– असहाय पशु-पक्षी केंद्र की संस्थापिका डॉ. रतना उन पशु-पक्षियों के अधिकार के लिए संघर्ष कर रही हैं और आवाज उठा रही हैं जो या तो जन्म से अंधे हैं या एक्सीडेंट में जिनकी रोशनी चली गई हैं। डॉ. रतना का एक विज्ञापन इन दिनों अखबारों में खूब चर्चित हो रहा है।
-इस विज्ञापन में वो सवाल उठाती हैं- भारत-पाक युद्ध के दौरान ब्लैकआउट में जब कुछ घंटे अंधेरे में हमारा रहना मुश्किल हो गया था तो जरा उन पशु-पक्षियों के बारे में सोचिए जो अंधत्व का दंश झेल रहे हैं और उन्हें गोशालाओं और संस्थाओं में झुंड में भोजन-पानी दिया जाता है। उन्हें एक साथ रखा जाता है। कैसे होता होगा उनका बसर? झुंड में भोजन-पानी, सटकर रहना और दृष्टिहीनता का अभिशाप…जरा सोचिए, किस दिशा में जा रही है हमारी मानवता…डॉ. रतना का यही है ऑपरेशन ब्लैक आउट…जो ऐसे पशु-पक्षियों के लिए करुण पुकार है…।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
मई 2025…। भारत-पाक युद्ध। ब्लैक आउट। रात भर लाइटें बंद। गर्मी और उमस। हाथ को हाथ नहीं दिख रहा। रोशनी भी नहीं कर सकते। रोशनी तो दूर टार्च तक नहीं जला सकते थे। ऐसे दौर में हमें पता चला कि अंधेरे में रहना कितना मुश्किल होता है। और जिनके जीवन में विधाता ने हमेशा के लिए अंधत्व का अभिशाप लिख दिया हो तो? यही वह मुद्दा है जिस पर इन दिनों असहाय पशु-पक्षी केंद्र की संस्थापिका डॉ. रतना का विज्ञापन अखबारों में वैचारिक क्रांति की अलख जगा रहा है। डॉ. रतना अपने विज्ञापन में लिखती हैं-
”अंधेरे में जब रहना मुश्किल हो जाता है। इंसान स्वयं इतना दुखी हो जाता है तो सोचो उन अंधे पशुओं पर क्या बीतती होगी, जिन्हें हम झुंड में भोजन-पानी देते हैं। वो केसे खाते होंगे? क्योंकि वे बैठ तो सकते ही नहीं, क्योंकि झुंड में इतने अधिक पशु होते हैं कि बैठने के लिए जगह ही नहीं होती। कैसे खाते होंगे? केसे पानी पीते होंगे? खाना-पानी तो छोड़ो वे कैसे आराम करते होंगे? वे बैठने की स्थिति में ही नहीं होते। ईश्वर ने उनकी रोशनी छीन ली और अब हम उन्हें यह सजा देते हैं कि जब तक जीयो दिन रात खड़े रहो।”
करुणा का भाव नहीं तो ईश्वर को क्या चेहरा दिखाएंगे?
डॉ. रतना लिखती हैं कि ऐसे पशु-पक्षियों के साथ ही इंसान दया और करुणा का व्यवहार नहीं करें तो कैसे हम भगवान को अपना चेहरा दिखा पाएंगे? डॉ. रतना शहरवासियों से अपील करतीं हैं कि इन ब्लैक आउट को भीतर तक फील करें और ऐसी स्थिति में जबकि कई पशु-पक्षियों के जीवन में हमेशा-हमेशा के लिए परमात्मा ने ब्लैक आउट लिख दिया है, उन्हें हम प्रेम से रखें। उनके साथ अच्छा व्यवहार करें। उन्हें सभी तरह की सुविधा उपलब्ध कराएं ताकि ऐसे पशु-पक्षियों के साथ मानवीय व्यवहार हो सकें।
दया, करुणा, मानवता, संवेदना शब्द बनकर रह गए, कैसे फैलेगा उजास?
डॉ. रतना लिखती है जब समाज में संवेदना नहीं होगी तो कैसे दया, करुणा और मानवता का उजास फैलेगा? आओ मनन करें। आओ मंथन करें। आओ चिंतन करें। जिन पशु-पक्षियों के जीवन में भगवान ने अंधेरा लिखा है उन्हें हम अच्छे से रखें। उन्हें समूह में ना रखें और अलग-अलग रखें। ताकि वे खा-पी आसानी से सकें। एक-दूसरे से सटकर रहेंगे तो उन्हें चोट लग सकती है। इसलिए उनके लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था करें ताकि उन्हें सुविधा हो। जगह चाहे उन्हें छोटी दें मगर दें जरूर ताकि वे परेशान ना हों और वे व्यथित ना हो। दूसरे जानवरों से भी उन्हें चोट लग सकती है, इसलिए उन्हें अलग-अलग रखा जाए। यह ऐसा समय है जब हमें खासकर अंधे पशु-पक्षियों के बारे में सजगता से निर्णय लेकर पुण्य अर्जन करना है। पशु-पक्षी हमारी लोक आस्था और विश्वास का केंद्र है। डॉ. रतना आशा जताती है कि समाज के कर्णधार विचार करेंगे और आशा है संवेदना जगाकर ऐसे निराश्रित पशु-पक्षियों जिनके भाग्य में विधाता ने हमेशा-हमेशा के लिए ब्लैक आउट लिख दिया है उन्हें हम राहत पहुंचाएंगे।
अगर आपको कहीं भी कोई अंधा पशु-पक्षी दिखे तो संपर्क करें-
डॉ. रतना, संस्थापिका
असहाय पशु-पक्षी केंद्र,
जोधपुर कैंट स्टेशन के सामने, गैस गोदाम के पास, बनाड़ रोड, जोधपुर।
मोबाइल नंबर : 8107870795





