( रीको की जमीनों पर पहले से ही होटलें, शोरूम और संस्थानिक गतिविधियां चल रही है। खुद रीको ने कभी इसे रोकने की कोशिश नहीं की। अब सोची-समझी साजिश के तहत इसे भू उपयोग रूपांतरण का जामा पहनाकर पूंजीपूतियों को फायदा पहुंचाने का ड्रामा किया जा रहा है।)
रीको : भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा, कैसे-
-प्रदेश में 30 सालों में जमीनों का किया बंदरबांट। 429 औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का दावा, लगभग 95,273.36 एकड़ भूमि अधिग्रहित की। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 42 प्रतिशत भूमि पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ओने-पोने दामों में बड़े पूंजीपतियों को जमीन लुटाता रहा रीको। रीको की कई मौके की जमीनों पर बेशकीमती शोरूम, आवासीय बिल्डिंगें और संस्थानिक गतिविधियां वर्षों से चल रही है। रीको के अधिकारी दादागिरी से चौथ वसूली करते रहे।
अब फिर भूमि उपयोग परिवर्तन की ड्रामेबाजी- जबकि अकेले जोधपुर में एमआईए बासनी/हैंडीक्राफ्ट, फेज-1, एमआईए बासनी, फेज-2, न्यू जोधपुर (टीए), सांगरिया 1, 2, भगत की कोठी व इंडस्ट्रियल स्टेट (टीए), हैवी व लाइट इंडस्ट्रियल एरिया (टीए), इलेक्ट्रिक कॉम्प्लेक्स (टीए), सायबर पार्क में रीको की जमीन पर आवासीय, कॉमर्शियल और संस्थानिक गतिविधियां वर्षों से चल रही, रीको ने वर्षों से ओढ़ी मौन…।
-रीको ने गत 30 साल में 40.86 अरब से ज्यादा का लोन लुटाया, वसूली में फेल, भूखंड बेचकर प्रॉफिट दिखाता रहा…मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के नाम पर अफसरों ने घर भर लिए। राजस्थान में रीको में जितना भ्रष्ट तंत्र का जाल है, उसका हिसाब लगाने लग जाए तो बही-खाते छोटे पड़ जाए…राजस्थान में रीको की अधिसंख्य भूमि बड़े-बड़े पूंजीपतियों ने ओने-पोने दामों में वर्षों पूर्व खरीदकर रख ली है और ना ही उद्योग लगे और ना ही औद्योगिक गतिविधियों में उपयोग ली जा रही, अब उसका भूमि उपयाेग रूपांतरण का खेल शुरू। यही नहीं रीको की बड़ी जमीन पर कई भूमाफियाओं ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे रीको छुड़ाने की बजाय चौथ वसूली कर रहा है। जोधपुर से दिलीप कुमार पुरोहित की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
रीको। जितना छोटा नाम है, उसके भीतर भ्रष्टाचार का उतना बड़ा सागर है। भ्रष्टाचार की सारी नदियां रीको रूपी सागर में आकर मिलती है। पिछले तीस साल में सरकारी जमीन का रीको अधिग्रहण करता रहा और उद्योगों के नाम पर बेचता रहा। अधिकतर जमीनों में प्रदेश के ही नहीं देश के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों का कब्जा है। ये औद्योगिक घराने भूमाफिया बने हुए हैं। इतना ही नहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक रीको की जमीन का बड़ा हिस्सा भूमाफियाओं ने अवैध रूप से कब्जाया हुआ है, जिसे रीको के अधिकारी ना छुड़ा पा रहे हैं और ना छुड़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्हें बड़ी राशि चौथ वसूली में मिल रही है।
राजस्थान में औद्योगिक विकास की धार को गति देने के लिए RIICO नामक संगठन वर्षों से सक्रिय रहा है। लेकिन उसी के भीतर “भूमि-विकास”, “लोन वितरण एवं वसूली”, “भू-उपयोग परिवर्तन” जैसी प्रक्रियाओं में अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं। रीको का दावा है कि उसने अब तक कुल 429 औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए हैं और लगभग 95,273.36 एकड़ भूमि अधिग्रहित की है। रीको ने ₹ 40.86 अरब (बिलियन) से अधिक के लोन बांट रखे हैं, मगर वसूली के नाम पर उपलब्धि निराशाजनक है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इतनी बड़ी राशि के ऋण वितरण के बाद वसूली दर, प्रोसेस, एनपीए (Non-Performing Assets) क्या हैं—और RIICO अधिकारी इन प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पा रहे हैं।
रीको हर साल करोड़ों का प्रॉफिट दिखाता रहा, लेकिन लोन वसूली में फेल, भूखंड बिक्री पर जोर :
रीको हर साल करोड़ों रुपए का प्रॉफिट दिखाता रहा है। लेकिन रीको की आय का स्रोत का बड़ा हिस्सा भूखंड बिक्री से हुआ है, जबकि लोन वसूली में रीको का मैनेजमेंट फेल रहा है। यही नहीं रीको की बेशकीमती जमीन पर कई भूमाफियाओं ने कब्जा कर रखा है। जानकार बताते हैं कि रीको ने कई पूंजीपतियों को करोड़ों का लोन बांटा है, मगर रीको का प्रबंधन इस लोन की वसूली में सख्ती नहीं दिखा पाया और आज भी बड़ी राशि के रूप में लोन बकाया है। कई मामलों में रीको ने लोन वसूली नहीं हुई तो पिछले रास्ते से सैटलमेंट कर अपनी ही राशि का नुकसान कर दिया। रीको में भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा खेल चल रहा है, जिसकी आम पब्लिक को भनक भी नही लगती और आम पब्लिक को इससे वास्ता ही नहीं है। क्योंकि रीको के नाम पर बड़े-बड़े पूंजीपति घरानों ने जमीनों को सस्ते दामों पर खरीद कर अपनी संपत्तियों के साम्राज्य खड़े कर दिए। RIICO ने बड़े पैमाने पर लोन और भूमि-आवंटन किए, लेकिन आधारभूत-विकास, निगरानी तथा वसूली के सिस्टम को सुदृढ़ नहीं रखा। इस कारण, निष्पादन व लाभ पर प्रश्न खड़े हुए हैं।
आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के नाम पर अफसरों ने घर भर लिए :
रीको ने पहले तो खुले हाथ सस्ते दामों में जमीन लुटाई। जब वहां आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का सवाल आया तो बहती गंगा में अफसरों ने हाथ धो लिया। यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। रीको नए-नए प्लान लाता है और भूखंडों के खेल को समझना आसान नहीं है। आज भी रीको की अधिसंख्य जमीन पर मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं है या सुविधाएं जुटाई जा रही है। इस नाम पर बड़ा बजट जारी होता है और अफसर इस बजट रूपी गंगा में डुबकी लगाकर घर भरने में लगे हुए हैं। रीको का चपरासी से लेकर बाबू और बड़े अफसर करोड़पति हो गए और इसकी जांच करने के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं है। एसीबी में पिछले दो-तीन दशक के भ्रष्टाचार के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि शिकायतें तो खूब पहुंचीं मगर कार्रवाई के नाम पर कोई बड़ा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इससे जाहिर है कि एसीबी ने भी रीको के भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में कारगर कदम नहीं उठाए। रीको ने सड़क, पानी, बिजली, ड्रेनेज जैसी बुनियादी भौतिक-इंन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का दावा किया, मगर इस कड़ी में दोनों हाथों से अफसर जीमते रहे।




