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निलंबन के 90 दिन के भीतर आरोप पत्र जारी नहीं किया…नोखा के निलंबित विकास अधिकारी भोमसिंह के निलंबन आदेश पर रोक

कई न्यायिक दृष्टांतों में यह प्रतिपादित किया है कि किसी भी कर्मचारी को उसके निलम्बन के पश्चात् 90 दिन के भीतर आरोप पत्र जारी करना ही होगा, अन्यथा उसे बहाल किया जाना आवश्यक होगा।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 
राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण जोधपुर ने पंचायत समिति नोखा जिला बीकानेर में विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत भोमसिंह इंदा की अपील को अंतरिम रूप से ग्राह्य करते हुए उनके निलंबन आदेश दिनांक 10 जुलाई 2025 पर अंतरिम रोक लगा दी है।
बीकानेर निवासी भोमसिंह इंदा जो वर्तमान में विकास अधिकारी के पद पर पंचायत समिति नोखा जिला बीकानेर में कार्यरत है। उसको शासन सचिव एवं आयुक्त ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा आदेश दिनांक 10 जुलाई 2025 को राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 के अन्तर्गत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया। निलम्बन के पश्चात् उसका मुख्यालय भी बीकानेर के स्थान पर बाड़मेर कर दिया गया।
विभाग द्वारा उसके निलम्बन के सौ दिन पश्चात् भी किसी तरह की चार्ज शीट या विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की गई। केवल उसकी सेवाओं को ही निलम्बित किया गया। विभाग के इस कृत्य से व्यथित होकर उसने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से एक अपील अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की। अधिकरण के समक्ष अधिवक्ता का यह तर्क था कि कार्मिक विभाग द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2022 को निलम्बित कार्मिकों के संदर्भ में परिपत्र जारी किया गया है एवं उसमें यह उल्लेखित किया गया है कि यदि कार्मिक को 45 दिन तक निलम्बन के पश्चात् विभागीय जांच प्रारम्भ नहीं की जाती व उसे कोई किसी तरह का आरोप पत्र जारी नहीं किया जाता तो कर्मचारी का निलम्बन स्वतः ही समाप्त समझा जायेगा।
वर्तमान अपील में भोमसिंह इंदा को निलम्बन के पश्चात् ना तो कोई आरोप पत्र जारी किया गया ना ही विभागीय जांच प्रारम्भ की गयी। विभाग का कृत्य कार्मिक विभाग द्वारा जारी परिपत्र के प्रतिकूल है। अपीलार्थी के अधिवक्ता ने अपने कथन के सर्मथन में सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायिक दृष्टांतों का भी हवाला दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने कई न्यायिक दृष्टांतों में यह प्रतिपादित किया है कि किसी भी कर्मचारी को उसके निलम्बन के पश्चात् 90 दिन के भीतर आरोप पत्र जारी करना ही होगा, अन्यथा उसे बहाल किया जाना आवश्यक होगा। अपीलार्थी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए अधिकरण ने कार्मिक के निलम्बन आदेश से 100 दिन व्यतीत होने पर भी किसी तरह का ‘‘आरोप पत्र या विभागीय कार्यवाही को प्रारम्भ नहीं करने को’’ अनुचित एवं कार्मिक विभाग के परिपत्र दिनांक 12 अप्रैल 2022 के विरूद्ध मानते हुए विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों के विरूद्ध मानते हुए पंचायती राज विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया व निलम्बन आदेश दिनांक 10 जुलाई 2025 पर अन्तरिम रोक लगा दी।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor