“हर दवा पर QR कोड, हर मरीज तक भरोसे की डोर” — यही हो सकता है राजस्थान की स्वास्थ्य क्रांति का अगला अध्याय।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
राजस्थान में दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। कभी नकली दवाओं की शिकायत, कभी एक्सपायरी मेडिसिन के वितरण का मामला, तो कभी सरकारी स्टोरों पर दवा की कमी की खबरें—इन सबके बीच मध्यप्रदेश की सरकार ने एक ऐसा कदम उठा लिया है, जो पूरे सिस्टम की दिशा बदल सकता है।
मध्यप्रदेश में हाल ही में दवा सप्लाई चेन में QR कोड आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया है। अब हर दवा के पैकेट पर एक यूनिक QR कोड होगा, जिसे स्कैन करके उसकी पूरी यात्रा—निर्माण से लेकर वितरण तक—ट्रैक की जा सकेगी।
राजस्थान के लिए यह कदम एक प्रेरणा और चेतावनी दोनों है। अगर राजस्थान भी जल्द QR सिस्टम को अपनाए, तो दवा वितरण की पारदर्शिता, सुरक्षा और जनता का भरोसा कई गुना बढ़ सकता है।—
क्या है दवा सप्लाई में QR सिस्टम?
QR (Quick Response) कोड एक यूनिक डिजिटल पहचान है। यह कोड किसी भी दवा की पैकिंग पर लगाया जाता है। जब कोई व्यक्ति या अधिकारी इसे स्कैन करता है, तो उसके सामने उस दवा का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड खुल जाता है—कंपनी का नाम, निर्माण की तारीख, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट, ट्रांसपोर्ट डिटेल्स, और यह भी कि वह दवा किस जिले के किस स्टोर तक पहुंची।
सरल शब्दों में कहें तो यह सिस्टम दवा की “डिजिटल यात्रा” को रिकॉर्ड करता है।
यानी अब कोई भी नकली दवा, गलत बैच, या चोरी-छिपे सप्लाई की कोशिश छिप नहीं सकती।
एमपी का मॉडल: तकनीक से पारदर्शिता की मिसाल
मध्यप्रदेश सरकार ने QR कोड सिस्टम को सबसे पहले राज्य औषधि आपूर्ति निगम (MPMSCL) के ज़रिए लागू किया। अब राज्य में हर सरकारी अस्पताल को मिलने वाली दवाओं की ट्रैकिंग QR कोड से होगी।
दवा की फैक्ट्री से लेकर जिला ड्रग वेयरहाउस और वहां से सरकारी अस्पताल तक की हर डिलीवरी का रिकॉर्ड रीयल टाइम में डिजिटल पोर्टल पर अपडेट होता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं —
“अब हम एक क्लिक में देख सकते हैं कि कौन-सी दवा कब, कहां और कितनी मात्रा में पहुंची। किसी भी गड़बड़ी या कमी की सूचना तुरंत मिल जाती है।”
यह सिस्टम सिर्फ डेटा इकट्ठा नहीं करता, बल्कि यह गड़बड़ियों की पहचान करने वाला डिजिटल प्रहरी बन गया है।
राजस्थान में स्थिति: समस्या पुरानी, समाधान अधूरा
राजस्थान में मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के ज़रिए दवाओं की आपूर्ति होती है।
राज्य के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों तक हर महीने हजारों टन दवाएँ पहुंचती हैं।
लेकिन सिस्टम में कई तरह की शिकायतें बार-बार सामने आती रही हैं —
सप्लाई में देरी
गलत दवा की डिलीवरी
नकली या एक्सपायरी दवाओं की रिपोर्ट
स्टॉक मैनेजमेंट की गड़बड़ी
2024 में बीकानेर, जोधपुर और अजमेर ज़िले में हुई जांच में पाया गया कि कई जगहों पर ड्रग स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक दवा उपलब्धता में अंतर था। यह सब इस बात का संकेत था कि सप्लाई चेन में पारदर्शिता की कमी है।
QR सिस्टम राजस्थान के लिए क्यों जरूरी है
नकली दवाओं पर रोक
राजस्थान में कई बार ऐसी शिकायतें आईं कि निजी मेडिकल स्टोरों या सप्लायरों के जरिए नकली दवाएं सरकारी चैनल में भी घुस गईं। QR कोड सिस्टम से हर दवा की असलियत तुरंत जांची जा सकती है।
अगर कोई फर्जी दवा सिस्टम में घुसने की कोशिश करे, तो वह QR स्कैन में पकड़ में आ जाएगी।
हर पैकेट का डिजिटल रिकॉर्ड
QR कोड से हर दवा का डेटा राज्य सर्वर पर दर्ज होगा —
कौन-सी कंपनी ने बनाई, कौन से गोदाम में पहुंची, कब वितरित हुई, और कब खत्म हुई।
इससे दवाओं के गायब होने, चोरी या हेराफेरी जैसी घटनाएं खत्म हो सकती हैं।
मरीजों के लिए भरोसा और सुरक्षा
राजस्थान में कई ग्रामीण इलाकों में मरीजों को यह भरोसा नहीं होता कि उन्हें जो दवा मिली, वह असली है या नहीं। अगर दवा पर QR कोड होगा, तो मरीज या डॉक्टर उसे स्कैन कर उसकी पूरी जानकारी देख सकेंगे।
इससे दवा पर जनता का विश्वास बढ़ेगा और गलत इलाज के मामले घटेंगे।—
सरकारी निगरानी आसान
QR सिस्टम से राज्य सरकार को हर समय पता रहेगा कि किस ज़िले में कौन-सी दवाएँ कम हो रही हैं या कहाँ अतिरिक्त स्टॉक है। इससे दवाओं की रीयल टाइम री-डिस्ट्रिब्यूशन संभव होगी। यानी अब “दवा खत्म होने” की समस्या सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई का विषय बनेगी।
बजट बचत और कार्यकुशलता
RMSCL हर साल दवा सप्लाई पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करता है। अगर सप्लाई डिजिटल हो जाए तो गलत डिलीवरी, डुप्लिकेट बिलिंग, और बर्बादी से बचत होगी। QR कोड सिस्टम से रिपोर्टिंग ऑटोमैटिक होगी और मैन्युअल एंट्री में होने वाली गलतियाँ खत्म होंगी।
विशेषज्ञ की राय
डॉ. आशीष कहते हैं कि —
“राजस्थान में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा है, लेकिन डेटा बेस्ड ट्रैकिंग अब भी कमजोर है। QR सिस्टम सिर्फ दवा तक सीमित नहीं रहेगा, यह अस्पताल प्रबंधन में भी पारदर्शिता लाएगा। दवाओं के QR कोड से रिसर्चर भी डेटा एक्सेस कर पाएंगे कि कौन सी दवाएं कहां ज्यादा इस्तेमाल हो रही हैं। इससे स्वास्थ्य योजनाओं की दिशा तय की जा सकेगी।
जनता की नज़र से
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में कई बार मरीजों को एक्सपायरी डेट की जानकारी तक नहीं होती। QR कोड से अगर मोबाइल स्कैन पर सारी जानकारी सामने आ जाए, तो मरीज खुद अपनी सुरक्षा का प्रहरी बन सकता है।
जयपुर की निवासी नीतू शर्मा बताती हैं —
“अस्पताल से दवा मिलने पर अगर मैं फोन से स्कैन कर देख पाऊं कि यह कब बनी और कब खत्म होगी, तो भरोसा और बढ़ेगा।”
क्या कहती है सरकार?
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है —
“हम मध्यप्रदेश के मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। RMSCL को निर्देश दिए गए हैं कि सप्लाई ट्रैकिंग सिस्टम को डिजिटल बनाया जाए। अगर QR सिस्टम सफल रहा तो इसे अगले चरण में लागू किया जाएगा।”
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में विधानसभा में कहा था कि “हम हेल्थ सेक्टर में टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दे रहे हैं। QR कोड आधारित दवा वितरण सिस्टम आने वाले समय में राजस्थान में भी लागू होगा।”—
लागू करने में चुनौतियां
QR सिस्टम जितना उपयोगी है, उतनी ही इसकी कुछ चुनौतियां भी हैं —
ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या
छोटे स्टोर्स में स्कैनिंग डिवाइस की कमी
कर्मचारियों का प्रशिक्षण
प्रारंभिक लागत में बढ़ोतरी
लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लागत दीर्घकालिक बचत में निवेश के समान है।
भविष्य का रोडमैप
राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन अगर चाहे तो इसे तीन चरणों में लागू कर सकता है —
पहला चरण : जयपुर, जोधपुर, उदयपुर जैसे बड़े जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
दूसरा चरण : सभी जिला मुख्यालयों पर विस्तार
तीसरा चरण : सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में QR आधारित दवा वितरण
एमपी ने नई मिसाल पेश की, राजस्थान में इंतजार
मध्यप्रदेश ने दवा सप्लाई में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की नई मिसाल पेश की है। अब वक्त है कि राजस्थान भी इस दिशा में कदम बढ़ाए। QR सिस्टम सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि यह एक सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बन सकता है। राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी, जब हर दवा के साथ डिजिटल भरोसे की एक खुराक भी मिलेगी।





