Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 5:55 am

Thursday, July 9, 2026, 5:55 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

संस्कृति की जड़ों को पोषित करने का अनुष्ठान… ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ पुष्कर न्यास : वैदिक शिक्षा का पुनर्जागरण केंद्र

 

राजस्थान का प्रथम वेद विद्यापीठ : भारतीय संस्कृति की आत्मा को पुनर्जीवित करने का संकल्प  

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। इस संस्कृति की जड़ें वेदों में निहित हैं। वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की संपूर्ण दिशा और दशा के मार्गदर्शक हैं। समय के प्रवाह में जहां अनेक विद्याएं, परंपराएं और जीवन मूल्य विलुप्त हो गए या धुंधले पड़ गए, वहीं आज भी कुछ संस्थाएं ऐसे पवित्र कार्य में संलग्न हैं जो भारतीय संस्कृति की आत्मा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिए हुए हैं। इन्हीं में से एक है ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ पुष्कर न्यास, जो राजस्थान की प्रथम वेद विद्यापीठ के रूप में विख्यात है।

इस संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य केवल वेदाध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में उच्च मूल्यों की स्थापना करना और आने वाली पीढ़ी को वैदिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा से भी जोड़ना है। यह प्रयास भारत को उसकी जड़ों से जोड़ते हुए उसे आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप दिशा देने वाला है।

स्थापना और प्रेरणा

इस वेद विद्यापीठ की नींव बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर, दिनांक 28 जनवरी 2001 को अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर, राजस्थान में रखी गई। इसे प्रारंभ में “महेश वेद अध्ययन केंद्र” के रूप में स्थापित किया गया। इस संस्थान के पीछे दो प्रमुख प्रेरणाएं रहीं—

  1. पूज्य स्वामी श्री गोविंददेव गिरीजी महाराज (कोषाध्यक्ष, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) की पावन प्रेरणा।

  2. महर्षि वेद व्यास प्रतिष्ठान, पुणे का सहयोग और मार्गदर्शन।

यही दोनों शक्तियां इस संस्था के लिए आधारस्तंभ बनीं। उद्देश्य था— वैदिक विद्याओं को फिर से समाज के केंद्र में लाना और उसे केवल धार्मिक परिधि में न बांधकर शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान और मानव जीवन के संपूर्ण विकास से जोड़ना।

परिसर और व्यवस्था

ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ का परिसर अपनी भव्यता और व्यवस्था के लिए विशिष्ट है।

  • 10 बीघा भूमि में फैला यह संस्थान केवल एक शैक्षिक केंद्र ही नहीं, बल्कि एक आधुनिक गुरुकुल है।

  • यहां 150 छात्रों के लिए कक्षाएं, विद्यालय भवन एवं छात्रावास की व्यवस्था है।

  • आचार्यों के लिए 12 निवास भवन निर्मित हैं, जिससे वे सदा छात्रों के मार्गदर्शन में उपलब्ध रहें।

  • यजमान परिवारों के लिए 36 एसी कमरे सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं।

  • वर्तमान में लगभग 100 छात्र यहां वेदाध्ययन में संलग्न हैं।

यहां छात्रों को केवल वेद शिक्षा ही नहीं, बल्कि भोजन, आवास और संपूर्ण जीवन व्यवस्था निशुल्क प्रदान की जाती है। व्यवस्था पूरी तरह गुरुकुल पद्धति पर आधारित है।

शिक्षण पद्धति

संस्थान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इसकी शिक्षण पद्धति। जहां अन्य वेद संस्थान केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रहते हैं, वहीं यहां संतुलन पर जोर है।

  • वेद अध्ययन : यहां परंपरागत रूप से वैदिक शिक्षा दी जाती है। विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का यह उपक्रम है।

  • षडंग (व्याकरण, छंद, निरुक्त, कल्प, ज्योतिष, शिक्षा) का गहन अध्ययन।

  • आधुनिक विषय : अंग्रेजी, कंप्यूटर, गणित और विज्ञान की शिक्षा भी अनिवार्य।

  • चरित्र निर्माण : छात्रों को अनुशासन, स्वावलंबन, समाजसेवा और नैतिक जीवन के संस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि छात्र केवल पंडित या पुरोहित न बनकर संपूर्ण व्यक्तित्व के धनी नागरिक बनें।

संस्थान की गतिविधियां और अनुष्ठान

संस्थान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां विभिन्न धार्मिक और वैदिक अनुष्ठान भी सम्पन्न होते हैं।

  • षडंग रुद्राभिषेक (₹11,000)

  • लघु रुद्राभिषेक (₹15,000)

  • अन्नक्षेत्र सहयोग – छात्रों के लिए एक समय के भोजन हेतु सहभागिता (₹15,000)

  • विद्यार्थी दत्तक योजना

    • एक वर्ष के लिए (₹21,000)

    • पूरे सात वर्ष के लिए (₹1,47,000)

  • महारुद्राभिषेक (₹36,000)

  • साथ ही, महामृत्युंजय जाप, ग्रह शांति और अन्य वैदिक हवन भी करवाए जाते हैं।

ये अनुष्ठान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनसे प्राप्त धनराशि छात्रों की शिक्षा और संस्थान की व्यवस्था में उपयोग की जाती है।

आर्थिक पारदर्शिता और सहभागिता

संस्थान की एक विशेषता यह भी है कि यहां दिए गए दान पर आयकर अधिनियम की धारा 80जी के अंतर्गत छूट मिलती है। इससे दानदाताओं को कर लाभ के साथ पुण्य और समाजसेवा का अवसर मिलता है।

कार्यकारिणी और संचालन

(अध्यक्ष : आनंद राठी। )

संस्थान का संचालन एक सुव्यवस्थित कार्यकारिणी मंडल द्वारा किया जाता है।

  • संरक्षक : पद्मश्री श्री रामेश्वरलाल काबरा

  • अध्यक्ष : आनंद राठी

  • उपाध्यक्ष : राम अवतार जाजू

  • सचिव : संदीप झंवर

  • कोषाध्यक्ष : अशोक कालानी

  • सह सचिव : अरुण अग्रवाल

  • अन्य न्यासीगण : विनीत सर्राफ, भंवरलाल सोनी, त्रिभुवन काबरा, अशोक सोनी, मनोज लड्‌ढ़ा, कैलाश बियानी, ज्योति माहेश्वरी, गोविंद माहेश्वरी, रामरतन भूतड़ा, नवनीत सोमानी, अजीत अग्रवाल।

संपर्क सूत्र : श्री कृष्ण कुमार त्रिवेदी (मो. 9414000689)

यह टीम सुनिश्चित करती है कि संस्थान का संचालन पारदर्शी, अनुशासित और दूरदर्शी तरीके से हो।

वैदिक शिक्षा की आज की प्रासंगिकता

आज की पीढ़ी आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। परिणामस्वरूप जीवन मूल्यों में गिरावट, तनाव, परिवार टूटन और सामाजिक असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे में वेद शिक्षा केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर जीवन को संतुलित बनाने का मार्ग दिखाती है।

  • विज्ञान और वेद : वेदों में गणित, खगोल, चिकित्सा और भौतिकी का आधारभूत ज्ञान निहित है।

  • नैतिकता और जीवन मूल्य : वेद बताते हैं कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही मानव जीवन के चार स्तंभ हैं।

  • समाज कल्याण : वेद शिक्षा से छात्र समाजसेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में संलग्न होते हैं।

ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ का योगदान इस दृष्टि से अमूल्य है।

संस्थान का महत्व

  1. राजस्थान की प्रथम वेद विद्यापीठ

  2. गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम।

  3. निशुल्क शिक्षा, भोजन और आवास की व्यवस्था।

  4. वैदिक अनुष्ठानों और यज्ञों का आयोजन।

  5. दानदाताओं के लिए पारदर्शी सहभागिता योजनाएं।

  6. भारतीय संस्कृति की जड़ों को पुनर्जीवित करने का केंद्र।

आधुनिक और वैदिक शिक्षा में संतुलन से देश के गौरव बढ़ाने का आंदोलन

ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ पुष्कर न्यास केवल एक संस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का आंदोलन है। यहां वेद शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा का संतुलन स्थापित कर भविष्य की पीढ़ी को जड़ों से जोड़ा जा रहा है।

संस्थान ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर सही दिशा, सही उद्देश्य और सही नेतृत्व मिले तो भारतीय संस्कृति की कोई भी विद्या लुप्त नहीं हो सकती। यह विद्यापीठ न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है।

आप अपनी राशि नीचे दी जा रही बैंक में सुविधानुसार जमा करवा सकते हैं :

ACCOUNT NAME : BRAHMA SAVITRI VED VIDHYA PEETH PUSHKAR

BANK & BRANCH : HDFC BANK, SHREE PLAZA LAL KOTHI, JAIPUR

ACCOUNT NUMBER : 59145914591459 

IFSC : HDFC0000644

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor