राखी पुरोहित. जोधपुर
अभिव्यक्ति संस्था के तत्वावधान में गुरुवार सायं 4 बजे डॉ. सावित्री मदन डागा भवन नेहरू पार्क में स्व. दलपत परिहार की 11वीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी आयोजित हुई।
इसमें जोधपुर के रंगकर्मी एवं साहित्यकारों ने भाग लिया। सभी ने स्व. दलपत परिहार की स्मृतियों को याद करते हुए उनके संस्मरणों तथा अनुभवों के साथ काव्य पाठ भी किया। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ रंगकर्मी रमेश बोराणा ने कहा कि ” आदमी का जमीर और शतरंज का वजीर जिंदा रहना जरूरी है”, किशनलाल गर्ग ने ताजातरीन पर अपनी बात रखते हुए कविता पाठ किया, शब्बीर हुसैन ने बीते हुए पलों को याद करते हुए बेबाक वक्ता एवं जीवटता पर विचार रखे, रमेश भाटी नामदेव ने कहा ” तुम थे तो रोज ठहाके थे, मित्रों में धूम धड़ाके थे”, नवीन पंछी ने कहा “अंधेरा हिसाब देख रहा है उसका, मोहनदास रुक्मी ने कहा ” बरस ग्यारह बीत गया, नहीं सुखा है नैन” अशफाक फौजदार ने कहा “आपकी रुखसत से हम सब हो गए बेजार”, मनशाह नायक ने कहा ” तुमको सौ सौ वंदन पापा, तुम माथे का चंदन पापा”, डॉ . दीपा परिहार ने कहा ” क्यूं सांच सूं डरे आदमी, अठे झूठ सूं मरे आदमी”, खुर्शीद ख़ैराडी ने कहा “हम अपनी खताओं से चुराते नहीं आँखें, गोया की सजाओं से चुराते नहीं आँखें “, डॉ. छगनराज राव ने कहा “भेदभाव कर दियो बतावणौ कांई, राज पाट दे लियो बतावणौ कांई”, प्रमोद वैष्णव ने अपनी लघु कविताएं पेश की, जितेंद्र जालोरी ने बच्चों पर अपना गीत पेश किया, डॉ. नीतू परिहार ने नाट्य शास्त्र पर कविता की प्रस्तुति दी। दिनेश सिंदल, खेमकरण लालस, डॉ. चांदकौर जोशी, बसंती पंवार, डॉ. आर एस राठौड़, दिलीप राव श्रीमाली, सुभाषी जानकी, किशनचंद्र वर्मा, संतोष कुमार, अद्वैत बोहरा, रज़ा मोहम्मद खान, कल्याण विश्नोई, श्रवण विश्नोई, मंजू शर्मा जांगिड़, राजकुमार चौहान, उम्मेद भाटी, अजय करण जोशी, मनोहरसिंह, हेमा भट्ट, मनोज परिहार, मोहित परिहार, सुरभि ने भी स्व. दलपत परिहार को याद करते हुए अपनी रचनाएं सुनाई।
गोष्ठी के अंत में बॉलीवुड के हास्य अभिनेता स्व. असरानी के लिए दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. छगनराज राव ने किया तथा अभिव्यक्ति संस्था की सचिव डॉ.दीपा परिहार ने सबका आभार एवं धन्यवाद दिया।









