राखी पुरोहित. जोधपुर
नेहरू पार्क में मध्य प्रदेश के मशहूर कवि आनंद जैन अकेला के सम्मान में “उड़ान” कला साहित्य मंच के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें शहर के अनेक रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं।
मेहमान कवि आनन्द जैन “अकेला”, (राष्ट्रीय महामंत्री समरस साहित्य संस्थान ) ने ज़ख्म भी है बहुत, दर्द भी कम नहीं, अश्क़ पीते रहो, मुस्कुराते रहो, फिसलन भरी हैं राहें चलना सम्भल सम्भल के तथा जुगनुओं की तरह टिमटिमाते रहो, तीरगी ज़िंदगी से मिटाते रहो ग़ज़लें तरन्नुम में सुना कर खूब दाद लूटी।
शायर खुर्शीद खैराड़ी ने उलझा है इक चराग मचलती हवा से आज, कवयित्री दीपा टाक ने ओ मेरी पूजा तेरे सिवा नहीं है मेरा दुनिया में दूजा, अशफाक फौजदार ने मै तुझसे करूं तकरार ना बाबा ना बाबा , शायरा डॉ संजीदा खानम शाहीन ने फिर से टूटा ख्वाब सजाकर देखूंगी, अपनी नींदें आप उड़ाकर देखूंगी, प्रशांत सोऊ ने हार सिर्फ एक अवसर है। अरुण जोशी मेरी आंखों में तू रहती है काजल की तरह तथा शायर मनशाह “नायक” ने “जैसे कि जून मिल गया हो जनवरी के साथ, “ऐसा ही कुछ हुआ मेरी जिंदगी के साथ” तरन्नुम में ग़ज़ल पेश कर शमा बांध दिया।










