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Thursday, July 9, 2026, 2:41 pm

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“प्रकृति ही परमात्मा है, उसकी रक्षा करना ही सच्ची साधना है” — आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान समिति के संस्थापक अध्यक्ष रामजी व्यास से विशेष बातचीत

राइजिंग भास्कर साक्षात्कार : रामजी व्यास ने सरकारी नौकरी में रहते हुए भी पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया। वे कहते हैं — “पेड़ लगाना सिर्फ पर्यावरण बचाने का नहीं, बल्कि जीवन बचाने का काम है।” आइए जानते हैं, कैसे एक व्यक्ति ने अपने दृढ़ संकल्प से लाखों एकड़ भूमि को जीवन दिया। रामजी व्यास का दावा है कि वे पश्चिमी राजस्थान में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में इतने बड़ी स्तर पर आवाज उठाई और 11 जनहित याचिकाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का वृहद कार्य किया…। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट-

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

चार दशकों से अधिक समय से पर्यावरण संरक्षण की साधना में रत, आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान समिति के संस्थापक अध्यक्ष रामजी व्यास आज पश्चिमी राजस्थान में हरियाली के प्रतीक बन चुके हैं। सरकारी नौकरी के दौरान भी उन्होंने कभी अपने कर्तव्य और पर्यावरण के प्रति निष्ठा के बीच समझौता नहीं किया। वे कहते हैं — “पेड़ लगाना सिर्फ पर्यावरण बचाने का नहीं, बल्कि जीवन बचाने का काम है।” आइए जानते हैं, कैसे एक व्यक्ति ने अपने दृढ़ संकल्प से लाखों एकड़ भूमि को जीवन दिया। रामजी व्यास का दावा है कि वे पश्चिमी राजस्थान के पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में 11 जनहित याचिकाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वृहद कार्य किया। राइजिंग भास्कर ने उनसे विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं संपादित अंश-

राइजिंग भास्कर : व्यास जी, पर्यावरण संरक्षण की इस यात्रा की शुरुआत आपने कैसे की?

रामजी व्यास : 1980 के दशक में जब मैंने देखा कि जोधपुर के आसपास के आरक्षित वनखंडों पर अवैध कब्जे और खनन तेजी से बढ़ रहे हैं, तब मन बहुत व्यथित हुआ। मुझे लगा कि अगर आज नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ रेतीले टीले ही मिलेंगे। तभी मैंने तय किया कि सरकारी कर्मचारी होते हुए भी पर्यावरण की रक्षा को अपना जीवन उद्देश्य बनाऊंगा। उसी भावना से आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान समिति की स्थापना की। पश्चिमी राजस्थान में पहला व्यक्ति हूं जिसने 11 जनहित याचिकाओं के माध्यम से पश्चिमी राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में इतने वृहद स्तर पर कार्य किया।

राइजिंग भास्कर : आपके प्रयासों से हजारों वर्ग किलोमीटर भूमि अतिक्रमण मुक्त हुई है। इस संघर्ष में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

रामजी व्यास: सबसे बड़ी चुनौती सिस्टम के भीतर रहकर सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ना थी। कई बार दबाव बनाए गए। लेकिन जब नीयत साफ हो, तो राह मिल ही जाती है। मैंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में जनहित याचिकाओं के माध्यम से बार-बार आवाज उठाई। आज गर्व है कि उन प्रयासों से हजारों वर्ग किलोमीटर आरक्षित भूमि को बचाया। इसी तरह बेरीगंगा  वन खंड क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने के लिए भी निरंतर प्रयास किए गए। इसमें सफलता भी मिली। संरक्षित क्षेत्र बेरीगंगा में अवैध खनन रोकने के लिए न्यायालय में पीआईएल लगाकर अवैध खनन को रोकने का कार्य किया गया।

राइजिंग भास्कर : आपने तो सरकार की योजनाओं के खिलाफ भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जैसे गोविंद तालाब योजना का मामला?

रामजी व्यास: हां, वह मेरे जीवन की एक निर्णायक घटना थी। जब भूतेश्वर ब्लॉक में नगर सुधार न्यास द्वारा पर्यावरण की अनदेखी करते हुए गोविंद तालाब योजना बनाई जा रही थी, तो मैंने राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की। अदालत ने योजना को स्थगित कर दिया। उस फैसले ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण के साथ कोई भी समझौता स्वीकार नहीं होगा — चाहे वह किसी भी संस्था या सत्ता से जुड़ा क्यों न हो।

राइजिंग भास्कर : आप पौधरोपण और हरियाली बढ़ाने के लिए भी प्रसिद्ध हैं। अब तक कितने पौधे लगाए जा चुके हैं?

रामजी व्यास : हमारे संस्थान और स्थानीय सहयोगियों की मदद से जोधपुर और आसपास के इलाकों में लाखों पौधे लगाए गए हैं। हम केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहते — उनकी संरक्षा और संवर्धन पर भी ध्यान देते हैं। पश्चिमी राजस्थान की 2,48,000 एकड़ वनभूमि को सुरक्षित करने का कार्य हमारे लिए गर्व का विषय है। हर एक पौधा हमारे लिए संतान जैसा है।

राइजिंग भास्कर : पर्यावरण दिवस पर आपका संस्थान लगातार वृक्षबंधु पुरस्कार दे रहा है। इसकी प्रेरणा कहां से मिली?

रामजी व्यास : मेरा मानना है कि समाज में प्रेरणा फैलाने के लिए सकारात्मक उदाहरण सामने लाना जरूरी है। इसलिए पिछले 42 वर्षों से हम प्रतिवर्ष वृक्षबंधु पुरस्कार देते आ रहे हैं। अब तक 36 बार यह कार्यक्रम आयोजित हो चुका है। इस मंच से हम उन लोगों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने अपने स्तर पर प्रकृति की सेवा की — चाहे वह किसान हो, शिक्षक, या कोई आम नागरिक। इसके अलावा हम हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी पर स्वतंत्रता सैनानियों के सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।

राइजिंग भास्कर : इतने लंबे संघर्ष में परिवार और समाज का सहयोग कितना रहा?

रामजी व्यास: शुरुआत में कई लोगों ने कहा — “सरकारी नौकरी करते हो, इन झंझटों में मत पड़ो।” लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने देखा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है। आज मेरे परिवार, सहयोगियों और साथियों का भरपूर साथ है। यही मेरी असली ताकत है।

राइजिंग भास्कर : आज के युवाओं के लिए आपका संदेश क्या होगा?

रामजी व्यास : युवाओं को समझना चाहिए कि “पर्यावरण कोई विषय नहीं, यह जीवन की शर्त है।” मोबाइल या सोशल मीडिया से बाहर निकलकर अगर हर व्यक्ति साल में सिर्फ पांच पौधे भी लगाए और उनकी देखभाल करें, तो धरती फिर से हरियाली से भर जाएगी। प्रकृति की रक्षा सिर्फ सरकार या किसी संस्था की नहीं — हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

राइजिंग भास्कर : चार दशक की इस यात्रा को आप किस रूप में देखते हैं?

रामजी व्यास : मुझे लगता है यह यात्रा अभी अधूरी है। जब तक हर गांव, हर शहर में लोग पेड़ को अपने परिवार का हिस्सा नहीं मानेंगे, तब तक मिशन पूरा नहीं होगा। लेकिन विश्वास है — बीज बो दिए गए हैं, एक दिन ये बीज विशाल वृक्ष बनकर पूरे मरुस्थल को जीवन देंगे।

राइजिंग भास्कर : 2025 में आप किन मुद्दों पर मुख्य रूप से कार्य कर रहे हैं? 

रामजी व्यास : हमारे संस्थान द्वारा 2025 में मारवाड़ के परंपरागत जलस्रोतों का संरक्षण करने का बीड़ा उठाया गया है। इसके तहत विशेष तौर पर उम्मेद सागर बांध, बालसमंद झील का संरक्षण किया जाएगा। साथ ही चांदपोल के बाहर स्थित गोरधन तालाब, गंगलाव तालाब का भी संरक्षण किया जाएगा। यही नहीं संस्थान पूर्व में भी इनके संरक्षण के लिए कार्य कर चुका है। संस्थान ने इनके संरक्षण के लिए राजस्थान हाईकोर्ट और एनजीटी में जनहित याचिकाएं दायर कर चुका है। इनका निर्णय भी जनहित में पॉजिटिव सामने आया है। संस्थान ओरण, गोचर एवं बहाव क्षेत्र का भी संरक्षण करने की दिशा में कदम उठा चुका है। इन मुद्दों पर संस्थान बड़े स्तर पर कार्रवाई करने का निर्णय कर चुका है।

राइजिंग भास्कर : आपको अब तक कौन-कौन से सम्मान मिल चुके हैं?

रामजी व्यास : मैंने सम्मान या पुरस्कार की भावना से कभी कार्य नहीं किया। पर सरकार और संस्थाओं ने मेरे कार्य को मान्यता दी और मुझे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान मिल चुके हैं। इसके अलावा मारवाडृ रत्न पुरस्कार भी मिल चुका है। यही नहीं मोदी फाउंडेशन दिल्ली की ओर से भी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सम्मान दिया जा चुका है।

शिक्षा : प्रयास करते रहो, सफलता जरूर मिलती है 

रामजी व्यास की यह कहानी बताती है कि सच्ची सेवा न तो पद देखती है, न परिस्थिति। उन्होंने सरकारी सीमाओं से परे जाकर पर्यावरण को अपना धर्म और साधना बना लिया। पश्चिमी राजस्थान की धरती आज उनसे प्रेरित होकर फिर से हरियाली की राह पर है।
उनका संदेश सरल है —

“धरती हमारी मां है, और मां की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor