— एक प्रेरक संवाद : श्रीमती अर्चना बिड़ला, अध्यक्ष, भारत विकास परिषद (मुख्य शाखा)
23 अक्टूबर 1993 को अपनी सेवा यात्रा प्रारंभ की थी। 65 समर्पित सदस्यों के साथ शुरू हुआ यह संगठन आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी हर शाखा ‘सेवा, संस्कार और समरसता’ की छाया फैलाती है।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
समाजसेवा का अर्थ केवल सहायता देना नहीं, बल्कि उस भावना को जीना है जो दूसरों के जीवन में प्रकाश भर दे। ऐसी ही भावना से प्रेरित होकर भारत विकास परिषद (मुख्य शाखा) ने 23 अक्टूबर 1993 को अपनी सेवा यात्रा प्रारंभ की थी। 65 समर्पित सदस्यों के साथ शुरू हुआ यह संगठन आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी हर शाखा ‘सेवा, संस्कार और समरसता’ की छाया फैलाती है।
इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं — परिषद की ऊर्जावान और प्रेरक अध्यक्ष श्रीमती अर्चना बिड़ला। प्रस्तुत है उनसे हुई एक विशेष बातचीत —
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राइजिंग भास्कर: भारत विकास परिषद (मुख्य शाखा) की शुरुआत 1993 में हुई थी। इस तीन दशक लंबी यात्रा को आप कैसे देखती हैं?
अर्चना बिड़ला : यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि 23 अक्टूबर 1993 को 65 सदस्यों के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज समाज में एक मिसाल बन चुकी है। उस समय हमने एक ही संकल्प लिया था — “सेवा, संस्कार और समर्पण” को अपने जीवन का हिस्सा बनाना।
इन वर्षों में हर सदस्य ने तन, मन और व्यवहार से इस वटवृक्ष को सींचा है। कोई संपर्क में सहयोग देता है, कोई सेवा में, कोई संस्कारों के प्रचार में, तो कोई जरूरतमंदों की मदद में। यही टीम भावना हमें आगे बढ़ाती रही है।
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राइजिंग भास्कर : पौधरोपण और तुलसी पौधा वितरण जैसे पर्यावरणीय कार्य परिषद की पहचान बन चुके हैं। इनका उद्देश्य क्या है?
अर्चना बिड़ला : पर्यावरण की रक्षा आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। हम चाहते हैं कि समाज में हर व्यक्ति पेड़ लगाने और उनकी देखभाल को एक संस्कार के रूप में अपनाए। हम नियमित रूप से पौधरोपण अभियान चलाते हैं और तुलसी पौधे वितरण करते हैं, क्योंकि तुलसी हमारे भारतीय संस्कृति का प्रतीक है — वह शुद्धता, औषधीयता और आध्यात्मिकता का संदेश देती है। जब कोई परिवार तुलसी का पौधा घर में लगाता है, तो वह ‘हरियाली के साथ संस्कृति’ भी घर लाता है।
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राइजिंग भास्कर : परिषद ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई सराहनीय पहल की हैं। कृपया कुछ बताएं।
अर्चना बिड़ला : हां, स्वास्थ्य सेवा हमारे प्रमुख कार्यों में से एक है।
11 फरवरी 1995 को हमने मथुरादास माथुर अस्पताल में संस्था पटल शुरू किया था। इसके माध्यम से दवाइयां और ग्लूकोज की बोतलें लागत मूल्य पर उपलब्ध करवाई जाती हैं। इससे जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिली।
इसके बाद 27 मई 1997 को हमने महात्मा गांधी अस्पताल में रोगी वाहन सेवा शुरू की — एक मारुति वैन, जो आज भी मरीजों की मदद करती है।
इसके अतिरिक्त, परिषद ने एक डायग्नोस्टिक एवं रेडियोलॉजी केंद्र भी स्थापित किया है, जिससे कम लागत में जांच सुविधाएं मिलती हैं। यह सब समाज के सहयोग और हमारी टीम की निष्ठा से संभव हुआ।
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राइजिंग भास्कर : रक्तदान और स्वास्थ्य जांच शिविर परिषद की विशेषता रहे हैं। इनकी प्रेरणा क्या रही?
अर्चना बिड़ला : ‘रक्तदान — महादान’ केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संकल्प है।
हम नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं, जहां समाज के हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
इसके साथ ही हमने स्कूलों और कॉलोनियों में स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किए हैं ताकि बच्चों और नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े। यह हमारा प्रयास है कि स्वास्थ्य, सेवा और संस्कार एक साथ चलें।
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राइजिंग भास्कर : संस्कृति सप्ताह, समूह गान और भारत को जानो प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां परिषद के सांस्कृतिक पक्ष को दर्शाती हैं। इनका उद्देश्य क्या है?
अर्चना बिड़ला : हम मानते हैं कि संस्कृति ही समाज की आत्मा है।
परिषद हर वर्ष संस्कृति सप्ताह मनाती है, जिसमें भारतीय परंपराओं, लोककलाओं और नैतिक मूल्यों पर आधारित विभिन्न कार्यक्रम होते हैं।
राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता और ‘भारत को जानो’ प्रतियोगिता बच्चों में देशभक्ति, टीम भावना और भारतीय संस्कृति की समझ को गहरा करती हैं।
हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी तकनीक के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़ी रहे।
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राइजिंग भास्कर : गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुआ है। इस पहल के पीछे क्या भावना थी?
अर्चना बिड़ला : गुरु हमारे समाज की आधारशिला हैं। एक गुरु ही बच्चों को दिशा देता है।
हमने ‘गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन’ कार्यक्रम की शुरुआत इस विचार से की कि शिक्षकों के प्रति सम्मान और विद्यार्थियों के प्रति प्रोत्साहन दोनों साथ चलें।
इस कार्यक्रम के दौरान छात्र अपने गुरु का सम्मान करते हैं और गुरु अपने छात्रों का आशीर्वाद देते हैं — यह भारतीय संस्कारों का अद्भुत दृश्य होता है।
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राइजिंग भास्कर : संस्कार शिविरों का आयोजन परिषद की एक विशिष्ट पहचान है। इनका महत्व क्या है?
अर्चना बिड़ला : संस्कार शिविर हमारी आत्मा हैं।
इन शिविरों में बच्चों को नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सहानुभूति और राष्ट्रप्रेम का पाठ पढ़ाया जाता है।
हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी केवल शिक्षित नहीं, बल्कि संस्कारवान भी बने। यही भारत विकास परिषद का मूल उद्देश्य है।
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राइजिंग भास्कर : नेत्रदान और देहदान जैसे संवेदनशील अभियानों में परिषद की भूमिका उल्लेखनीय रही है। लोग इसमें कैसे जुड़ते हैं?
अर्चना बिड़ला : सच कहूं तो यह समाज की संवेदनशीलता का परिचायक है। हमने लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए हैं कि नेत्रदान से किसी दृष्टिहीन व्यक्ति को जीवन में प्रकाश मिल सकता है, और देहदान चिकित्सा शिक्षा में अनमोल योगदान है।
आज कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने हमारे प्रयासों से प्रेरित होकर यह संकल्प लिया है। यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।
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राइजिंग भास्कर : गोशालाओं में चारा दान और पक्षियों के लिए परिंडे लगाने जैसी पहलें कैसे शुरू हुईं?
अर्चना बिड़ला : भारत विकास परिषद के हर सदस्य के मन में जीवदया की भावना गहराई से बसती है।
हमने देखा कि गर्मी के मौसम में कई पक्षी प्यास से मर जाते हैं, इसलिए हमने परिंडे लगाकर दाना-पानी उपलब्ध करवाने की पहल की।
इसी तरह, गोशालाओं में चारा दान करना हमारी नियमित गतिविधियों में शामिल है। यह जीव मात्र में ईश्वर दर्शन की भावना को जीवित रखता है।
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राइजिंग भास्कर : कोरोना काल में परिषद ने जो कार्य किए, वे समाज के लिए प्रेरणा बने। उस समय का अनुभव कैसा रहा?
अर्चना बिड़ला : कोरोना काल समाज के लिए परीक्षा की घड़ी थी। हमने एकजुट होकर वैक्सीन शिविर, मास्क और सेनेटाइजर वितरण, तथा जरूरतमंद परिवारों को राशन सहायता जैसे अनेक कार्य किए।
वह समय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारे सदस्यों की एकता और निस्वार्थ सेवा भावना ने सबको प्रेरित किया। उस दौर में हमें समझ आया कि सेवा ही सच्ची साधना है।
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राइजिंग भास्कर : परिषद हर साल योग दिवस भी मनाती है। इसका क्या महत्व मानती हैं?
अर्चना बिड़ला : योग हमारे शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का माध्यम है।
21 जून को हम हर साल योग दिवस मनाते हैं और स्कूलों, पार्कों व संस्थानों में योग सत्र आयोजित करते हैं।
हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति योग को जीवनशैली बनाए, क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति ही समाज की सच्ची पूंजी होता है।
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राइजिंग भास्कर : शिक्षा क्षेत्र में माधव सेवा समिति के सहयोग से संस्कृत विद्यालय गोद लेना परिषद का अनूठा कदम है। कृपया इसके बारे में बताएं।
अर्चना बिड़ला : संस्कृत हमारी संस्कृति की जड़ है।
माधव सेवा समिति के अंतर्गत संचालित शिक्षा केंद्र — कुड़ी स्थित संस्कृत विद्यालय (कक्षा प्रथम से पांचवीं) को हमने गोद लिया है।
हमने वहां दो अध्यापिकाएँ लगाई हैं और विद्यालय के संचालन की पूरी जिम्मेदारी वर्ष भर निभाते हैं।
यह पहल इसलिए की गई ताकि संस्कृत के माध्यम से संस्कारों की शिक्षा निरंतर बनी रहे।
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राइजिंग भास्कर : परिषद के सदस्यों को भ्रमण पर ले जाने की परंपरा भी काफी रोचक है। इसके पीछे क्या विचार है?
अर्चना बिड़ला : हम मानते हैं कि संगठन तभी मजबूत रहता है जब उसमें आत्मीयता और पारिवारिक भावना हो।
सदस्यों के बीच समरसता बढ़ाने और नई प्रेरणा देने के लिए हम समय-समय पर सांस्कृतिक व आध्यात्मिक भ्रमण आयोजित करते हैं। इससे सदस्यों के बीच सहयोग और उत्साह की भावना और प्रगाढ़ होती है।
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राइजिंग भास्कर : आपकी अध्यक्षता में परिषद में क्या नए परिवर्तन या पहलें हुई हैं?
अर्चना बिड़ला :
हमने कई नवाचार किए हैं —
• डिजिटल माध्यम से सदस्य संवाद को सशक्त किया,
• शाखाओं को सक्रिय किया,
• स्कूलों में पर्यावरण एवं योग जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए,
• और “हर सदस्य एक पौधा” अभियान को गति दी। महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता के लिए हमने पिछले दो सालों से महिला उद्यमिता मेला लगाया। इसमें हमारी परिषद की महिलाओं ने चढ़कर सहयोग दिया और मेरा मुख्य उद्देश्य है कि महिलाओं को भी परिषद में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी निभाने का अवसर मिले इसका प्रयास किया जाता है। हमारी कोशिश रहती है कि हर कार्य में आधुनिकता और परंपरा का संतुलन बना रहे।
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राइजिंग भास्कर : समाज के युवाओं और नागरिकों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
अर्चना बिड़ला : मेरा एक ही संदेश है — सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाइए।
यदि हर व्यक्ति प्रतिदिन किसी एक जीव, पेड़ या जरूरतमंद के लिए कुछ अच्छा करे, तो समाज स्वतः सुंदर बन जाएगा।
हम सभी भारत विकास परिषद परिवार के सदस्य इसी भावना से कार्य करते हैं — “हम बदलेंगे, युग बदलेगा।”
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राइजिंग भास्कर : अंत में, परिषद के भविष्य के लिए आपकी क्या दृष्टि है?
अर्चना बिड़ला : हमारा लक्ष्य है कि सेवा कार्यों की पहुंच और बढ़े — अधिक से अधिक स्कूलों, गांवों और अस्पतालों तक हम पहुंचे।
हम संस्कार शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में स्थायी परियोजनाएँ विकसित करना चाहते हैं।
भारत विकास परिषद का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर, संस्कारित और संवेदनशील बनाना है।
हम सभी मिलकर उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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