुबह-सुबह ऐसे नजारे रोज देखे जा सकते हैं। सड़क किनारे फुटपाथ पर रिजका बेचकर रोजगार अर्जित करने वाले भी बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि कई रिजका बेचने वाले अपने आस-पास जालीदार ट्रंक रखते हैं जिसमें लोग रिजका खरीदकर गौशाला में भिजवाने के लिए उस ट्रंक में डाल सकते हैं। मगर अधिकतर लोग सुबह-सुबह टहलने निकलते हैं और वे दस-बीस रुपए का रिजका खरीकर अपने हाथों से गायों को खिलाने के चक्कर में बीच सड़क पर या डिवाइर पर डाल देते हैं। आवारा गौधन और भैंसे उसे खाने के लिए लड़ते हैं और कई बार बीच सड़क पर अव्यवस्था और अराजगता फैल जाती है। ऐसे में वाहन चालकों का बैलेंस बिगड़ जाता है और हादसे हो जाते हैं।

भास्कर ओपिनियन : पुण्य अर्जित करें, मगर पाप के भागीदार भी ना बनें : 

भास्कर की राय है कि लोगों को अधिक से अधिक पुण्य अर्जित करना चाहिए। यह अच्छी बात है कि लोगों में गौधन को लेकर चेतना जागृत हो रही है। भामाशाहों को चाहिए कि आवारा पशुओं के प्रति यदि अधिक ही प्रेम है तो गौशालाओं में राशि दान दीजिए ताकि वे अपनी क्षमता बढ़ाकर अधिक से अधिक आवारा पशुओं को संरक्षित कर सकें। इससे आवारा गौधन सड़कों पर नहीं घूमेंगे। अगर किसी मालिक के गौधन सड़कों पर आवारा घूमते हैं तो नगर निगम को सख्त कार्रवाई कर उन गौधन को गौशालाओं में भिजवाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अगर मालिक फिर भी ना मानें तो उनके खिलाफ जुर्माना लगाना चाहिए। नगर निगम को आवारा गौधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। देश-दुनिया की आंखों का नूर बना और विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित जोधपुर जैसे शहर में आवारा पशुओं का इस तरह घूमना और आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बनना चिंताजनक है। प्रशासन को चाहिए कि इस दिशा में सख्त कदम उठाएं और बिना वजह जो आए दिन सड़कों पर एक्सीडेंट हो रहे हैं, उन पर रोक लग सकें।

हाईकोर्ट आदेश की पालना नहीं करवा पा रहा? अफसर खुद आवारा सांड़ हुए : 

हकीकत यह है कि बार-बार हाईकोर्ट नगर निगम, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर को आदेश देकर आवारा पशुओं के सड़कों पर विचरण पर रोक लगाने के आदेश जारी कर चुका है। मगर संकट यह है कि हाईकोर्ट अपने ही आदेश की पालना नहीं करवा पा रहा है। कहने को शहर की सड़कों पर आवारा पशु और सांड खुले घूम रहे हैं। मगर हकीकत यह है कि अफसर खुद आवारा सांड हो गए हैं। माफ करना हम इस भाषा का उपयोग कर रहे हैं। मगर जब तक उनके भीतर के पौरुष को जगाया नहीं जाएगा, वे कार्रवाई नहीं करेंगे। इसलिए हमें ऐसी तल्ख भाषा का उपयोग करना पड़ रहा है। शहर में प्रशासन को चाहिए कि सुबह-सुबह सफाई कर्मियों और नगर निगम के इंस्पेक्टर को चाहिए कि जहां कहीं पर दानदाता खुले में रिजगा डालते पाएं…पहली बात रिजगा खुले में डालने ना दें। फिर भी ना मानें तो ऐसे दानदाताओं के खिलाफ जुर्माना लगाएं…। किसी बेकसूर जानवरों और आम इंसानों की जान से बढ़कर हमें ऐसे पुण्य की जरूरत नहीं है। ऐसा पुण्य किस काम का जो किसी निर्दोष की जान ही ले ले। शहरवासियों को यह रिपोर्ट पढ़कर गुस्सा भी आ सकता है। मगर धैर्य से सोचें और विचार करें कि क्या पुण्य के चक्कर में किसी निर्दोष प्राणी की जान पर बन आए तो क्या वह पुण्य कभी फलिभूत होगा?

जिम्मेदार नागरिक बनें…जिम्मेदार प्रशासन बनें…न्याय की गरिमा भी बनाएं रखें  

जिम्मेदारों से अपेक्षा की जाती है कि वे खुले में रिजका ना डालकर जिम्मेदार नागरिक बनें। प्रशासन को चाहिए कि जिम्मेदारी निभाकर आवारा पशुओं के खिलाफ कार्रवाई करवाएं और खुले में रिजका डालकर यातायात में बाधा पहुंचाने और दुर्घटनाओं को न्यौता देने की घटनाओं को रुकवाएं। हाईकोर्ट से अपेक्षा की जाती है कि न्याय की गरिमा बनाए रखने के लिए अपने आदेश की सख्ती से पालना करवाएं। …खम्मा घणी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor