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Sunday, October 25, 2026, 4:39 am

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Lifestyle

ग़ज़ल : घर था किंवाड़ पे नहीं ताला था- हंस राज ”हंसा”

घर था किंवाड़ पे नहीं ताला था

घर था किंवाड पे नहीं ताला था।
वक्त था लोगों में नही दिवाला था।।

थी नहीं कोई चल-अचल संपत्ति।
पशुधन से इन्सान धन वाला था।।

थी नहीं तिजोरी सामान के लिए।
रखने को घर में खुला आला था।।

नहीं था कोई नंगा भूखा प्यासा।
वस्त्र मोटा निर्मल जल खाने को निवाला था।।

इन्सान इन्सान था, नहीं था खुदा।
वक्त था हकीक़त में इन्सान आला था।।

नहीं होती थी”हंसा”कभी चोरी डकैती।
इन्सान की नजर में घर शिवाला था।।

हंस राज”हंसा”
आदर्श बस्ती मंडोर
जोधपुर (राजस्थान )

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor