हास्य-व्यंग्य, गीताें-गजलों और भजनों से महका श्री जागृति संस्थान का कार्यक्रम ”झिलमिल”
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
श्री जागृति संस्थान की ओर से रविवार को प्रेक्षा हॉस्पिटल के सामने, ट्रैक्टर एसाेसिएशन, प्रभु कुंज में यशोदा माहेश्वरी की मेजबानी में ”झिलमिल” कार्यक्रम आयोजित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार रामनिवास चौधरी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में हास्य-व्यंग्य के मंझे हुए कवि ओमप्रकाश वर्मा मौजूद थे। अध्यक्षता समाजसेवी संदीप चौधरी ने की।
कार्यक्रम का आगाज राखी पुरोहित ने हूं करूं विनंती, मां आपणे, थे सुधारजो म्हारी मति…के रूप में सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद यशोदा माहेश्वरी ने घर आंगन जगमग दीपों सा हुआ, आप सभी महान विभूति से, भाव विभोर हो उठा है मन, प्रफुल्लित आतुर स्वागत अनुभूति से..अतिथियों का स्वागत किया और तुम बेसहारा हो तो किसी का सहारा बनो गीत सुनाकर श्रोताओं की दाद लूटी। रजनी प्रजापत ने इस बार दीपावली कुछ खास थी, ऐसा लगा जैसे मां आस-पास थी…रचना सुनाकर संवेदनाओं से माहौल भर दिया। उन्होंने देशभक्ति के स्वर भी मुखरित किए। दिलीप पुरोहित ने बंद मुट्ठी आए थे चले गए हाथ पसार, जेके माहेश्वरी ने दो लघु कथाएं सुनाई। राजेश भार्गव ने ऐ मन तू सुन जरा, कितनी बार ठोकरें खाई फिर भी ना संभला…, संस्थान के सचिव हर्षद भाटी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने पर रोचक कविता सुनाकर हास्य-व्यंग्य से सराबोर कर दिया। मदनदान चारण महात्मा गौतम बुद्ध, उनके पुत्र और पत्नी के संवाद पर संवेदनाओं से परिपूर्ण कविता सुनाई।
यशोदा के आंगन में कान्हा सी बांसुरी ने सुर छेड़े :
इस मौके पर राजेंद्र कुमार शाह राजन ने यशोदा के आंगन में कान्हा सी बांसुरी के सुर छेड़े। उन्होंने बांसुरी वादन के माध्यम से कई नगमों को सुर दिए। दीपोत्सव के उल्लास में उन्होंने विभिन्न स्वर मुखरित किए। चूकी देवी पटेल ने राधा गौरी, करके इशारा बुलाय गई रे, बरसाणे की छोरी…सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। स्नेहलता सुथार ने दीपोत्सव की शुभकामना देते हुए रचना से ज्ञान का आह्वान किया। राजेंद्र सुंदरकांड पाठी ने तू ना चलेगा तो चल देगी राहें, तुझकाे चलना होगा…गीत सुनाया। कमल शर्मा ने मशरुफ रिश्ते फुरसत के नहीं…पर शानदार रचना सुनाकर कहा कि रिश्ते औपचारिकता नहीं होते। उन्होंने मेले में अगर नजर ना आती तो मतवाली फीका फीका रह जाता पर्व दिवाली का…रचना भी सुनाई जो खूब सराही गई। पंकज बिंदास ने अपने चिरपरिचित अंदाज में शुभकामनाएं दीं।
हास्य-व्यंग्य से रचनाओं से गुंथी रचनाओं ने गुदगुदाया :
ओमप्रकाश वर्मा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में हास्य-व्यंग्य से ओतप्रोत रचनाओं से समां बांध दिया। उन्होंने अभी अभी मैंने गूंथ दिया आटा है, बज रही कूकर की सीटी कानों में, तवा चढ़ा है रोटी बना रहा हूं मैं, तेरे बिना मत पूछ कैसी हालत है, तू जल्दी आ जा बस इतनी सी चाहत है…। उन्होंने मुकेश, मन्नाडे और आशा भोसले और कई गायक कलाकारों की आवाज में पैरोडी सुनाकर वाह-वाही लूटी।
मुख्य अतिथि संदीप चौधरी ने आस्था का दीप जलाए रखना रचना सुनाकर आशावादी स्वर मुखरित किए। उनकी रचना बांट दे उजाला सबमें वही होता है अनमोल रत्न भी खूब पसंद की गई। इस मौके पर एनडी निंबावत, भीमराज सैन, अशफाक अहमद फौजदार, श्याम गुप्ता शांत, नीलम व्यास, तृप्ति गोस्वामी आदि ने अपना शुभकामना संदेश भेजा। कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी संदीप चौधरी ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। संस्थान के अध्यक्ष राजेश भैरवानी ने दीपोत्सव की सभी को शुभकामनाएं दीं।
Author: Dilip Purohit
Group Editor









