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11 साल पहले दिव्यांगजनों के लिए बजट 338 करोड़ था, मोदी सरकार ने बढ़ाकर 1313 करोड़ किया : अमित शाह

 

 

रामराज्य नगर चौखा में पारसमल बोहरा स्मृति महाविद्यालय भवन का शिलान्यास किया

दिलीप कुमार पुरोहित. शिव वर्मा. सज्जन सिंह. जोधपुर 

रामराज्य नगर चौखा में पारसमल बोहरा स्मृति महाविद्यालय भवन का शिलान्यास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मुझे दिव्यांगों के संबंध में घोषणा करने के लिए कान में कहा गया। लेकिन हमारी सरकार का नियम है कि जो कुछ कहते हैं-वो हम करते हैं। यदि घोषणा करनी है तो हमारे मुख्यमंत्री और सांसद केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत करेंगे। अमित शाह ने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण का बजट 2014 में 338 करोड़ का था। नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे बढ़कर 1313 करोड़ तक पहुंचाने का काम किया। ढेर सारी सुविधाएं विकसित की।

‘मालूम नहीं था- इतने बड़े व्यक्तित्व से मिलने जा रहा हूं”

अमित शाह ने बताया 85 साल की उम्र में भी एक युवा की तरह सुशीला जी समाजसेवा का काम कर रही है। जब मुझे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और अनिल बोहरा निमंत्रण देने आए थे तब मालूम नहीं था कि इतने बड़े काम में शामिल होने जा रहा हूं। इतने बड़े व्यक्तित्व से मिलने जा रहा हूं। उन्होंने कहा दो दिन पहले कार्यक्रम की डिटेल देखी। सुशीला बोहरा के जीवन के सेवा कार्यों की जानकारी पढ़ी। तब मुझे मालूम पड़ा कि मैने बहुत देर कर दी। मुझे पहले ही आना चाहिए था। शाह ने कहा भारत के लोग ईश्वर में आस्था रखते हैं। कर्म को सिद्धांत के अनुसार मानते भी है। हमारे जीवन में सुख-दुख का नियंत्रण हमारे हाथ में ही होता है। एक तरह से कर्म के हाथ में बंधकर ईश्वर के हाथ की एक प्रक्रिया होती है। उन्होंने का व्यक्तिगत जीवन में यदि किसी पर अकल्पनीय दुख आ जाता है तब जीवन में निराशा, हताशा और कई बार बदले की भावना विश्व को अलग देखने का दृष्टिकोण आ खड़ा होता है। लेकिन जिनके शरीर में एक दिव्यपुंज दिव्य आत्मा रहती है। ईश्वर जब उनको दुख देता है तो वह दुख को अकल्पनीय ऊर्जा में बदलकर दुखियों को जीवन में दुख दूर करने का आधार बनते हैं।

अमित शाह ने सुशीला बोहरा की तारीफ करते हुए कहा युवा अवस्था में ही पति खोने के बाद जो ईश्वर ने उन्हें दुख सौंपा। उसी दुख से ज्योत जलाकर लाखों लोगों के जीवन में उजियारा काम करने का काम किया है।

35 अंतरराष्ट्रीय, 55 घरेलू हवाई अड्‌डों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाया : 

अमित शाह ने कहा कि 35 अंतरराष्ट्रीय, 55 घरेलू हवाई अड्‌डों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाने का काम किया। दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग देने के मामले में सरकार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। पहले 75 साल में सिर्फ 7 लाख लोगों को भारत सरकार ने कृत्रिम अंग दिए थे।

मेरे जन्म से पहले सुशीला बोहरा ने सेवा कार्य शुरू किया :

अमित शाह ने कहा कई लोग सोचेंगे कि उनके साठ साल सेवा के जीवन में कितने बच्चों को जीवन उजागर किया। कितने लोगों को सहारा दिया। बात यह नहीं है। जब एक व्यक्ति अपने जीवन में किसी सेवा कार्य को जोड़ता है तो वो कई लोगों को प्रेरित करता है। मेरे जन्म के पहले उन्होंने सेवा कार्य शुरू कर दिया। इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने सैकड़ों दृष्टिबाधितों के जीवन में जान और दृष्टि का प्रसाद दिया है।

दिव्यांगजनों के लिए चुनौतियां कम नहीं :

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा- हमारे समाज में दिव्यांगजनों के लिए चुनौतियां कम नहीं है। उसको दूर करने के लिए हमें बहुत कुछ करना बाकी है, लेकिन इस प्रकार के जो प्रयास होता है इससे ढेर सारा परिवर्तन होता है। निश्चित ही हम एक दिन दिव्यांग लोगों के लिए एक अच्छा कॅरिअर और अच्छा जीवन सुनिश्चित कर पाएंगे। जब समाज में दिव्यांगों को दया की जगह दिव्यांगता का प्रतीक मानने की शुरुआत होती हे, तब सार्थक कार्य होता है। अमित शाह ने कहा- ईश्वर किसी को भी कुछ नहीं देता तो उसको सर्वाइव करने के लिए कुछ विशेष देता है। वह चीज दिव्य होती है। उस दिव्य चीज को ढूंढ़ना और इसके आधार पर दिव्यांग अपना जीवन राष्ट्र निर्माण में जोड़ सकें। अपने जीवन को भी आगे बढ़ा सकें। ऐसी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी समाज की है।

पैरालिंपिक देवेंद्र झांझडिया को जिक्र किया :

अमित शाह ने राजस्थान के पैरालिंपिक देवेंद्र झांझडिया का जिक्र करते हुए कहा- खिलाड़ी जिसकी मां तक के गहने बिक जाते हैं, लेकिन बाद में देश के लिए एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाता है। पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर आता है। तब देश का तिरंगा एक दिव्यांग लहराता है। उन्होंने कहा- नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी दिव्यांगजनों के अंदर खेलने के कौशल को बढ़ाने का प्लेटफॉर्म दिया है। झांझडिया जैसे कई खिलाड़ी देश के लिए दो दो ओलिंपिक लेकर आए हैं।

तीन पैरालिंपिक खेलों में 52 पदक जीते :

अमित शाह ने बताया- पैरालिंपिक की विश्व में शुरुआत 1960 में हुई। तब से लेकर 2012 तक जितने भी पैरालिंपिक खेल हुए हैं उसमें भारत को केवल 8 पदक मिले थे। पिछले 3 पैरालिंपिक खेलों में भारत 52 पदक जीतकर खिलाड़ियों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा- समाज, सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं तीनों मिलकर यदि दिव्यांगजनों के लिए काम करे तो कुछ भी असंभव नहीं है। पैरालिंपिक में 52 पदक जीतना यह बताता है कि हमारे दिव्यांगजन कुछ भी कर सकते हैं। इनके लिए सबकुछ संभव है। वो कलेक्टर से लेकर डॉक्टर, अच्छे से अच्छे अपने उद्योग की शुरुआत भी कर सकते हैं। लेकिन जरूरत है उनका हाथ थामने की। उन्होंने कहा कि लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से महाविद्यालय में 3 नवीन भवनों का शिलान्यास हुआ है और उन्हें आशा है कि इनका निर्माण कार्य समय से पूर्ण होगा, जिससे दिव्यांग बच्चों के जीवन में उम्मीद का उजियारा आएगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्रीमती सुशीला बोहरा ने 5 विद्यालय, 2 महाविद्यालय और निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, भोजन और जरुरतमंदों को ऑडियो बुक्स, रिकॉर्ड लेक्चर्स, ब्रेल प्रिंटिंग प्रेस, स्क्रीन रीडर, कम्प्यूटर लैब तथा पुस्तकालय के माध्यम से सैकड़ों दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन में ज्ञान और दृष्टि का प्रकाश प्रसारित किया है। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि यहां के बच्चे सरकारी बैकिंग व निजी क्षेत्र में काम कर रहे हैं और सर्वोच्च न्यायालय में वकालत भी कर रहे हैं।

सामाजिक सेवा के कार्यों में सभी दें अपना योगदान

शाह ने कहा कि समाज के सामने अनेक चुनौतियां हैं, विशेषकर दिव्यांग नागरिक, दिव्यांग बच्चे और दिव्यांग माताओं के जीवन में समस्याओं को दूर करने के लिए अनेक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा के जो कार्य होते हैं और उसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लोग जब योगदान देते हैं तब परिवर्तन आता है। इस तरह के योगदान से देश के दिव्यांग बच्चों के लिए अच्छा जीवन और कैरियर की सुनिश्चितता की जा सकती है।

प्रधानमंत्री ने विकलांग की जगह किया दिव्यांग शब्द का प्रारम्भ

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्री पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय राजस्थान का प्रमुख नेत्रहीन महाविद्यालय है। उन्होंने कहा कि जब समाज में दिव्यांगों को दया की जगह दिव्यता का प्रतीक मानने की शुरूआत होती है। तब सही अर्थों में दिव्यांगजनों के लिए काम होता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में पहली बार पूरे देश में विकलांग शब्द की जगह दिव्यांग शब्द का प्रयोग करना प्रारम्भ किया। प्रधानमंत्री के इस फैसले से देश के लोगों और सभी राज्य सरकारों का दिव्यांगजनों के प्रति देखने का नजरियां बदला।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्णय स्वर्ण अक्षरों में अंकित – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसे अनेक निर्णय लिए हैं, जो इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हुए हैं, साथ ही उन पर हर भारतवासी को गर्व भी होता है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने, आतंकवाद पर अंकुश लगाने और जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने का श्रेय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह को भी जाता है।

तीन ऐतिहासिक कानून आपराधिक न्याय प्रणाली बदलने में महत्वपूर्ण

शर्मा ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रूप में तीन ऐतिहासिक कानून लाकर भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीएए कानून लाकर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया है।

नवीन भवन दिव्यांग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की रखेंगे नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कर कमलों से श्री पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय में नए भवनों का शिलान्यास हम सब के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भवन (मोतीलाल ओसवाल ज्ञानदीप भवन), गर्ल्स हॉस्टल (मोतीलाल ओसवाल ज्योति सदन) और बॉयज हॉस्टल (एच जी फाउंडेशन दिव्य ज्योति भवन) की नींव रखी गई है। ये भवन दिव्यांग बालक-बालिकओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेंगे, उनके लिए शिक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के नए द्वार खोलेंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान ने अब तक 4 हजार 626 नेत्रहीन, मूक-बधिर और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिव्यांगजनों के लिए बेहद संवेदनशील

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिव्यांगजनों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, इसलिए इनके जीवन को आसान बनाने के लिए सबसे पहले ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द को प्रचलित करने का फैसला लिया। ये सिर्फ शब्द का परिवर्तन नहीं था, इसने समाज में दिव्यांगजनों की गरिमा भी बढ़ाई और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम भी इसी भाव से लागू किया। उन्होंने कहा कि ये कानून दिव्यांगजनों के सशक्त जीवन का माध्यम बन रहा है और इससे दिव्यांगजनों के प्रति समाज की धारणा भी बदली है। साथ ही, आज दिव्यांग साथी भी विकसित भारत के निर्माण के लिए अपनी संपूर्ण शक्ति के साथ काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का भी यही ध्येय है कि दिव्यांग भाई-बहनों का जीवन सरल, सहज और स्वाभिमानी हो। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हम सब मिलकर एक ऐसा राजस्थान बनाएं, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले, जहां शिक्षा और स्वावलंबन से हर जीवन रोशन हो और जहां दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सामर्थ्य की प्रतीक बने।

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि श्री पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय में नवीन भवनों के निर्माण की नींव रखी गई है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को सहारा, संबल और क्षमताओं में संवर्द्धन की आवश्यकता है। दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान को जागृत करते हुए स्वावलंबन की दिशा में उन्हें आगे ले जाने के लिए महाविद्यालय में शिक्षा से संबंधित बनने वाले नवीन भवन महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि जोधपुर सदियों से करुणा और संस्कृति की प्रमुख राजधानी रहा है। यहां के लोग अपनी व्यक्तिगत भावनाओं से प्रेरित होकर समाज के जरुरतमंद लोगों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

”मैं न थकी न हारी” पुस्तक का विमोचन

इससे पहले केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने नेत्रहीन विकास संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती सुशीला बोहरा की जीवनी ‘मैं न थकी न हारी‘ पुस्तक के ब्रेल लिपी संस्करण का विमोचन किया। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में भामाशाहों का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय संदीप मेहता, विजय विश्नोई, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई, श्रीमती सुशीला बोहरा, अनिल बोहरा, भामाशाह मोतीलाल ओसवाल, विजेन्द्र सिंह चौधरी, श्रीमती प्रियंका सिंह सहित गणमान्यजन व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor